संदर्भ
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की स्वीकृति के बाद ‘क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज’ (KFD) के विरुद्ध एक उन्नत स्वदेशी वैक्सीन के चरण-I (Phase I) के नैदानिक परीक्षण प्रारंभ किए हैं।
‘क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज’ (KFD) वैक्सीन के बारे में
- यह वैक्सीन ICMR–राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (ICMR–NIV) द्वारा इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (IIL) के सहयोग से विकसित की जा रही है। यह एक पूर्णतः स्वदेशी, दो-खुराक वाली, एडजुवेंटयुक्त निष्क्रिय वैक्सीन है, जिसे 28 दिनों के अंतराल पर दिया जाता है।
- नैदानिक प्रगति: पशुओं पर चुनौती संबंधी परीक्षण और विषाक्तता अध्ययन पूर्ण हो चुके हैं। गुड लैबोरेटरी प्रैक्टिस (GLP) ग्रेड सामग्री का उत्पादन किया जा चुका है, और CDSCO की स्वीकृति के बाद चरण-I परीक्षण प्रारंभ हो गए हैं।
- चरण-I नैदानिक परीक्षणों में सामान्यतः दर्जनों प्रतिभागियों को शामिल किया जाता है। इस चरण में वैक्सीन की खुराक का स्तर और उसकी सुरक्षा की जाँच की जाती है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्त्व: यह वैक्सीन पश्चिमी घाट के राज्यों में “वन हेल्थ” दृष्टिकोण के अंतर्गत ‘टिक’ जनित जूनोटिक रोगों के विरुद्ध तैयारी को सुदृढ़ बनाती है।
क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) के बारे में
- क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) एक टिक-जनित विषाणुजनित रक्तस्रावी बुखार है, जो क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज वायरस (KFDV) के कारण होता है। इसकी पहली पहचान वर्ष 1956 में कर्नाटक में हुई थी।
- स्थानिक क्षेत्र: यह रोग पश्चिमी घाट क्षेत्र में स्थानिक है, विशेष रूप से कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गोवा और महाराष्ट्र में, और यह वन-आश्रित समुदायों को प्रभावित करता है।

- संक्रमण: KFD मुख्य रूप से संक्रमित ‘वन टिक’ के काटने से फैलता है, विशेष रूप से हीमाफाइसैलिस स्पिनिजेरा (Haemaphysalis spinigera) प्रजाति के माध्यम से।
- यह संक्रमित जानवरों, विशेषकर बीमार या मृत बंदरों के संपर्क से भी फैल सकता है।
- लक्षण और उपचार: यह तेज बुखार, गंभीर मांसपेशीय दर्द, रक्तस्राव संबंधी लक्षण और निम्न रक्तचाप संबंधी समस्या उत्पन्न कर सकता है।
- इसका कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है; उपचार सहायक प्रकृति का होता है, और राज्य सरकारें निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान करती हैं।
- रोकथाम उपाय: रोकथाम के उपायों में टीकाकरण, DEPA तेल जैसे ‘टिक’ रोधी पदार्थों का उपयोग, वन कर्मियों के लिए सुरक्षात्मक उपकरण तथा बंदरों की मृत्यु की निगरानी शामिल है।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के बारे में
- CDSCO, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत भारत की राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण (NRA) है, जो औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में कार्य करता है।
- कार्य
- भारत में नई दवाओं, वैक्सीनों और नैदानिक परीक्षणों को स्वीकृति प्रदान करना।
- दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के मानक, गुणवत्ता और सुरक्षा का विनियमन करना।
- औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के प्रवर्तन के लिए राज्य औषधि नियंत्रण प्राधिकरणों के साथ समन्वय करना।
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