क्यूबा

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अमेरिका द्वारा तेल क्षेत्रों की नाकाबंदी के कारण देशव्यापी ब्लैकआउट के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “क्यूबा पर कब्जा करने” का सुझाव दिया, जिससे भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।
क्यूबा के बारे में
- परिचय: क्यूबा, जिसकी राजधानी हवाना है, कैरेबियन क्षेत्र का सबसे बड़ा द्वीपीय देश है और यह ग्रेटर एंटिलीज द्वीपसमूह का हिस्सा है।
- स्थान: क्यूबा उत्तरी कैरेबियन में स्थित है, जहाँ अटलांटिक महासागर, मैक्सिको की खाड़ी और कैरेबियन सागर का संगम होता है।
- समुद्री सीमाएँ: क्यूबा की समुद्री सीमाएँ संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको, बहामास, जमैका और हैती से मिलती हैं।
- द्वीपीय संरचना: क्यूबा में मुख्य द्वीप, ‘इस्ला दे ला जुवेंटुद’ तथा 4,000 से अधिक छोटे द्वीप और प्रवाल द्वीप (केज) शामिल हैं।
- स्थलाकृति एवं पर्वत: क्यूबा में मैदानी क्षेत्र और पहाड़ियाँ हैं, साथ ही सिएरा माएस्ट्रा जैसी पर्वत शृंखलाएँ स्थित हैं, जहाँ इसका सर्वोच्च शिखर पिको तुर्क्विनो है।
- जलवायु: क्यूबा में उष्णकटिबंधीय जलवायु पाई जाती है, जिसमें स्पष्ट वर्षा ऋतु और शुष्क ऋतु होती हैं। यह क्षेत्र समुद्री प्रभावों से प्रभावित है और चक्रवातों के प्रति संवेदनशील है।
- वनस्पतियाँ और भूमि उपयोग: उपजाऊ मैदानी क्षेत्रों में कृषि कार्य किया जाता है, जबकि तटीय और पर्वतीय क्षेत्रों में वन और मैंग्रोव पाए जाते हैं।
- जल संसाधन: मुख्य नदियों में काउटो नदी और टोआ नदी शामिल हैं, जो सिंचाई और पारिस्थितिकी के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
- प्राकृतिक संसाधन: क्यूबा कोबाल्ट, निकेल, लौह अयस्क, पेट्रोलियम जैसे खनिज संसाधनों से समृद्ध है, साथ ही इसके पास महत्त्वपूर्ण कृषि और वन संसाधन भी हैं।
- भू-राजनैतिक महत्त्व: संयुक्त राज्य अमेरिका के निकट स्थित होने और महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों के पास होने के कारण, क्यूबा कैरेबियन क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण भू-राजनैतिक और समुद्री केंद्र है।
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लघु जलविद्युत विकास योजना
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वच्छ और विकेंद्रीकृत ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए लघु जलविद्युत विकास योजना को स्वीकृति दी है।
लघु जलविद्युत विकास योजना के बारे में
- नोडल मंत्रालय: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)।
- उद्देश्य: लघु जलविद्युत परियोजनाओं (SHPs) से बिजली उत्पादन को सतत् और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से बढ़ावा देना।
- अवधि और वित्तीय व्यय: यह योजना वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक के लिए ₹2584.60 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ स्वीकृत की गई है।
- क्षमता: यह योजना 1–25 मेगावाट क्षमता वाली लघु जलविद्युत परियोजनाओं का समर्थन करती है और लगभग 1500 मेगावाट क्षमता स्थापना का लक्ष्य रखती है।
- केंद्रित क्षेत्र: पहाड़ी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों और सीमावर्ती जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहाँ जलविद्युत की उच्च क्षमता है।
- वित्तीय सहायता: पूर्वोत्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए अधिक सहायता (₹3.6 करोड़/मेगावाट या 30% लागत) तथा अन्य राज्यों के लिए कम सहायता (₹2.4 करोड़/मेगावाट या 20% लागत) प्रदान की जाएगी, साथ ही परियोजना-वार सीमाएँ निर्धारित हैं।
- निवेश और आर्थिक प्रभाव: इससे लगभग ₹15,000 करोड़ का निवेश आकर्षित होने और स्वच्छ ऊर्जा तथा ग्रामीण अवसंरचना को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।
