संक्षेप में समाचार

24 Feb 2026

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के दूसरे चरण, अर्थात् NMP 2.0 का शुभारंभ किया।

संबंधित तथ्य

  • केंद्रीय बजट 2025–26 में NMP 2.0 का प्रस्ताव किया गया, जिसका उद्देश्य परिचालित सार्वजनिक परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के माध्यम से सतत् अवसंरचना वित्तपोषण का विस्तार करना है।
  • NMP 1.0 ने अपने ₹6 लाख करोड़ के लक्ष्य का लगभग 90% प्राप्त किया, जिससे NMP 2.0 के लिए श्रेष्ठ-प्रथाओं से संबंधित महत्त्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुए।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 के बारे में

  • यह मध्यम अवधि का एक रोडमैप प्रदान करता है, निजी निवेशकों के लिए परिसंपत्ति दृश्यता सुनिश्चित करता है तथा कार्यप्रणाली एवं क्रियान्वयन को रेखांकित करने वाला एक मार्गदर्शक ढाँचा प्रस्तुत करता है।
  • भाग लेने वाले क्षेत्र: इस पाइपलाइन में सड़क, रेलवे, विद्युत, तेल एवं गैस, नागरिक उड्डयन, बंदरगाह, दूरसंचार, कोयला और खनन जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
  • NMP 2.0 की प्रगति की निगरानी परिसंपत्ति मुद्रीकरण पर सचिवों के कोर समूह द्वारा की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करेंगे, जिससे संपूर्ण-सरकार दृष्टिकोण सुनिश्चित होगा।
  • परिसंपत्ति पुनर्चक्रण: NMP 2.0 “परिसंपत्ति पुनर्चक्रण” पर बल देता है, जिसके अंतर्गत निजी क्षेत्र की दक्षता का उपयोग कर ब्राउनफील्ड परिसंपत्तियों से पूँजी मुक्त की जाती है और उसे नई अवसंरचना (पूँजीगत व्यय) में पुनर्निवेश किया जाता है, बिना सरकारी बजटीय व्यय बढ़ाए।
  • मुद्रीकरण के साधन: इसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी रियायतें, अवसंरचना निवेश ट्रस्ट तथा नकदी प्रवाह प्रतिभूतिकरण शामिल हैं।
  • आय का आवंटन: परिसंपत्ति मुद्रीकरण से प्राप्त आय को क्रियान्वयन एजेंसी के आधार पर आवंटित किया जाता है, मंत्रालयी परियोजनाओं के लिए भारत की संचित निधि, सार्वजनिक उपक्रम/बंदरगाह प्राधिकरण परियोजनाओं के लिए संबंधित इकाई तथा मुख्यतः खनन रॉयल्टी के लिए राज्य की संचित निधि।

महत्त्व

  •  उत्पादक सार्वजनिक परिसंपत्तियों का पुनर्चक्रण कर नई परियोजनाओं के लिए संसाधन उपलब्ध कराता है।
  • न्यूनतम बजटीय बोझ के साथ संसाधनों का कुशल संचलनीयता सुनिश्चित करता है।
  • निजी निवेश और परिचालन दक्षता को बढ़ावा देता है।
  • मध्यम अवधि का रोडमैप निजी निवेशकों को संभावित परिसंपत्तियों की स्पष्टता प्रदान करता है।

शीतकालीन ओलंपिक, 2026

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वर्ष 2026 शीतकालीन ओलंपिक का समापन इटली में वेरोना एरीना में एक भव्य समापन समारोह के साथ हुआ, जिसने अब तक के सर्वाधिक भौगोलिक रूप से विस्तृत शीतकालीन खेलों को चिह्नित किया।

शीतकालीन ओलंपिक के बारे में

  • शीतकालीन ओलंपिक खेल एक अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता है, जिसमें हिम और बर्फ से संबंधित खेल शामिल होते हैं और यह प्रत्येक चार वर्ष में आयोजित की जाती है।
  • आयोजक: इनका आयोजन और पर्यवेक्षण इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी द्वारा किया जाता है, जिसका मुख्यालय लॉजेन, स्विट्जरलैंड में स्थित है।
  • हालिया मेजबान
    • वर्ष 2018 – प्योंगचांग, दक्षिण कोरिया
    • वर्ष 2022 – बीजिंग, चीन
    • वर्ष 2026 – इटली (मिलान–कोर्टिना)
    • वर्ष 2030 – फ्राँस (आल्प्स और नीस)

