संक्षिप्त समाचार

16 Mar 2026

संगीत कलानिधि सम्मान 

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प्रख्यात वीणा वादक जयंती कुमारेश को चेन्नई स्थित द म्यूजिक अकादमी के 100वें सम्मेलन में संगीत कलानिधि सम्मान के लिए चुना गया है।

  • वहीं, भरतनाट्यम नर्तक नरेंद्र जी को नृत्य कलानिधि पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

संगीत कलानिधि पुरस्कार के बारे में

  • परिचय: संगीत कलानिधि कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान माना जाता है, जो इस क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
  • उत्पत्ति: कर्नाटक संगीत के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान माना जाने वाला यह पुरस्कार वर्ष 1942 में अस्तित्व में आया।
    • इसका उद्भव दक्षिण भारत में 12वीं से 17वीं शताब्दी के बीच प्राचीन हिंदू भक्ति परंपराओं से हुआ।
    • इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं— कृति रचनाएँ, राग-ताल प्रणाली, तात्कालिक प्रस्तुति और गायन पर विशेष बल, जिसमें वीणा और मृदंगम् जैसे वाद्य यंत्रों का उपयोग होता है।
  • संस्था: यह पुरस्कार द म्यूजिक अकादमी, चेन्नई द्वारा प्रदान किया जाता है, जिसकी स्थापना वर्ष 1927 के अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन (मद्रास) से प्रेरित होकर शास्त्रीय कलाओं के संवर्द्धन हेतु की गई थी।
  • पुरस्कार के घटक: इस सम्मान में एक स्वर्ण पदक, एक प्रशस्ति-पत्र और अकादमी के वार्षिक दिसंबर संगीत सम्मेलन में मान्यता शामिल है।
  • चयन और मानदंड: यह सम्मान उन प्रतिष्ठित कलाकारों, विद्वानों या संगीतकारों को दिया जाता है, जिन्होंने कर्नाटक संगीत के प्रदर्शन, शोध और प्रसार में आजीवन योगदान दिया हो।
  • संगीत परंपरा में भूमिका: इस सम्मान के प्राप्तकर्ता परंपरागत रूप से अकादमी के वार्षिक सम्मेलन के शैक्षणिक सत्रों की अध्यक्षता करते हैं और कर्नाटक संगीत पर व्याख्यान व चर्चाओं में योगदान देते हैं।

जयंती कुमारेश के बारे में

  • जयंती कुमारेश एक प्रसिद्ध सरस्वती वीणा वादक हैं, जो प्रतिष्ठित लालगुड़ी संगीत परंपरा से संबंधित हैं। उन्हें एस. बालचंदर जैसे महान उस्तादों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त हुआ।
  • संगीत में योगदान: उन्होंने वीणा की लोकप्रियता को पुनर्जीवित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसे संगीत समारोहों, सहयोगों और नवाचारपूर्ण रचनाओं के माध्यम से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है।
  • सहयोग और सम्मान: जयंती कुमारेश ने जाकिर हुसैन जैसे महान संगीतकारों के साथ सहयोग किया है, जिससे कर्नाटक संगीत को विभिन्न मंचों पर व्यापक पहचान मिली है।
  • कर्नाटक संगीत में भूमिका: उन्होंने अपने प्रदर्शन, शिक्षण और शोध कार्य के माध्यम से वीणा वादन की प्रस्तुति को आधुनिक स्वरूप दिया है, साथ ही पारंपरिक कर्नाटक संगीत की सौंदर्यात्मकता को भी संरक्षित रखा है।
  • भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं में वीणा सरस्वती से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है, जो ज्ञान, संगीत और कलात्मक शिक्षा का प्रतीक है।

ट्राइसल्फाइड मेटाथेसिस अभिक्रिया

फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक नई ट्राइसल्फाइड मेटाथिसिस अभिक्रिया की खोज की है, जहाँ सल्फर श्रृंखलाएँ बिना ऊष्मा, प्रकाश या उत्प्रेरक के सामान्य तापमान पर स्वतः ही अपने भागीदारों का आदान-प्रदान करती हैं।