- महत्त्व: यह आत्मनिर्भर भारत, विकेंद्रीकृत ऊर्जा को बढ़ावा देता है तथा भारत के नवीकरणीय ऊर्जा और नेट-जीरो लक्ष्यों में योगदान करता है।
लघु जलविद्युत (SHP)
- परिभाषा: लघु जलविद्युत से आशय ऐसे छोटे पैमाने के जलविद्युत परियोजनाओं से है, जिनकी क्षमता भारत में सामान्यतः 25 मेगावाट तक होती है।
- कार्य सिद्धांत: यह नदियों, धाराओं या नहरों के जल के प्राकृतिक प्रवाह या गिरावट का उपयोग कर टरबाइन घुमाकर बिजली उत्पन्न करता है।
- पर्यावरणीय प्रभाव: लघु जलविद्युत एक नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है, जिसका पर्यावरण पर प्रभाव बड़े जलविद्युत परियोजनाओं की तुलना में अपेक्षाकृत कम होता है।
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पीएम-पोषण (PM-POSHAN)
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संसदीय समिति ने पीएम-पोषण योजना की समीक्षा की और किशोर पोषण अंतराल को दूर करने तथा शैक्षिक परिणामों में सुधार के लिए इसके दायरे का विस्तार करने की सिफारिश की।
संसदीय समिति की प्रमुख सिफारिशें
- नाश्ता: छात्रों के पोषण और एकाग्रता में सुधार के लिए मध्याह्न भोजन के साथ कम-से-कम हल्का नाश्ता प्रदान करने की सिफारिश की गई।
- कक्षा 10 तक विस्तार: योजना को कक्षा 10 तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया, ताकि कक्षा 8 के बाद भी निरंतर पोषण समर्थन सुनिश्चित किया जा सके।
- कक्षा 12 तक विस्तार: अगले पाँच वर्षों में योजना को कक्षा 12 तक विस्तारित करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि किशोरों को समर्थन मिल सके।
- किशोर पोषण पर ध्यान: इस बात पर बल दिया गया कि किशोरावस्था विकास का एक महत्त्वपूर्ण चरण है और बेहतर पोषण से स्वास्थ्य समस्याएँ और स्कूल छोड़ने की दर (विशेषकर लड़कियों में) कम हो सकती है।
- शिक्षण परिणामों में सुधार: पोषण को संज्ञानात्मक प्रदर्शन, एकाग्रता और परीक्षा की तैयारी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
- स्कूल अवसंरचना में असमानता कम करना: पीएम-श्री स्कूलों के लाभ को अधिक सामान्य सरकारी स्कूलों तक बढ़ाने के लिए मानकों में ढील देने की सिफारिश की गई।
पीएम-पोषण (प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण) योजना के बारे में
- प्रारंभ: इसे वर्ष 1995 में मिड डे मील या प्राथमिक शिक्षा के लिए पोषण समर्थन का राष्ट्रीय कार्यक्रम (NP-NSPE) के रूप में शुरू किया गया था।
- विकास: बाद में इसे उच्च प्राथमिक कक्षाओं तक विस्तारित किया गया और वर्ष 2021 में इसका नाम बदलकर पीएम-पोषण कर दिया गया।
- प्रकृति: यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जो स्कूल के बच्चों को पौष्टिक पका हुआ भोजन प्रदान करती है, ताकि स्वास्थ्य और शिक्षा के परिणामों में सुधार हो सके।
- लाभार्थी: यह योजना कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के छात्रों को कवर करती है, जो सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ते हैं, साथ ही विशेष प्रशिक्षण केंद्रों के छात्रों को भी शामिल करती है।
- उद्देश्य: इसका लक्ष्य पोषण स्तर में सुधार, नामांकन और उपस्थिति बढ़ाना तथा स्कूल छोड़ने की दर कम करना है, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच।
- पोषण प्रावधान: भोजन को निर्धारित कैलोरी और प्रोटीन मानकों के अनुरूप तैयार किया जाता है और कुछ मामलों में सुदृढ़ खाद्य पदार्थ तथा सूक्ष्म पोषक तत्त्व भी शामिल किए जाते हैं, ताकि कुपोषण को दूर किया जा सके।
पीएम-पोषण की उपलब्धियाँ
- व्यापक कवरेज: यह योजना लगभग 11–12 करोड़ बच्चों को 11 लाख से अधिक स्कूलों में कवर करती है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल भोजन कार्यक्रम बनती है।
- बाल पोषण में सुधार: इस योजना ने कैलोरी और प्रोटीन सेवन में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे कुपोषण कम करने में मदद मिली है।