शीतकालीन ओलंपिक, 2026

  • आधिकारिक रूप से मिलानो कोर्टिना 2026 कहलाने वाले ये शीतकालीन ओलंपिक खेल, 25वें शीतकालीन ओलंपिक खेल थे, जिनमें 16 विधाओं में 116 पदक स्पर्धाएँ आयोजित की गईं।
  • मेजबान: इन खेलों की संयुक्त मेजबानी मिलान और कोर्टिना द’अम्पेजो द्वारा की गई, जिससे इटली चौथी बार ओलंपिक खेलों का मेजबान बना।
  • समापन समारोह: समापन समारोह का आयोजन ‘वेरोना एरीना’ में किया गया। इस समारोह में इतालवी संगीत, संस्कृति और नवाचार का उत्सव मनाया गया।
    • समारोह की थीम: समारोह की थीम थी — “ब्यूटी इन एक्शन”।

प्रदर्शन

  • नॉर्वे 2026 शीतकालीन ओलंपिक में शीर्ष प्रदर्शनकर्ता के रूप में उभरा, जिसने 18 स्वर्ण पदक और कुल 41 पदक जीतकर, अपेक्षाकृत कम जनसंख्या के बावजूद समग्र पदक तालिका में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
  • अमेरिका पदक तालिका में दूसरे स्थान पर रहा, जिसने 12 स्वर्ण पदक और कुल 33 पदक जीतकर अपने सबसे सशक्त शीतकालीन ओलंपिक प्रदर्शनों में से एक दर्ज किया।
  • इटली ने 10 स्वर्ण सहित कुल 30 पदकों के साथ अपने इतिहास का सर्वाधिक शीतकालीन ओलंपिक पदक संग्रह दर्ज किया।
  • भारत की भागीदारी: आरिफ खान ने पुरुष स्लैलम (Slalom) स्पर्द्धा में 39वाँ स्थान प्राप्त कर भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जो शीतकालीन खेलों में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।

टिटनेस तथा वयस्क डिफ्थीरिया (Td) टीका

21 फरवरी, 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान में भारत में स्वदेशी रूप से निर्मित टिटनेस तथा वयस्क डिफ्थीरिया (Td) टीके का शुभारंभ किया।

टिटनेस तथा वयस्क डिफ्थीरिया (Td) टीके के बारे में

  • Td टीका टिटनेस और डिफ्थीरिया से सुरक्षा प्रदान करता है तथा यह भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्व में उपयोग किए जाने वाले टिटनेस टॉक्सॉइड टीके का स्थान लेता है। यह परिवर्तन विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों के अनुरूप किया गया है।
    • टिटनेस यह क्लोस्ट्रिडियम टेटानी नामक जीवाणु द्वारा होने वाला एक जीवाणुजनित रोग है, जिससे मांसपेशियों में दर्दयुक्त जकड़न तथा जबड़े का जाम होना जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। यह दूषित घावों के माध्यम से फैलता है और टीकाकरण द्वारा रोका जा सकता है।
    • डिफ्थीरिया यह कोराइनेबैक्टीरियम डिफ्थीरिया नामक जीवाणु से होने वाला एक संक्रामक रोग है, जो गले और श्वसन मार्ग को प्रभावित करता है तथा साँस लेने में कठिनाई और हृदय संबंधी जटिलताएँ उत्पन्न कर सकता है। यह भी टीकाकरण से रोका जा सकता है।
  • विकासकर्ता: यह टीका स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित किया गया है। केंद्रीय अनुसंधान संस्थान सार्वजनिक क्षेत्र का एक प्रमुख टीका निर्माता संस्थान है, जो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

