संक्षेप में समाचार

16 Feb 2026

रेनिसफ्यारा बीच (Reynisfjara Beach)

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आइसलैंड के रेनिसफ्यारा बीच पर वर्ष 2025–2026 की सर्दियों के दौरान गंभीर तटीय कटाव के कारण तीव्र परिवर्तन हुए हैं।

रेनिसफ्यारा बीच के बारे में

  • अवस्थिति: आइसलैंड के दक्षिणी तट पर, माउंट रेनिसफ्याल की निम्न भूमि पर, उत्तरी अटलांटिक महासागर की ओर स्थित।
  • उत्पत्ति
    • काला ज्वालामुखीय रेत: अपरदित बेसाल्टिक लावा से निर्मित, जो इसे इसका विशिष्ट काला रंग प्रदान करता है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • ‘रेनिसड्रैंगर’ समुद्री स्तंभ: यहाँ प्रसिद्ध अपतटीय बेसाल्ट स्तंभ पाए जाते हैं, जिन्हें रेनिसड्रैंगर के नाम से जाना जाता है।
    • बेसाल्ट स्तंभ और गुफाएँ: ज्वालामुखीय गतिविधियों और तरंग आधारित अपरदन से बनी षट्भुजाकार बेसाल्ट संरचनाएँ और गुफाएँ।
    • पर्यटन: आइसलैंड के सबसे अधिक देखे जाने वाले प्राकृतिक आकर्षणों में से एक; फोटोग्राफी और भू-विज्ञान के लिए लोकप्रिय।
    • कटला यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क का हिस्सा: ज्वालामुखीय गतिविधियों से जुड़ी भू-वैज्ञानिक महत्ता के लिए मान्यता प्राप्त।
  • हालिया गंभीर कटाव (2025–26): पूर्वी पवनों और ऊँची लहरों के कारण तटरेखा में तीव्र संकुचन और भूस्खलन हुआ।
  • सुरक्षा जोखिम: खतरनाक “स्नीकर वेव्स” के लिए जाना जाता है, जो आगंतुकों को अचानक समुद्र में बहा सकती हैं।

माउंट रेनिसफ्याल

  • रेनिसफ्याल आइसलैंड के दक्षिणी तट पर स्थित एक ज्वालामुखीय पर्वत है।
  • ऊँचाई: रेनिसफ्याल समुद्र तल से 340 मीटर (1,115 फीट) ऊँचा है।
  • भू-वैज्ञानिक संरचना: यह पर्वत ज्वालामुखीय चट्टानों और बेसाल्ट द्वारा निर्मित है, जो ज्वालामुखीय विस्फोटों के दौरान निर्मित हुए।

इंडो-पैकोम (INDO-PACOM)

अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड (इंडो-पैकोम) के प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर की सराहना की और बदलती इंडो-पैसिफिक सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत–अमेरिका रक्षा सहयोग को और गहरा करने का आह्वान किया।

 इंडो-पैकोम के बारे में

  • संयुक्त राज्य अमेरिका का इंडो-पैसिफिक कमांड (इंडो-पैकोम) अमेरिका का एकीकृत कमांड है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य अभियानों के लिए जिम्मेदार है और विशाल समुद्री व रणनीतिक क्षेत्रों को शामिल करता है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका का इंडो-पैसिफिक कमांड (इंडो पैकोम), जिसे मूल रूप से यू.एस. पैसिफिक कमांड (पैकोम) के रूप में स्थापित किया गया था, 1 जनवरी, 1947 को स्थापित हुआ था।
  • प्रतिभागी: इंडो-पैकोम भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और आसियान देशों सहित क्षेत्रीय सहयोगियों और भागीदारों के साथ निकटता से कार्य करता है।
    • भारत–अमेरिका रक्षा सहयोग टाइगर ट्रायंफ, मालाबार, कोप इंडिया और रिमपैक जैसे संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से विस्तारित हुआ है, साथ ही अपाचे हेलीकॉप्टरों और समुद्री प्लेटफॉर्म जैसे रक्षा अधिग्रहण भी किए गए हैं।
  • फोकस क्षेत्र: यह कमांड प्रतिरोधक क्षमता, समुद्री सुरक्षा और स्वतंत्र एवं मुक्त इंडो-पैसिफिक को बनाए रखने पर बल देता है।
    • मुख्य क्षेत्रों में समुद्री क्षेत्र जागरूकता, पनडुब्बी निगरानी, अंतरिक्ष और प्रतिअंतरिक्ष संचालन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और एकीकृत मार्ग आधारित प्रहार क्षमताएँ शामिल हैं।