- नामांकन और उपस्थिति में वृद्धि: मुफ्त भोजन की उपलब्धता से स्कूल नामांकन, नियमित उपस्थिति और स्थायित्व में वृद्धि हुई है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
- ड्रॉपआउट दर में कमी: इसने विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और लड़कियों के बीच स्कूल छोड़ने की दर को कम करने में योगदान दिया है।
- शिक्षण परिणामों में सुधार: बेहतर पोषण के कारण एकाग्रता, संज्ञानात्मक विकास और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार हुआ है।
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सिटी गैस वितरण
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केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से सिटी गैस वितरण (CGD) पाइपलाइन परियोजनाओं की स्वीकृतियों को तेज करने का आग्रह किया है।
सिटी गैस वितरण के बारे में
- परिभाषा: सिटी गैस वितरण (CGD) नेटवर्क पाइपलाइनों की एक प्रणाली है, जो किसी शहर या क्षेत्र में घरेलू, औद्योगिक और परिवहन उपयोग के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करती है।
- आपूर्ति के प्रकार
- पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस): घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए पाइप के माध्यम से गैस की आपूर्ति।
- सीएनजी (संपीडित प्राकृतिक गैस): वाहनों के लिए ईंधन के रूप में उपयोग की जाने वाली गैस।
- उद्देश्य: स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, प्रदूषण कम करना और शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा तक पहुँच में सुधार करना।
- यह पहल पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के उपयोग को बढ़ाने और एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता को कम करने में सहायक है।
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत की एलपीजी के आयात पर भारी निर्भरता (लगभग 60%) आपूर्ति को भू-राजनैतिक तनावों के प्रति संवेदनशील बनाती है, इसलिए PNG की ओर बदलाव आवश्यक है।
- अवसंरचना: इसमें पाइपलाइन, कंप्रेसर, मीटरिंग स्टेशन और सीएनजी भरने वाले स्टेशन शामिल होते हैं, जो मिलकर एक एकीकृत नेटवर्क बनाते हैं।
- नियामक प्राधिकरण: भारत में इसे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (PNGRB) द्वारा विनियमित किया जाता है।
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सेज्जिल मिसाइल (Sejjil Missile)
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ईरान ने पहली बार सक्रिय युद्ध में सेज्जिल (Sejjil) बैलिस्टिक मिसाइल को आधिकारिक रूप से अमेरिका और इजरायल के ठिकानों के विरुद्ध तैनात किया।
सेज्जिल मिसाइल क्या है?
- सेज्जिल (जिसे सज्जिल या अशुरा भी कहा जाता है) एक स्वदेशी, दो-चरणीय, मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है, जिसे ईरान द्वारा विकसित किया गया है।
- यह पुरानी द्रव-ईंधन आधारित मिसाइलों से आगे बढ़कर अधिक विश्वसनीय ठोस-ईंधन प्रणाली की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण तकनीकी प्रगति को दर्शाती है।
- इसका विकास ईरान के एयरोस्पेस उद्योगों द्वारा किया गया है।
- इसे “डांसिंग मिसाइल” भी कहा जाता है, क्योंकि यह ऊँचाई पर मार्ग बदलने में सक्षम होती है, जिससे इसे रोकना कठिन हो जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
- ठोस ईंधन प्रणोदन: इसे लंबे समय तक पूर्ण रूप से ईंधन भरी स्थिति में रखा जा सकता है, जिससे लगभग तुरंत प्रक्षेपण संभव होता है।
- दो-चरणीय संरचना: यह दो ठोस-ईंधन मोटरों का उपयोग कर अधिक ऊँचाई और गति प्राप्त करती है।
- विस्तृत मारक क्षमता: इसकी परिचालन मारक दूरी लगभग 2,000 किमी. है, जिससे लेवांत क्षेत्र तक लक्ष्य साधा जा सकता है।
- उच्च पेलोड क्षमता: यह लगभग 700 किलोग्राम वजन वाले वारहेड को वहन करने में सक्षम है।
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