विशेषताएँ

  • आयु समूहों में, गर्भवती महिलाओं सहित, टिटनेस और डिफ्थीरिया के विरुद्ध संयुक्त सुरक्षा प्रदान करता है।
  • उत्तम विनिर्माण प्रथा मानकों के अंतर्गत निर्मित।
  • विपणन प्राधिकरण सहित नियामकीय स्वीकृतियाँ तथा कसौली स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला से अनुमोदन प्राप्त।
  • अप्रैल 2026 तक सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम को 55 लाख खुराकों की आपूर्ति तथा नियोजित विस्तार।
  • U-WIN प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल लाभार्थी अनुश्रवण में एकीकृत।

महत्त्व

  • स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्रों में आत्मनिर्भर भारत के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
  • प्रतिवर्ष लगभग 5 करोड़ लाभार्थियों को आच्छादित करने वाले विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम का समर्थन करता है।
  • डिफ्थीरिया के विरुद्ध सुरक्षा को सुदृढ़ करते हुए मातृ एवं नवजात टिटनेस उन्मूलन उपलब्धियों को बनाए रखता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक मानक निर्धारण प्रणाली (परिपक्वता स्तर 3) के अनुरूप सुदृढ़ नियामकीय मानकों के साथ “विश्व की औषधि भंडार” के रूप में भारत की वैश्विक स्थिति को सुदृढ़ करता है।

टेट्रोडोटॉक्सिन (TTX)

केरल के एक रेस्तराँ में मछली के अंडे खाने के बाद कई लोगों के गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने इस घटना के लिए टेट्रोडोटॉक्सिन संदूषण का संदेह व्यक्त किया है।

टेट्रोडोटॉक्सिन (TTX) के बारे में

  • एक न्यूरोटॉक्सिन: टेट्रोडोटॉक्सिन (TTX) एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला, अत्यंत शक्तिशाली मरीन न्यूरोटॉक्सिन है।
    • इसे ज्ञात सबसे शक्तिशाली नॉन-पेप्टाइड न्यूरोटॉक्सिन में से एक माना जाता है।
  • ऊष्मा-प्रतिरोधी: यह विष अत्यधिक ऊष्मा-प्रतिरोधी है, जिसका अर्थ है कि सामान्य खाना पकाने की विधियाँ (जैसे-उबालना या तलना) इसे अपघटित नहीं कर सकती हैं।
  • बैक्टीरिया से उत्पत्ति: TTX मुख्य रूप से बैक्टीरिया (जैसे- विब्रियो और स्यूडोमोनास प्रजातियाँ) द्वारा उत्पादित होता है।
    • विष से ग्रसित जीव इसे अक्सर खाद्य शृंखला के माध्यम से इन बैक्टीरिया या अन्य दूषित जीवों को खाकर ग्रहण करते हैं।
  • स्रोत: यद्यपि यह पफरफिश से प्रसिद्ध रूप से जुड़ा हुआ है, TTX कई प्रकार की समुद्री और स्थलीय प्रजातियों में पाया गया है।
    • इसमें नीले रिंग्स वाला ऑक्टोपस, कुछ गैस्ट्रोपॉड (जैसे- घोंघे), स्टारफिश, केकड़े और यहाँ तक कि न्यूट्स और मेंढक भी शामिल हैं।
  • अंगों में सांद्रता: पफरफिश जैसी समुद्री प्रजातियों में, विष अक्सर विशिष्ट अंगों, विशेष रूप से यकृत और अंडाशय (अंडे) में अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है।
  • कोई प्रतिरोरोधी दवा नहीं: टेट्रोडोटॉक्सिन विषाक्तता के लिए वर्तमान में कोई ज्ञात प्रतिरोरोधी दवा नहीं है।
  • सहायक देखभाल: उपचार मुख्य रूप से सहायक होता है, जिसका ध्यान लक्षणों को नियंत्रित करने पर केंद्रित होता है।

न्यूरोटॉक्सिन क्या होते हैं?

