संक्षिप्त समाचार

4 Apr 2026

भारत–अजरबैजान: कूटनीतिक संबंधों का पुनर्स्थापन

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भारत और अजरबैजान ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद उत्पन्न तनाव के एक वर्ष पश्चात् संबंधों को पुनर्स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है।

भारत–अजरबैजान संबंधों के बारे में

  • पृष्ठभूमि: वर्ष 1992 से दोनों देशों के बीच सामान्यतः सौहार्दपूर्ण राजनयिक संबंध रहे हैं।
  • तनाव के कारण: संबंधों में तनाव अजरबैजान के पाकिस्तान समर्थन और भारत के आर्मेनिया के साथ संबंधों के कारण उत्पन्न हुआ।
    • नागोर्नो-काराबाख संघर्ष और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी मतभेद रहे।
    • अजरबैजान ने भारत पर शंघाई सहयोग संगठन में उसकी सदस्यता को बाधित करने का आरोप भी लगाया।
  • संवाद पर सहमति: दोनों देशों ने अजरबैजान के  बाकू में बैठक कर मतभेदों को संवाद के माध्यम से सुलझाने और निरंतर संपर्क बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।
    • अगला दौर भारत में आयोजित होगा।
  • सहयोग के क्षेत्र: व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, औषधि, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
  • आतंकवाद-रोधी सहयोग: दोनों पक्षों ने “सीमा-पार आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई” पर बल दिया, जो तनाव में कमी का संकेत है।
  • ऊर्जा सहयोग: अजरबैजान भारत के लिए कच्चे तेल का एक महत्त्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है, साथ ही ओएनजीसी विदेश द्वारा वहाँ निवेश भी किया गया है।
  • मानवीय सहयोग: वर्ष 2025 के संकट के दौरान अजरबैजान ने ईरान से 200 से अधिक भारतीयों की निकासी में सहायता की।
  • रणनीतिक महत्त्व: दोनों देश अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे के अंतर्गत सहयोग करते हैं, जिससे यूरेशिया में संपर्क और व्यापार दक्षता बढ़ती है।

अजरबैजान के बारे में

  • स्थान: अजरबैजान दक्षिण कॉकस क्षेत्र में स्थित है, जो यूरोप और एशिया के बीच रूस, जॉर्जिया, आर्मेनिया, ईरान और कैस्पियन सागर से घिरा है।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह यूरेशियाई ऊर्जा गलियारों और कैस्पियन सागर की भू-राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • विदेश नीति संबंध: इसके तुर्की और पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ संबंध हैं, जबकि नागोर्नो-काराबाख मुद्दे को लेकर आर्मेनिया के साथ तनाव बना रहता है।

इंडोनेशिया में भूकंप

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हाल ही में पूर्वी इंडोनेशिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे जनहानि, अवसंरचना को नुकसान हुआ और थोड़े समय के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गई, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

इंडोनेशिया में भूकंप के बारे में

  • इंडोनेशिया भूकंप-प्रवण क्षेत्र में स्थित होने के कारण अक्सर भूकंप का अनुभव करता है।
  • भूकंप केंद्र और विशेषताएँ 
    • भूकंप का केंद्र मोलुक्का सागर में था, जो सुलावेसी और मालुकु द्वीपों के मध्य स्थित है।
      • यह 35 किमी. की कम गहराई पर आया, जिससे सतह पर इसका प्रभाव अधिक रहा।
    • कई झटके दर्ज किए गए, जिनमें सबसे शक्तिशाली की तीव्रता 5.5 थी।
  • प्रभाव
    • उत्तरी सुलावेसी के मनाडो में मानवीय और संरचनात्मक क्षति की सूचना मिली।
    • 75 सेमी. तक की सुनामी लहरें दर्ज की गईं, हालाँकि बाद में चेतावनी हटा ली गई।