महत्त्व

‘इंडो-पैकोम’ विशेष रूप से चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति के मध्य इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा को संतुलित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

AI इंपैक्ट समिट 2026

भारत ने नई दिल्ली में चौथे AI इंपैक्ट समिट 2026 की मेजबानी की, जो ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला इस प्रकार का पहला वैश्विक AI सम्मेलन है।

AI समिट के बारे में

  • AI इंपैक्ट समिट एक बहुपक्षीय मंच है, जो सरकारों, वैश्विक प्रौद्योगिकी नेताओं, उद्योग और नागरिक समाज को एक साथ लाकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी क्षमता और उसके शासन से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श करता है।
  • AI समिट की शुरुआत
    • नवंबर 2023 में यूनाइटेड किंगडम के ब्लेचली पार्क में आयोजित AI सेफ्टी समिट में AI सुरक्षा जोखिमों की पहचान पर केंद्रित ऐतिहासिक ब्लेचली घोषणा को अपनाया गया।
      • भारत 28 मूल हस्ताक्षरकर्ता देशों और यूरोपीय संघ में से एक था।
    • मई 2024 में सियोल समिट ने सुरक्षा के साथ-साथ नवाचार और समावेशन को भी चर्चा में शामिल किया।
    • फरवरी 2025 में पेरिस AI एक्शन समिट ने व्यावहारिक कार्यान्वयन और आर्थिक अवसरों पर बल दिया।
  • AI इंपैक्ट समिट 2026: वर्ष 2026 संस्करण 16–20 फरवरी तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
    • यह AI समिट शृंखला का चौथा सम्मेलन है।
  • AI इंपैक्ट समिट, 2026 के तीन मुख्य लक्ष्य
    • लोगों को सशक्त बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए AI का उपयोग।
    • पूरी दुनिया के लिए AI सेवा प्रदाता के रूप में भारत को प्रस्तुत करना, और
    • कंप्यूट, डेटासेट और एल्गोरिदम तक पहुँच का लोकतंत्रीकरण करना।
  • समिट का उद्देश्य है
    • आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए AI की क्षमता को खोलना।
    • समावेशी और जिम्मेदार AI परिनियोजन को बढ़ावा देना।
    • AI सुरक्षा मानकों और शासन ढाँचों पर वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करना।
    • स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी शासन जैसी सार्वजनिक सेवाओं में AI अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना।
  • थीम: सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय (सभी का कल्याण, सभी का सुख)
  • सूत्र: भारत के तीन सूत्र — पीपुल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस — पर केंद्रित।
    • समिट विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए समान पहुँच, सतत् विकास और नवाचार-प्रेरित वृद्धि पर बल देता है।
  • पूर्व समिट: यह समिट AI शासन पर विकसित होती अंतरराष्ट्रीय चर्चा का नवीनतम अध्याय है।
    • पूर्ववर्ती AI समिट यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण कोरिया और पेरिस, फ्राँस में आयोजित किए गए थे, जो AI सुरक्षा, नैतिकता और नियामक सहयोग पर केंद्रित थे।

केरल विजन 2031

केरल ने तीन दिवसीय ‘विजन 2031: इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डेवलपमेंट एंड डेमोक्रेसी’ का उद्घाटन किया।

  • केरल की मानव विकास उपलब्धियाँ आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन के एक नए चरण की नींव हैं, न कि अंतिम लक्ष्य।
  • यह विजन वर्ष 2031 में केरल के 75वें वर्ष की तैयारी का उद्देश्य रखता है।

