संदर्भ
केरल राज्य द्वारा ज्वारीय वृद्धि से उत्पन्न तटीय बाढ़, जो समुदायों को नुकसान पहुँचाती है तथा जीवन और आजीविका क्षति का कारण बनती है, को राज्य-विशिष्ट आपदा घोषित किया गया है।
संबंधित तथ्य
- यह देश में पहली बार है कि किसी राज्य ने ज्वारीय बाढ़ (Tidal Flooding) को राज्य-विशिष्ट आपदा घोषित किया है।
- प्रभावित क्षेत्र: केरल के तट के साथ-साथ, खासकर कोच्चि कॉरपोरेशन में वाइपिन, चेल्लानम, एडाकोची और पेरुंबडप्पु जैसे इलाकों के साथ-साथ कुंबलंगी पंचायत क्षेत्र भी शामिल हैं।
उच्च ज्वार बाढ़ की तीव्रता के स्तर
- लघु बाढ़ (Minor Flooding): जल स्तर औसत उच्च ज्वार से लगभग 0.55 मीटर (1.8 फुट) ऊपर उठता है, जिससे अस्थायी व्यवधान उत्पन्न होते हैं, जैसे वर्षा जल निकासी प्रणाली का विफल होना और सड़कों का बंद होना।
- मध्यम बाढ़ (Moderate Flooding): जल का स्तर औसत उच्च ज्वार से लगभग 0.85 मीटर (2.8 फुट) ऊपर पहुँच जाता है, जिससे संपत्ति क्षतिग्रस्त हो जाती है तथा घरों और व्यवसायों में अत्यधिक व्यवधान उत्पन्न होता है।
- गंभीर बाढ़ (Major Flooding): जल का स्तर औसत उच्च ज्वार से लगभग 1.20 मीटर (3.9 फुट) ऊपर तक उठ जाता है, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर क्षति, संभावित निकासी तथा अवसंरचना मरम्मत की आवश्यकता उत्पन्न होती है।
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ज्वारीय बाढ़ के बारे में
- ज्वारीय बाढ़ से तात्पर्य निम्न-स्थित तटीय क्षेत्रों में अस्थायी जलभराव से है, जब समुद्र का जल-स्तर भारी वर्षा या चक्रवात के बिना भी सामान्य उच्च ज्वार स्तर से ऊपर बढ़ जाता है।
- उदाहरण के लिए, केरल तट के साथ, अरब सागर के जलस्तर में एक निर्धारित सीमा से ऊपर अस्थायी वृद्धि निम्न-स्थित क्षेत्रों को बार-बार जलमग्न कर देती है।
- कारण: ज्वारीय बाढ़ की स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब उच्च ज्वार का अपतटीय तूफानों, प्रबल पवनों और पूर्णिमा चक्रों के साथ सम्मिलन होता है, जिससे समुद्र के जलस्तर में अस्थायी वृद्धि होती है, जो तटीय जल निकासी प्रणालियों को प्रभावित कर स्थानीय स्तर पर बाढ़ का कारण बनती है।
- धूप वाले दिन में बाढ़: असामान्य रूप से उच्च ज्वारीय घटनाओं के दौरान होने पर इसे सामान्यतः “धूप वाले दिन की बाढ़” या “किंग टाइड फ्लडिंग” कहा जाता है।
- चक्रवात-प्रेरित तूफानी ज्वार से भिन्न: चक्रवात-प्रेरित तूफानी ज्वार के विपरीत, ज्वारीय बाढ़ की स्थिति दिन में दो बार उत्पन्न होती है और पूर्णिमा या अमावस्या के दिन यह अत्यधिक उच्च उया तीव्र होती है।
- स्थानीयकृत: ज्वारीय बाढ़ की स्थिति यह सामान्यतः अत्यधिक स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होती है, जो शहर के कुछ ब्लॉकों के स्तर पर घटित होती है।
- वैधानिक प्रावधान: आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 2(d) के अंतर्गत, ज्वारीय वृद्धि से उत्पन्न बाढ़ को आपदा के रूप में चिह्नित किया जा सकता है, यदि वह समुदायों को जीवन, आजीविका या निवास स्थितियों की क्षति पहुँचाती है।
- आवृत्ति में परिवर्तन: उच्च ज्वार बाढ़ की आवृत्ति वर्ष-दर-वर्ष मौसम और महासागरीय परिसंचरण पैटर्न में व्यापक परिवर्तनों के कारण भिन्न होती है, जैसे एल नीनो दक्षिणी दोलन (ENSO) के दौरान देखा जाता है।
- उदाहरण: हाल ही में एल नीनो चरण के दौरान, राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन के एक अध्ययन में परीक्षित संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी और पूर्वी तटों पर लगभग आधे स्थलों में उच्च ज्वार बाढ़ की आवृत्ति स्थानीय प्रवृत्तियों की बारंबारता से अधिक देखी गई।
केरल में तटीय उच्च ज्वार बाढ़ के कारण
- विशिष्ट भौतिक भूगोल: केरल का भूमि उपयोग पैटर्न और स्थलाकृति अन्य भारतीय राज्यों की तुलना में भिन्न है।
- उदाहरण: अलप्पुझा के तटीय मैदानों के कुछ भाग, विशेष रूप से कुट्टनाड क्षेत्र, समुद्र तल से नीचे स्थित हैं।
- समुद्र तल के निकटता: कोच्चि जैसे नगर औसत समुद्र तल के अत्यंत निकट स्थित हैं, जिससे ज्वारीय जल के प्रवेश के प्रति उनकी संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
- खगोलीय ज्वार: पूर्णिमा और अमावस्या समय आने वाले बृहत् ज्वार असामान्य रूप से उच्च ज्वारीय स्तर पर उत्पन्न होते हैं।
- समुद्र-स्तर वृद्धि: जलवायु परिवर्तन के कारण अरब सागर के जल-स्तर में वृद्धि ज्वारीय बाढ़ को और अधिक गंभीर बनाती है।
- नदियों एवं पश्चजल में गाद जमाव: गहराई में कमी से जल निकासी क्षमता सीमित हो जाती है, जिससे जल ठहराव की स्थिति उत्पन्न होती है।