ट्राइसल्फाइड मेटाथेसिस अभिक्रिया के बारे में

  • यह एक नवीन रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें तीन सल्फर परमाणुओं वाली अणु संरचनाएँ (R–S–S–S–R) आपस में अपने घटकों का तेजी से आदान-प्रदान करती हैं।
  • अभिक्रिया की कार्यविधि
    • सल्फर शृंखला का आदान-प्रदान: दो ट्राइसल्फाइड अणु अपने-अपने जुड़े हुए समूहों का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे नए अणु बनते हैं। इस प्रक्रिया को मेटाथेसिस कहा जाता है।
    • सामान्य परिस्थितियों में होना: जहाँ सामान्यतः सल्फर से संबंधित अभिक्रियाओं के लिए ऊष्मा, प्रकाश या उत्प्रेरक की आवश्यकता होती है, वहीं यह अभिक्रिया कमरे के तापमान पर स्वतः घटित होती है, विशेषकर कुछ विलायकों (जैसे- डाइमेथाइलफॉर्मामाइड) में।
    • तेज और प्रतिवर्ती प्रक्रिया: यह अभिक्रिया कुछ ही सेकंड में संतुलन प्राप्त कर लेती है और इसमें बंधों का आदान-प्रदान पूर्णतः प्रतिवर्ती होता है, जिससे अणु बार-बार पुनर्व्यवस्थित हो सकते हैं।
  • खोज का महत्त्व
    • औषधि विकास में नए मार्ग: वैज्ञानिकों ने इस अभिक्रिया का उपयोग कैंसर-रोधी यौगिकों (जैसे- कैलिचीएमाइसिन) में परिवर्तन करने के लिए किया, जिससे औषधि डिजाइन में नई संभावनाएँ खुलती हैं।
    • पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का विकास: इस अभिक्रिया के माध्यम से ऐसे नए प्लास्टिक विकसित किए गए हैं, जिनमें ट्राइसल्फाइड बंध होते हैं और जिन्हें आसानी से तोड़कर पुनः मूल घटकों में परिवर्तित किया जा सकता है।
    • पदार्थ एवं आणविक रसायन में प्रगति: तेज और नियंत्रित सल्फर आदान-प्रदान से स्वतः पुनर्गठित होने वाले अणु, स्मार्ट पॉलिमर और प्रतिक्रियाशील पदार्थों के विकास में सहायता मिल सकती है, जो जैव-प्रौद्योगिकी और उन्नत निर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।

हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस (HSV)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी केंद्रीय सुधार गृह में हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस (Herpes Simplex Virus) के प्रकोप से 92 कैदी संक्रमित हुए और 7 लोगों की मृत्यु हो गई।

हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस के बारे में

  • परिचय: हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस एक सामान्य वायरल संक्रमण है, जो हर्पीसविरिडी कुल से संबंधित है।
  • मुख्य प्रकार
    • HSV-1: मुख्यतः मुख संबंधी हर्पीस (मुँह के आसपास छाले) का कारण बनता है।
    • HSV-2: मुख्यतः जननांग हर्पीस का कारण बनता है।
  • संचरण का तरीका: यह सीधे त्वचा से त्वचा के संपर्क, यौन संपर्क या संक्रमित शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से प्रसारित होता है।
  • लक्षण: इससे दर्दनाक छाले या घाव, खुजली, बुखार और सूजी हुई लसीका ग्रंथियाँ हो सकती हैं; कई संक्रमण लक्षणहीन रह सकते हैं।
  • सुप्तावस्था: वायरस तंत्रिका कोशिकाओं में सुप्त अवस्था में रह सकता है और समय-समय पर पुनः सक्रिय हो सकता है, जिससे बार-बार प्रकोप हो सकता है।
  • जटिलताएँ: गंभीर मामलों में यह मस्तिष्कशोथ (एन्सेफेलाइटिस) जैसी जानलेवा स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
  • उपचार: इसका स्थायी उपचार उपलब्ध नहीं है। एंटीवायरल दवाएँ लक्षणों को कम करने और बार-बार होने वाले प्रकोप को नियंत्रित करने में सहायक होती हैं।
  • रोकथाम: सक्रिय घावों के सीधे संपर्क से बचाव, सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाना तथा व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना।

सुजल गाँव पहचान संख्या

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने पूरे देश में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं के डिजिटल मानचित्रण के लिए सुजल गाँव पहचान संख्या (Sujal Gaon ID) की शुरुआत की है।

सुजल गाँव पहचान संख्या के बारे में

  • परिचय: सुजल गाँव पहचान संख्या एक योजना-आधारित विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या है, जो जल जीवन मिशन के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण पाइप जल आपूर्ति योजना को दी जाती है।
  • उद्देश्य: ग्रामीण पेयजल अवसंरचना की निगरानी और प्रबंधन के लिए एक समग्र डिजिटल डेटाबेस तैयार करना।
  • डिजिटल एकीकरण: यह पहचान संख्या सुजलाम् भारत डिजिटल ढाँचे से जुड़ी हुई है, जिससे जल स्रोत से नल तक संपूर्ण जल आपूर्ति प्रणाली का मानचित्रण संभव होता है।
  • विस्तार: 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग 1.64 लाख सुजल गाँव पहचान संख्याएँ जारी की गई हैं, जो 67,000 सुजलाम् भारत पहचान संख्याओं से संबद्ध हैं।
  • प्रशासनिक प्रभाव: यह प्रणाली पारदर्शिता, जवाबदेही और वास्तविक समय निगरानी को सुदृढ़ करती है।
  • वित्तीय शर्त: राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत केंद्रीय सहायता प्राप्त करने हेतु सुजल गाँव पहचान संख्या का निर्माण अनिवार्य किया गया है।
  • महत्त्व: यह पहल डिजिटल शासन और कुशल सेवा वितरण को बढ़ावा देती है, जो विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