मुख्य विजन

  • ज्ञान-आधारित उत्पादक अर्थव्यवस्था: प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और कुशल मानव संसाधन का उपयोग कर उच्च-मूल्य, नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण।
  • समावेशी और न्यायसंगत समाज: विकास को सामाजिक न्याय के साथ जोड़ना, समानता, कल्याण संरक्षण और सहभागी लोकतंत्र सुनिश्चित करना।
  • जलवायु सहनशीलता और स्थिरता: पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु अनुकूलन पर बल, चरम मौसमी घटनाओं के प्रति केरल की संवेदनशीलता को मान्यता देना।
  • लोकतांत्रिक और परामर्शात्मक शासन: विचार-विमर्श आधारित लोकतंत्र, विकेंद्रीकृत योजना और नीति निर्माण में नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देना।

विजन के समक्ष चुनौतियाँ

  • मानव विकास के केरल मॉडल को वैश्विक रूप से संदर्भित ढाँचे के रूप में सुदृढ़ करते हुए राजकोषीय सीमाएँ और उधारी संबंधी प्रतिबंध।

महत्त्व

विजन 2031 आधुनिकीकरण और मानवीय मूल्यों के बीच, तथा प्रौद्योगिकी और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन स्थापित करने का एक रोडमैप प्रस्तुत करता है।

माघ मेला 2026

प्रयागराज में महाशिवरात्रि के अवसर पर संगम पर 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया, जिससे माघ मेला 2026 का समापन हुआ।

माघ मेले के बारे में

  • परिचय: माघ मेला एक वार्षिक हिंदू धार्मिक समागम है, जो प्रयागराज में पवित्र त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों का संगम) पर हिंदू माह माघ (जनवरी–फरवरी) के दौरान आयोजित होता है।
  • आवृत्ति: यह प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाली 45 दिनों की वार्षिक तीर्थयात्रा है।
    • यह प्रत्येक चार वर्ष में कुंभ मेला बन जाता है।
    • यह प्रत्येक बारह वर्ष में महाकुंभ मेला बन जाता है।
  • माघ मेला 2026 समारोह: वर्ष 2026 के मेले में भारी भागीदारी देखी गई, जिसमें पूरे उत्सव के दौरान 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया और समापन दिवस पर, जो महाशिवरात्रि के साथ संयोगित था, 40 लाख लोगों ने पवित्र स्नान किया।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: माघ मेला आध्यात्मिक शुद्धि, तपस्या और सनातन परंपराओं में आस्था का प्रतीक है। संगम में स्नान को पापों की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का माध्यम माना जाता है।

माघ मेला भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत, तीर्थ अर्थव्यवस्था और बड़े पैमाने पर भीड़ प्रबंधन क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करता है और प्रायः बड़े कुंभ मेला आयोजनों का पूर्वाभ्यास होता है।

LHS 1903 प्रणाली

वैज्ञानिकों ने ESA के चीओप्स उपग्रह का उपयोग करते हुए LHS 1903 के चारों ओर एक असामान्य ग्रह व्यवस्था की खोज की, जो पारंपरिक ग्रह-निर्माण सिद्धांतों को चुनौती देती है।

