ईरान और परमाणु अप्रसार संधि (NPT)
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ईरान वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों के बीच परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने पर विचार कर रहा है।
संबंधित तथ्य
- संसदीय समीक्षा: ईरान की संसद में NPT से बाहर निकलने पर चर्चा हो रही है, जो बढ़ती घरेलू और रणनीतिक चिंताओं को दर्शाती है।
- ईरान का दृष्टिकोण: ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार विकसित करने से इनकार करता है।
- मुख्य तर्क: ईरान का आरोप है कि NPT का सदस्य होने के बावजूद उसे अपने अधिकार (शांतिपूर्ण संवर्द्धन) से वंचित किया जा रहा है और उसकी परमाणु स्थापनाओं पर हमले हो रहे हैं।
- प्रेरक कारण: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों ने संधि में बने रहने को लेकर बहस को तीव्र कर दिया है।
- चिंता: संभावित बाहर निकलने से परमाणु तनाव बढ़ सकता है और वैश्विक अप्रसार व्यवस्था कमजोर हो सकती है।
परमाणु अप्रसार संधि (NPT)
- यह एक वैश्विक समझौता है, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है।
- अंगीकरण: इसे वर्ष 1968 में अपनाया गया और वर्ष 1970 में लागू किया गया, जो परमाणु हथियार नियंत्रण की आधारशिला है।
- तीन स्तंभ: यह संधि अप्रसार, निरस्त्रीकरण और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर आधारित है।
- सदस्यता: इसमें 191 सदस्य देश हैं, जिससे यह सबसे व्यापक रूप से स्वीकार की गई अंतरराष्ट्रीय संधियों में से एक है।
- परमाणु हथियार संपन्न देश: यह पाँच देशों को मान्यता देती है- संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, चीन, फ्राँस और यूनाइटेड किंगडम।
- निगरानी तंत्र: अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी द्वारा निरीक्षण और निगरानी के माध्यम से अनुपालन सुनिश्चित किया जाता है।
- सीमाएँ: भारत, पाकिस्तान और इजरायल जैसे कुछ देश इसके सदस्य नहीं हैं और असमान दायित्वों तथा प्रवर्तन को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।
व्यापक परमाणु-परीक्षण प्रतिबंध संधि
- उद्देश्य: सभी प्रकार के परमाणु विस्फोटों (नागरिक और सैन्य) पर प्रतिबंध लगाकर परमाणु हथियारों के विकास और प्रसार को रोकना।
- अंगीकरण एवं स्थिति: इसे वर्ष 1996 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया, किंतु यह अभी तक प्रभाव में नहीं आया है।
- प्रवर्तन की शर्त: इसके लागू होने के लिए 44 विशिष्ट परमाणु-सक्षम देशों (परिशिष्ट-2 देश) द्वारा अनुमोदन आवश्यक है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया, ईरान, इजरायल और मिस्र जैसे प्रमुख देशों ने अभी तक इसे अनुमोदित नहीं किया है, जिससे इसका प्रवर्तन बाधित है।
परमाणु हथियार निषेध संधि
- उद्देश्य: परमाणु हथियारों पर व्यापक कानूनी प्रतिबंध स्थापित कर उनके पूर्ण उन्मूलन की दिशा में कार्य करना।
- अंगीकरण एवं प्रवर्तन: इसे वर्ष 2017 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाया गया और वर्ष 2021 में यह प्रभाव में आया।
- प्रतिबंध का दायरा: यह परमाणु हथियारों के विकास, परीक्षण, उत्पादन, स्वामित्व, उपयोग और उपयोग की धमकी—सभी पर प्रतिबंध लगाता है।
- भारत ने इस संधि पर न तो हस्ताक्षर किए हैं और न ही इसका अनुमोदन किया है।
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विश्व बौद्ध शांति सम्मेलन, 2026
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विश्व बौद्ध शांति सम्मेलन, 2026 का आयोजन हैदराबाद में शांति, संवाद और नैतिक नेतृत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया।