ज्वारीय बाढ़ को राज्य-विशिष्ट आपदा घोषित करने के निहितार्थ
- वित्तीय सहायता: ज्वारीय वृद्धि से उत्पन्न बाढ़ के पीड़ितों को प्राकृतिक आपदाओं के लिए ‘राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष’ (SDRF) के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली राहत के समान वित्तीय सहायता प्राप्त होगी।
ज्वारीय बाढ़ का प्रभाव
- तटीय बाढ़ की तीव्रता में वृद्धि: भारी गाद जमाव और नदियों तथा झीलों की घटती गहराई तटीय बाढ़ को पूर्व स्तरों से अधिक गंभीर बना देती है।
- लवणता का प्रवेश: समुद्री जल का प्रवेश भूजल भंडारों और कृषि भूमि को दूषित करता है, जिससे कुट्टनाड जैसे निम्न-स्थित तटीय क्षेत्रों में धान और नारियल की उपज घटती है।
- आपदा व्यय में वृद्धि: बार-बार आने वाली ज्वारीय बाढ़ के कारण आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत राहत और मुआवजा देना पड़ता है, जिससे राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष पर वित्तीय भार बढ़ता है।
- आजीविका की क्षति: मत्स्य क्षेत्र तटीय अर्थव्यवस्थाओं में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है; ज्वारीय बाढ़ मत्स्य गतिविधियों को बाधित करती है, जाल और नौकाओं को क्षति पहुँचाती है।
- संवेदनशीलता का विस्तार: राज्य की लगभग 10 प्रतिशत जनसंख्या उच्च ज्वारीय बाढ़ से प्रभावित है तथा अनुचित भूमि उपयोग नियोजन के कारण अनेक आवास बाढ़-मैदानों, नदियों के किनारे तथा जल निकायों के निकट ‘गैर-मूल्यांकित भूमि’ या ‘पोराम्बोक लैंड’ (Poramboke lands) पर निर्मित हैं।
अधिसूचित आपदाओं के बारे में
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अनुसार, आपदा को इस प्रकार परिभाषित किया गया है-
- “प्राकृतिक या मानव-जनित कारणों” से उत्पन्न कोई आपदा, दुर्घटना, विपत्ति अथवा गंभीर घटना, जिसके परिणामस्वरूप जन-जीवन की अत्यधिक क्षति, संपत्ति का विनाश या पर्यावरण को क्षति होती है तथा जो “सहने की क्षमता से परे” से परे हो।
- श्रेणियाँ: चक्रवात, सूखा, भूकंप, अग्निकांड, बाढ़, सूनामी, ओलावृष्टि, भूस्खलन, हिमस्खलन, बादल का फटना, कीट आक्रमण तथा पाला एवं शीतलहर वर्तमान में आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित 12 आपदाएँ हैं।
- प्रभाव: आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों को लागू कर राज्यों को ‘राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष’ (NDRF) से तथा ‘राज्य स्तर पर राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष’ (SDRF) से धन प्राप्त करने की अनुमति है।
- राज्यों को पहले SDRF में उपलब्ध निधियों का उपयोग करना आवश्यक है, और केवल तब जब आपदा की तीव्रता उनके संसाधनों से परे हो, वे NDRF से धनराशि की माँग कर सकते हैं।
केरल द्वारा अधिसूचित राज्य-विशिष्ट आपदाएँ
- तटीय कटाव (Coastal erosion)
- विद्युत गरजन या बिजली का चमकना (Lightning)
- तीव्र पवन (Strong winds)
- साइलपाइपिंग (Soil piping)
- लू या हीटवेब/ सनस्ट्रोक / सनबर्न (Heatwave / Sunstroke / Sunburn)
- मानव–वन्यजीव संघर्ष (Human–wildlife conflict)
- जहाज दुर्घटना (Ship wreck) — 25 मई, 2025 को केरल तट के निकट कार्गो पोत MSE Elsa 3 के पलटने की घटना (Capsizing of the cargo vessel MSE Elsa 3 off the coast of Kerala on 25 May 2025)।
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| पहलू |
राष्ट्रीय अधिसूचित आपदा |
राज्य अधिसूचित आपदा |
| प्राधिकरण |
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा घोषित। |
संबंधित राज्य सरकार द्वारा घोषित |
| वित्तीय स्रोत |
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से सहायता |
राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से सहायता |
| प्रभाव का स्तर |
राष्ट्रीय स्तर की गंभीर आपदा, जो अनेक राज्यों को प्रभावित करे या केंद्र के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो |
किसी विशेष राज्य तक सीमित आपदा, जिसका स्थानीय स्तर पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव हो |
| उदाहरण |
चक्रवात, बड़े भूकंप, सुनामी, गंभीर सूखा (केंद्र द्वारा अधिसूचित)। |
स्थानीय बाढ़, भूस्खलन, आकाशीय बिजली, तटीय क्षरण (यदि राज्य द्वारा अधिसूचित)। |
| वित्तीय नियंत्रण |
आकलन के आधार पर गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा निधि जारी |
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार निधि का उपयोग। |