LHS 1903 प्रणाली के बारे में

  • LHS 1903 एक दूरस्थ ग्रह प्रणाली है, जो एक ठंडे M-ड्वार्फ (रेड ड्वार्फ) तारे की परिक्रमा करती है। इसका अध्ययन यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के चीओप्स (CHaracterising ExOPlanet Satellite) द्वारा किया गया, जिसे ज्ञात एक्सोप्लैनेट्स का विश्लेषण करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • असामान्य ग्रह व्यवस्था: पारंपरिक ग्रह मॉडल सुझाव देते हैं कि चट्टानी ग्रह तारों के निकट निर्मित होते हैं, जबकि गैस-समृद्ध ग्रह दूर निर्मित होते हैं।
    • हालाँकि, LHS 1903 में “इनसाइड-आउट” संरचना पाई गई है:
      • चट्टानी – गैसीय – गैसीय – चट्टानी।
    • सबसे बाहरी ग्रह, अपने तारे से दूर होने के बावजूद, चट्टानी प्रतीत होता है, जो स्थापित निर्माण पैटर्न के विपरीत है।
  • संभावित व्याख्या: वैज्ञानिकों ने टकराव के कारण वायुमंडलीय क्षरण और ग्रह के प्रवासन को खारिज कर दिया।
    • इसके बजाय, उन्होंने क्रमिक या “इनसाइड-आउट” निर्माण मॉडल का प्रस्ताव दिया।
    • जब सबसे बाहरी ग्रह बना, तब तक प्रोटोप्लैनेटरी गैस संभवतः समाप्त हो चुकी थी, जिससे केवल ठोस पदार्थ शेष रह गया और चट्टानी पिंड बना।
  • वैज्ञानिक महत्त्व: यह खोज लंबे समय से चले आ रहे ग्रह निर्माण सिद्धांतों को चुनौती देती है और सौर मंडल संरचनाओं में अधिक विविधता का संकेत देती है।
    • यह प्रश्न उठाती है कि क्या हमारे सौर मंडल की संरचना सामान्य है या अनेक संभावित ब्रह्मांडीय विन्यासों में से केवल एक है।

संगतम् समुदाय

नागालैंड के संगतम् समुदाय की शीर्ष संस्था ने अपने क्षेत्राधिकार में दुनिया के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले जंगली स्तनपायी, पैंगोलिन, की रक्षा के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है।

संगतम् समुदाय के बारे में

  • संगतम् नागालैंड की 16 प्रमुख मान्यता प्राप्त नागा जनजातियों में से एक हैं।
  • स्थान: वे मुख्यतः पूर्वी नागालैंड के किफिरे और तुएनसांग जिलों में निवास करते हैं।
    • यह क्षेत्र इंडो–म्याँमार जैव-विविधता हॉटस्पॉट का हिस्सा है, जिससे यह पारिस्थितिकी रूप से महत्त्वपूर्ण और वन्यजीवों के शोषण के प्रति संवेदनशील है।
  • भाषा: वे संगतम् भाषा बोलते हैं, जो तिब्बतो-बर्मन परिवार की साइनो-तिब्बती भाषा है।
  • समाज: संगतम् समाज समतावादी है, जहाँ गाँव कुलों और अंतर-विवाहित परिवारों के इर्द-गिर्द संगठित हैं, जो रिश्तेदारी और पारस्परिक सहयोग पर बल देते हैं।
    • वे वंश और उत्तराधिकार की पितृसत्तात्मक प्रणाली का भी पालन करते हैं।
  • शासन: शासन ग्राम परिषदों और यूनाइटेड संगतम् लिखुम पुमजी (USLP) जैसी शीर्ष संस्थाओं के माध्यम से होता है, जो विवाद, संरक्षण और सामुदायिक निर्णयों को संभालती हैं।
  • अर्थव्यवस्था: पारंपरिक अर्थव्यवस्था झूम खेती (स्थानांतरण कृषि) पर आधारित थी, जिसमें चावल, बाजरा और सब्जियाँ उगाई जाती थीं। शिकार और संग्रह कृषि के पूरक थे।