  • परिभाषा: न्यूरोटॉक्सिन ऐसे विषैले पदार्थ होते हैं, जो विशेष रूप से तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और परिधीय तंत्रिकाएँ) को लक्षित करते हैं, उन्हें नुकसान पहुँचाते हैं या उनके कार्य को बाधित करते हैं।
  • कार्यप्रणाली: ये आमतौर पर तंत्रिका कोशिकाओं में विद्युत संकेतों के संचरण में बाधा डालकर कार्य करते हैं।
  • सामान्य स्रोत
    • जैविक/प्राकृतिक: सर्पों (कोबरा), मकड़ियों (ब्लैक विडो), बिच्छुओं और समुद्री जीवों (पफरफिश, कोन स्नेल) द्वारा उत्पादित विष।
    • भारी धातुएँ: सीसा, पारा और आर्सेनिक जाने-माने न्यूरोटॉक्सिन हैं, जो दीर्घकालिक संज्ञानात्मक क्षति का कारण बन सकते हैं।
    • रसायन: कीटनाशक, कुछ विलायक और औद्योगिक रसायन।
  • चिकित्सा अनुप्रयोग: अधिक मात्रा में घातक होने के बावजूद, कुछ न्यूरोटॉक्सिन की थोड़ी मात्रा का उपयोग चिकित्सा में किया जाता है।

79वें ब्रिटिश अकादमी फिल्म पुरस्कार (बाफ्टा) 2026

मणिपुरी भाषा की फिल्म ‘बोंग’ ने 79वें ब्रिटिश अकादमी फिल्म पुरस्कार, 2026 में सर्वश्रेष्ठ बाल एवं पारिवारिक फिल्म का पुरस्कार जीता, जो भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

  • ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ रूपांतरित पटकथा सहित छह पुरस्कार जीते।

बाफ्टा (BAFTA) के बारे में

  • ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स (BAFTA) यूनाइटेड किंगडम स्थित एक प्रतिष्ठित संस्था है, जो फिल्म, टेलीविजन और संबंधित रचनात्मक कलाओं में उत्कृष्टता को सम्मानित करती है।
  • स्थापना: BAFTA की स्थापना वर्ष 1947 में निर्माता अलेक्जेंडर कोर्डा के नेतृत्व में प्रमुख फिल्म निर्माताओं द्वारा की गई थी और निर्देशक डेविड लीन इसके पहले अध्यक्ष थे।
    • तब से यह एक वैश्विक सदस्यता संस्था के रूप में विकसित हो गई है, जो स्क्रीन उद्योगों में कलात्मक और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देती है।

बोंग (Boong) के बारे में

  • बोंग एक मणिपुरी ड्रामा है, जो लक्ष्मीप्रिया देवी द्वारा निर्देशित है और मणिपुर की सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह फिल्म एक युवा लड़के की अपने बिखरे हुए परिवार को फिर से जोड़ने की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है।
  • विजेता श्रेणी: फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ बाल एवं पारिवारिक फिल्म का पुरस्कार जीता और यह सम्मान पाने वाली पहली भारतीय फिल्म बन गई।

महत्त्व

  • यह जीत क्षेत्रीय भारतीय कथाकला और स्वतंत्र बाल सिनेमा की बढ़ती वैश्विक पहचान को उजागर करती है।
  • यह पूर्वोत्तर भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक कहानियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाती है, जिन्हें मुख्यधारा के सिनेमा में ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व मिला है।

प्रहार: भारत की पहली आतंकवाद विरोधी नीति

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘प्रहार’ नामक भारत की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति जारी की है, जो देश के आतंकवाद विरोधी और साइबर सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करती है।