सुजलाम् भारत

  • परिचय: सुजलाम् भारत एक राष्ट्रीय डिजिटल ढाँचा है, जिसे जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति प्रणालियों के लिए विकसित किया गया है।
  • उद्देश्य: भारत के गाँवों में जल स्रोत से नल तक पूरी जल आपूर्ति शृंखला का डिजिटल मानचित्रण और निगरानी करना।
  • डिजिटल एकीकरण: यह मंच अवसंरचना, सेवा क्षेत्र और योजनाओं से संबंधित आँकड़ों को सुजल गाँव पहचान संख्या जैसे विशिष्ट पहचानकर्ताओं के माध्यम से जोड़ता है।
  • निगरानी कार्य: यह वास्तविक समय ट्रैकिंग, पारदर्शिता और साक्ष्य-आधारित निर्णय-निर्माण को सक्षम बनाता है।
  • जल जीवन मिशन 2.0 में भूमिका: सुजलाम भारत इस मिशन के अंतर्गत डिजिटल निगरानी और प्रशासन का आधारभूत तंत्र के रूप में कार्य करता है।

प्रिट्जकर वास्तुकला पुरस्कार

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हाल ही में चीन के लियू जियाकुन को वार्षिक प्रिट्जकर वास्तुकला पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

प्रिट्जकर वास्तुकला पुरस्कार के बारे में

  • स्थापना: इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1979 में जे ए. प्रिट्जकर और सिंडी प्रिट्जकर द्वारा की गई थी।
  • प्रशासन: यह पुरस्कार हयात फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया जाता है।
  • उद्देश्य: यह सम्मान ऐसे जीवित वास्तुकार को दिया जाता है, जिनके कार्य में असाधारण प्रतिभा, दूरदृष्टि और मानवता के प्रति योगदान झलकता हो।
  • महत्व: इसे व्यापक रूप से “वास्तुकला का नोबेल पुरस्कार” माना जाता है।
  • भारतीय विजेता: भारत के बालकृष्ण दोशी इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय बने थे (वर्ष 2018)।

ऑस्कर 2026

98वाँ अकादमी पुरस्कार (ऑस्कर) समारोह लॉस एंजिल्स में आयोजित किया गया, जिसमें वैश्विक सिनेमा और फिल्म निर्माण की उत्कृष्ट उपलब्धियों का सम्मान किया गया।

ऑस्कर 2026 के प्रमुख विजेता

  • संचालक: इस समारोह की मेजबानी हास्य कलाकार कोनन ओ’ब्रायन ने की।
  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म: “वन बैटल आफ्टर अनदर” – इस फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता और समारोह में सबसे अधिक पुरस्कार प्राप्त किए।
  • सर्वश्रेष्ठ निर्देशक: पॉल थॉमस एंडरसन – फिल्म “वन बैटल आफ्टर अनदर” के लिए।
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: माइकल बी. जॉर्डन – फिल्म “सिनर्स” के लिए।
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री: जेसी बकली – हैमनेट में अपने अभिनय के लिए जेसी बकले को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार प्रदान किया गया है।
  • सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म: ‘सेंटिमेंटल वैल्यू’ को सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म का पुरस्कार प्रदान किया गया है।
  • सर्वश्रेष्ठ एनिमेटेड फीचर फिल्म: ‘के-पॉप डेमन हंटर्स’ को सर्वश्रेष्ठ एनिमेटेड फीचर फिल्म का पुरस्कार प्रदान किया गया है।
  • भारत से संबंधित प्रमुख तथ्य: ‘होमबाउंड’ (निर्देशक: नीरज घायवान) भारत की आधिकारिक प्रविष्टि थी, लेकिन अंतिम नामांकन प्राप्त नहीं कर सकी है।
  • भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्माता गीता गांधबीर को वृत्तचित्र श्रेणियों में दो ऑस्कर नामांकन प्राप्त हुए, जिससे उन्होंने एक ही वर्ष में एक साथ नामांकन प्राप्त करके इतिहास रच दिया।
  • उनकी फिल्में द परफेक्ट नेबर (सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र फीचर) और द डेविल इज बिजी (सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र लघु फिल्म) नामांकित हुईं, लेकिन पुरस्कार नहीं जीत सकीं।

अकादमी पुरस्कार (ऑस्कर) के बारे में

  • परिचय: अकादमी पुरस्कार, जिन्हें सामान्यतः ऑस्कर कहा जाता है, वैश्विक फिल्म उद्योग में उत्कृष्टता को मान्यता देने वाले सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार हैं।
  • आयोजक संस्था: इन्हें अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
  • स्थापना:  इनकी शुरुआत वर्ष 1929 में हुई थी, जिससे यह विश्व के सबसे पुराने मनोरंजन पुरस्कारों में से एक हैं।
  • स्थान: समारोह सामान्यतः डॉल्बी थिएटर, लॉस एंजिल्स (संयुक्त राज्य अमेरिका) में आयोजित किया जाता है।
  • उद्देश्य: ये पुरस्कार अभिनय, निर्देशन, पटकथा लेखन, संगीत और तकनीकी क्षेत्रों सहित फिल्म निर्माण के विभिन्न पहलुओं में उत्कृष्ट उपलब्धियों को सम्मानित करते हैं।

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