संदर्भ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक और ‘नोवल ओरल पोलियो वैक्सीन टाइप-2’ (nOPV2) की प्री-क्वालिफिकेशन (पूर्व-योग्यता) की घोषणा की है।
संबंधित तथ्य
- यह प्री-क्वालिफिकेशन, दवा के घटक और अंतिम वैक्सीन उत्पाद दोनों को शामिल करता है, जिससे एक ही एकीकृत इकाई में संपूर्ण उत्पादन संभव हो पाता है।
- यह विकास बहुपक्षीय सहयोग (WHO, फार्मास्युटिकल भागीदार, ग्लोबल पोलियो इरैडिकेशन इनिशिएटिव) का उदाहरण है, जिसका उद्देश्य एक निर्धारित SDG लक्ष्य — पोलियो उन्मूलन को प्राप्त करना है।
प्री-क्वालिफिकेशन (Prequalification) के बारे में
प्री-क्वालिफिकेशन का अर्थ है कि वैक्सीन सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता के अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करती है। इससे संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियाँ, जैसे UNICEF, इसे वैश्विक स्तर पर खरीद और वितरित कर सकती हैं।
प्री-क्वालिफिकेशन का महत्त्व
प्री-क्वालिफिकेशन का महत्त्व (UN/WHO संदर्भ में)
- संयुक्त राष्ट्र की खरीद एजेंसियों (जैसे- यूनिसेफ, पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन) को वैक्सीन वैश्विक स्तर पर खरीदने और वितरित करने की अनुमति देता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों को प्रकोप के दौरान गुणवत्तापूर्ण वैक्सीन उपलब्ध हो सके।
- आपातकालीन टीकाकरण अभियानों में वैश्विक आपूर्ति विविधता और त्वरित प्रतिक्रिया को बढ़ावा देता है।
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nOPV2 के बारे में
- nOPV2 का अर्थ नोवेल ओरल पोलियो वैक्सीन टाइप 2 है।
- इसे विशेष रूप से सर्कुलेटिंग वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप 2 (cVDPV2) से होने वाले प्रकोपों से निपटने के लिए विकसित किया गया है।
- स्थिरता: पारंपरिक टाइप-2 ओरल पोलियो वैक्सीन की तुलना में nOPV2 आनुवंशिक रूप से अधिक स्थिर है, जिससे इसके रोग-उत्पादक रूप में पुनः परिवर्तित होने का जोखिम काफी कम हो जाता है।
- WHO स्थिति: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा आपातकालीन उपयोग सूचीकरण (EUL) को स्वीकृति।
- निर्माण
- बायोलॉजिकल ई लिमिटेड (भारत) और पीटी बायो फार्मा (इंडोनेशिया) द्वारा निर्मित।
- प्रकार: पोलियो टाइप 2 को लक्षित करने वाला ओरल वैक्सीन
पोलियोमायलाइटिस (पोलियो) के बारे में
- पोलियोमायलाइटिस एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो मुख्य रूप से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करता है।

- संचरण: यह मुख्यतः मल-मुख मार्ग के माध्यम से व्यक्ति-से-व्यक्ति संपर्क द्वारा या कम सामान्यतः दूषित जल या भोजन के माध्यम से फैलता है।
- हालिया शोध से संकेत मिलता है कि श्वसन संचरण एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- गले में पोलियोवायरस का उत्सर्जन श्वसन संचरण के सिद्धांत का समर्थन करता है, जो खसरा और काली खाँसी जैसे अन्य संक्रामक बाल्यकालीन रोगों के समान है।
- प्रभाव: यह वायरस आँतों में वृद्धि करता है और तंत्रिका तंत्र में प्रवेश कर सकता है, जिससे पक्षाघात होता है।
- विश्वभर में वाइल्ड पोलियोवायरस स्ट्रेन की स्थिति
- टाइप 1: वर्ष 2022 तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान में स्थानिक बना हुआ है।
- टाइप 2: वर्ष 1999 में उन्मूलित घोषित किया गया।
- टाइप 3: वर्ष 2020 में उन्मूलित घोषित किया गया।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा भारत को वर्ष 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित किया गया और अंतिम रिपोर्ट किया गया वाइल्ड पोलियो वायरस मामला वर्ष 2011 में था।