रिंग ऑफ फायर के बारे में

  • प्रशांत रिंग ऑफ फायर एक प्रमुख विवर्तनिक पट्टी है, जो बार-बार भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोटों के लिए जानी जाती है।
  • स्थान
    • यह प्रशांत महासागर के चारों ओर एक चाप के रूप में फैली है, जो जापान से दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए इंडोनेशिया और अमेरिका तक विस्तृत है।
    • इसमें इंडोनेशिया, फिलीपींस, जापान और अमेरिका के पश्चिमी तट शामिल हैं।
  • उच्च भूकंपीय सक्रियता का कारण
    • यह अभिसारी प्लेट सीमाओं के कारण होता है, जहाँ विवर्तनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं और एक प्लेट दूसरी के नीचे धँसती है।
      • इससे ऊर्जा का उत्सर्जन भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट के रूप में होता है।
    • इंडोनेशिया इंडो-ऑस्ट्रेलियाई, यूरेशियन और प्रशांत प्लेटों के अभिसरण पर स्थित है, जिससे यह अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र बन जाता है।

छत्रपति शिवाजी महाराज

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भारत छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि मना रहा है, जिसमें स्वराज, शासन और सैन्य रणनीति में उनके योगदान को याद किया जाता है।

  • उनका निधन 3 अप्रैल, 1680 को रायगढ़ में तीन सप्ताह के बुखार के बाद हुआ।

छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में

  • छत्रपति शिवाजी महाराज (1630–1680) मराठा साम्राज्य के संस्थापक और एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने सैन्य और प्रशासनिक उत्कृष्टता के माध्यम से हिंदवी स्वराज की स्थापना की।
  • प्रारंभिक जीवन (जन्म से आरंभिक काल)
    • जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि (1630): उनका जन्म 1630 ईसवी में शिवनेरी किले में शाहाजी भोसले और जीजाबाई के यहाँ हुआ, जिन्होंने उनके सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित किया।
    • पालन-पोषण और प्रशिक्षण: माता जीजाबाई ने उनमें साहस और धर्म के मूल्य स्थापित किए, जबकि दादोजी कोंडदेव ने उन्हें प्रशासन, युद्धकला और राजस्व व्यवस्था का प्रशिक्षण दिया।
    • शक्ति का प्रारंभिक प्रदर्शन (1646): 16 वर्ष की आयु में उन्होंने तोरण के किले पर अधिकार किया, जो बीजापुर सल्तनत के विरुद्ध उनके विस्तार की शुरुआत थी।
  • प्रमुख उपलब्धियाँ
    • स्वराज की स्थापना (1674): रायगढ़ किले में उनका छत्रपति के रूप में राज्याभिषेक हुआ (1674), जिससे औपचारिक रूप से एक स्वतंत्र मराठा साम्राज्य की स्थापना हुई।
    • गुरिल्ला युद्ध नीति: उन्होंने गनिमी कावा’ नामक गुरिल्ला युद्ध पद्धति विकसित की।
    • नौसैनिक शक्ति का विकास: उन्हें भारतीय नौसेना का जनक माना जाता है; उन्होंने तटीय किलों और सशक्त नौसेना का निर्माण कर कोंकण व्यापार मार्गों की सुरक्षा की।
    • प्रशासनिक सुधार: उन्होंने अष्टप्रधान परिषद की स्थापना की, राजस्व सुधार किए तथा न्याय और लोककल्याण पर बल दिया।
    • सैन्य सफलताएँ (1659–1672): प्रतापगढ़ का युद्ध (1659) और साल्हेर का युद्ध (1672) जैसी विजय ने मराठा शक्ति को सुदृढ़ किया।
  • विरासत
    • राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक: वे साहस, सुशासन और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक हैं।
    • समावेशी शासन: उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया और प्रशासन व सेना में विविध समुदायों को शामिल किया।
    • रणनीतिक दृष्टि: नौसेना, किलों और विकेंद्रीकृत प्रशासन पर उनका जोर भविष्य की भारतीय सैन्य और प्रशासनिक परंपराओं को प्रभावित करता है।

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