पैंगोलिन के बारे में

  • पैंगोलिन, जिन्हें ‘स्केली एंटईटर’ भी कहा जाता है, ‘फोलिडोटा’ गण के विशिष्ट रात्रिचर स्तनधारी हैं।
  • वे विश्व के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले जंगली स्तनपायी हैं और अवैध व्यापार व आवास हानि से गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। सभी आठ मान्यता प्राप्त प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे में हैं।
  • प्रजातियाँ और वितरण: पैंगोलिन की आठ प्रजातियाँ हैं:
    • एशियन स्पीशीज (4): इंडियन पैंगोलिन (मैनिस क्रैसिकॉडेटा), चाइनीज पैंगोलिन (मैनिस पेंटाडैक्टिला), सुंडा पैंगोलिन (मैनिस जावानिका), फिलिपीन पैंगोलिन (मैनिस क्यूलियोनेंसिस)।
    • अफ्रीकन स्पीशीज (4): जाइंट ग्राउंड पैंगोलिन (स्मट्सिया जिगैन्टिया), टेमिन्क्स ग्राउंड पैंगोलिन (स्मट्सिया टेमिन्किआई), व्हाइट-बेलीड पैंगोलिन (फैटाजिनस ट्राइकस्पिस), ब्लैक-बेलीड पैंगोलिन (फैटाजिनस टेट्राडैक्टिला)।
  • आवास: वन, सवाना, घासभूमियाँ; कुछ वृक्षवासी (पेड़ों पर चढ़ने वाले), जबकि अन्य भूमिगत बिलों में रहने वाले होते हैं।
  • आहार: पूर्णतः कीटभक्षी। मुख्यतः चींटियाँ और दीमक खाते हैं; भोजन खोजने के लिए सूँघने की क्षमता और जीभ का उपयोग करते हैं। वे कीट आबादी को नियंत्रित करने में महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिकी भूमिका निभाते हैं।
  • संरक्षण स्थिति: IUCN रेड लिस्ट के अनुसार, सभी आठ प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं।
    • भारतीय पैंगोलिन (Indian pangolin) IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध है।
    • चीनी पैंगोलिन (Chinese pangolin) को गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
    • दोनों भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के अंतर्गत संरक्षित हैं।
    • सभी 8 प्रजातियाँ CITES परिशिष्ट I (Appendix I) में सूचीबद्ध हैं।

ब्रह्मपुत्र रोड-कम-रेल टनल परियोजना

केंद्र सरकार ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे भारत की पहली अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड-कम-रेल टनल; को मंजूरी दी है।

ब्रह्मपुत्र रोड-कम-रेल टनल परियोजना के बारे में

  • रोड-कम-रेल टनल परियोजना में 33.7 किमी. लंबे चार-लेन एक्सेस-नियंत्रित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण शामिल है, जिसमें ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 15.79 किमी. लंबी ट्विन ट्यूब अंडरवाटर टनल शामिल है।
  • स्थान: यह असम में गोहपुर (NH-15) और नुमालीगढ़ (NH-715) को जोड़ेगी।
    • यह दूरी को 240 किमी. से घटाकर 34 किमी. कर देगा और यात्रा समय को छह घंटे से घटाकर 20 मिनट कर देगा।
  • लागत और क्रियान्वयन: इस परियोजना को ₹18,662 करोड़ की लागत से इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड में विकसित किया जाएगा।
  • महत्त्व: यह परियोजना क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देगी, रणनीतिक अवसंरचना को मजबूत करेगी, रोजगार सृजन करेगी और पूर्वोत्तर भारत में सामाजिक-आर्थिक विकास को तीव्र करेगी।
    • यह भारत की पहली अंडरवाटर रोड-कम-रेल टनल होगी और वैश्विक स्तर पर इस प्रकार की दूसरी परियोजना होगी।

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) के बारे में 

  • आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति केंद्र सरकार की एक प्रमुख निर्णय-निर्माण संस्था है, जो आर्थिक नीतियों और प्रमुख आधारभूत संरचना अनुमोदनों की निगरानी करती है।
  • संरचना: इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं और इसमें वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री शामिल होते हैं।
    • गृह मामले (अमित शाह), वित्त (निर्मला सीतारमण), रक्षा (राजनाथ सिंह), सड़क परिवहन, कृषि, विदेश मामले, वाणिज्य और शिक्षा।
  • भूमिका और कार्य: यह समिति प्रमुख निवेश प्रस्तावों, आधारभूत संरचना परियोजनाओं, मूल्य निर्धारण नीतियों तथा आर्थिक विकास एवं सार्वजनिक व्यय से संबंधित मामलों को स्वीकृति प्रदान करती है।

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