प्रहार (PRAHAAR) के बारे में

  • प्रहार भारत का पहला एकीकृत आतंकवाद-विरोधी नीति ढाँचा है, जिसका उद्देश्य सीमा पार आतंकवाद, साइबर हमलों और उभरती तकनीकी चुनौतियों से उत्पन्न खतरों का समाधान करना है।
  • यह आतंकवाद के प्रति एक व्यापक और जीरो-टाॅरलेंस दृष्टिकोण को दर्शाता है, साथ ही यह भी पुष्टि करता है कि भारत आतंकवाद को किसी भी धर्म, जाति, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • बहुआयामी खतरे की पहचान: नीति में राज्य-प्रायोजित और गैर-राज्य अभिकर्ताओं सहित भूमि, वायु और समुद्री क्षेत्रों में मौजूद खतरों को स्वीकार किया गया है।
    • साइबर और हाइब्रिड युद्ध पर ध्यान केंद्रित: यह नीति आपराधिक हैकरों और शत्रु राष्ट्र-राज्यों द्वारा भारत को साइबर हमलों के माध्यम से महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे पर निशाना बनाने से उत्पन्न जोखिमों पर प्रकाश डालती है।
    • महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा: बिजली, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए क्षमताओं को मजबूत किया गया है।
    • प्रौद्योगिकी-आधारित आतंकी नेटवर्क: आतंकवादी समूह प्रचार, भर्ती, वित्तपोषण और परिचालन समन्वय के लिए सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट का उपयोग करते हैं।
    • कानूनी सुदृढ़ीकरण तंत्र: नीति मजबूत, साक्ष्य-आधारित सजा सुनिश्चित करने के लिए एफआईआर दर्ज करने से लेकर अभियोजन तक हर चरण में कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करने की सिफारिश करती है।
  • महत्त्व
    • राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे को सुदृढ़ बनाना: प्रहार एक समन्वित, जीरो-टालरेंस वाली आतंकवाद-विरोधी रणनीति को संस्थागत रूप देता है, जिसमें साइबर, समुद्री, हवाई और जमीनी सुरक्षा को एकीकृत किया गया है, साथ ही महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को असामाजिक तत्त्वों से सुरक्षित रखा गया है।
    • कानूनी और वैश्विक समन्वय: यह प्रारंभिक कानूनी हस्तक्षेप के माध्यम से अभियोजन को मजबूत करता है और आतंकवाद वित्तपोषण, साइबर-सक्षम उग्रवाद और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक प्रतिबद्धताओं के साथ भारत के प्रयासों को संरेखित करता है।

माल व्यापार सूचकांकों के लिए आधार वर्ष संशोधित किया गया

वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय (DGCI&S) ने भारत के माल व्यापार सूचकांकों के आधार वर्ष को 2012-13 से संशोधित करके 2022-23 कर दिया है।

माल व्यापार सूचकांकों के बारे में

  • वस्तु व्यापार सूचकांक समय के साथ निर्यात और आयात की जाने वाली भौतिक वस्तुओं की कीमत (इकाई मूल्य) और मात्रा में होने वाले परिवर्तनों को मापते हैं।
    • व्यापार की शर्तों और वास्तविक जीडीपी वृद्धि की गणना के लिए ये सूचकांक आवश्यक हैं।
  • उदाहरणों में निर्यात/आयात इकाई मूल्य सूचकांक, मात्रा सूचकांक और द्विपक्षीय/क्षेत्रीय व्यापार सूचकांक शामिल हैं।

आधार वर्ष के बारे में

  • आधार वर्ष एक संदर्भ आधारित वर्ष होता है, जिसे 100 का सूचकांक मान दिया जाता है, जिसका उपयोग बाद की अवधियों में कीमतों या मात्राओं में होने वाले परिवर्तनों को मापने के लिए किया जाता है।
  • उपयोग: वस्तु व्यापार सूचकांकों जैसे निर्यात और आयात इकाई मूल्य सूचकांक, मात्रा सूचकांक और व्यापार की शर्तों की गणना करने के लिए।
    • इन सूचकांकों का उपयोग सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अधीन राष्ट्रीय लेखा प्रभाग (NAD) और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आकलन, भुगतान संतुलन विश्लेषण और बाह्य क्षेत्र आकलन के लिए किया जाता है।
  • निर्धारण प्रक्रिया: आधार वर्ष का चयन आर्थिक स्थिरता और प्रचलित व्यापार पैटर्न की प्रतिनिधित्व क्षमता के आधार पर किया जाता है।
  • उस वर्ष के व्यापार मूल्यों के अनुसार, लास्पेयर सूचकांक पद्धति का उपयोग करके भार निर्धारित किए जाते हैं।

संशोधन की आवश्यकता

  • व्यापार संरचना में संरचनात्मक परिवर्तन: तकनीकी प्रगति और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में परिवर्तनों के कारण भारत के निर्यात और आयात बास्केट में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं।
  • नीतिगत प्रासंगिकता में सुधार: अद्यतन भार मूल्य परिवर्तनों और व्यापार प्रतिस्पर्द्धात्मकता के मापन में सटीकता बढ़ाते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ सामंजस्य: समय-समय पर संशोधन से कार्यप्रणाली में सुधार और वैश्विक सांख्यिकीय सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ अनुरूपता सुनिश्चित होती है।

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