विश्व बौद्ध शांति सम्मेलन, 2026 के बारे में
- यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मार्च 2026 में हैदराबाद के बेगमपेट में आयोजित किया गया।
- आयोजक: तेलंगाना पर्यटन विकास निगम की इकाई बुद्धवनम् द्वारा, वियतनाम बौद्ध संघ के सहयोग से इसका आयोजन किया गया।
- उद्देश्य: बुद्धवनम् को एक बौद्ध विरासत थीम पार्क के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना।
- भागीदारी: इस सम्मेलन में 20 से अधिक देशों के मंत्री, भिक्षु, विद्वान और प्रतिनिधि शामिल हुए।
- विषय एवं फोकस: इस सम्मेलन का केंद्र बिंदु संघर्ष समाधान, सामंजस्य और उपचार के लिए बौद्ध दृष्टिकोण रहा है।
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अर्थ ऑवर के 20 वर्ष
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WWF इंडिया और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने “पृथ्वी के लिए एक घंटा दें” के राष्ट्रव्यापी आह्वान के साथ अर्थ ऑवर के 20 वर्ष पूरे होने पर जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया।
अर्थ ऑवर के बारे में
- अर्थ ऑवर विश्व का सबसे बड़ा जन-आधारित पर्यावरणीय आंदोलन है, जिसका आयोजन प्रतिवर्ष विश्व प्रकृति कोष द्वारा किया जाता है।
- यह व्यक्तियों, समुदायों और व्यवसायों को एक घंटे के लिए अनावश्यक विद्युत प्रकाश बंद करने के लिए प्रेरित करता है, जो पृथ्वी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
- इतिहास: इसकी शुरुआत वर्ष 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में प्रतीकात्मक बत्तियाँ बंद करने के कार्यक्रम के रूप में हुई थी। तब से यह 190 से अधिक देशों में फैल चुका है।
- वर्ष 2026 की उपलब्धि: यह वर्ष इस आंदोलन की 20वीं वर्षगाँठ को चिह्नित करता है।
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IONS समुद्री अभ्यास (IMEX) TTX 2026
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हाल ही में भारतीय नौसेना ने कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसैनिक कमान के समुद्री युद्ध केंद्र में IONS समुद्री अभ्यास (IMEX) TTX 2026 की मेजबानी की।
संबंधित तथ्य
- यह अभ्यास इसलिए विशेष महत्त्व रखता है, क्योंकि भारत ने वर्ष 2026–2028 अवधि के लिए हिंद महासागर नौसैनिक संगोष्ठी (IONS) की अध्यक्षता सँँभाली है।
- यह पिछले सोलह वर्षों में पहली बार है, जब भारत ने यह जिम्मेदारी ग्रहण की है, जो क्षेत्रीय समुद्री सहयोग में उसकी नेतृत्वकारी भूमिका को पुनः स्थापित करता है।
अभ्यास के बारे में
- यह एक टेबलटॉप अभ्यास (TTX) है, जिसे आभासी वातावरण में आयोजित किया जाता है, जिससे वास्तविक जहाजों की तैनाती के बिना जटिल परिस्थितियों की योजना बनाई जा सकती है।
- स्थान: समुद्री युद्ध केंद्र, दक्षिणी नौसैनिक कमान, कोच्चि, भारत।
- मुख्य उद्देश्य: सदस्य नौसेनाओं के बीच साझा संचालन समझ को सुदृढ़ करना।
- सूचना साझाकरण और निर्णय-निर्माण सहित समन्वय तंत्र को परिष्कृत करना।
- मौजूदा समुद्री सुरक्षा दिशा-निर्देशों का परीक्षण करना।
- प्रतिभागी देश: बांग्लादेश, फ्राँस, इंडोनेशिया, केन्या, मालदीव, मॉरीशस, म्याँमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, तंजानिया और तिमोर-लेस्ते।
इस आयोजन में व्यापक बहुराष्ट्रीय भागीदारी देखने को मिली, जो ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) पहल के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। |