PERT: जीनोम एडिटिंग विधि

18 Feb 2026

संदर्भ

हाल ही में नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन ने ‘प्राइम एडिटिंग मीडिएटेड रीडथ्रू ऑफ प्रीमेच्योर टर्मिनेशन कोडॉन्स’ (PERT) नामक एक नई जीनोम-एडिटिंग विधि की जानकारी दी है।

संबंधित तथ्य

  • यह अध्ययन ‘नॉनसेंस म्यूटेशन’ (Nonsense mutations) से उत्पन्न अनेक रोगों के उपचार हेतु एकल, जीन-निरपेक्ष चिकित्सा प्रदान करता है।
  • इसे ब्रॉड संस्थान, हार्वर्ड विश्वविद्यालय तथा मिनेसोटा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किया गया है।

 ‘प्राइम-एडिटिंग-मीडिएटेड रीडथ्रू ऑफ प्रीमेच्योर टर्मिनेशन कोडॉन्स’ (PERT)  के बारे में

  • PERT एक नवीन जीनोम-एडिटिंग रणनीति है, जो प्राइम एडिटिंग का उपयोग करके समय-पूर्व ‘स्टॉप कोडॉनों’ का अवलोकन सक्षम बनाती है, जिससे ‘नॉनसेंस म्यूटेशन’ (Nonsense mutations) से उत्पन्न आनुवंशिक विकारों में पूर्ण-लंबाई वाले कार्यात्मक प्रोटीन के उत्पादन की पुनर्स्थापना होती है।
  • जीनों का पुनःउपयोग तथा pegRNA इसका एक आवश्यक घटक है।
  • PERT की कार्य प्रणाली
    • यह संशोधित CRISPR–Cas प्रणाली का उपयोग रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस के साथ संयोजन में करता है।
    • उत्परिवर्तन को पूर्णतः सुधारने के बजाय, PERT स्टॉप कोडॉन क्षेत्र में संशोधन करता है।
    • यह कोशिकीय तंत्र को समय पूर्व स्टॉप कोडॉन के अवलोकन (रीडथ्रू) में सक्षम बनाता है।
    • परिणामस्वरूप, ट्रांसलेशन जारी रहता है और लगभग सामान्य कार्यात्मक प्रोटीन का उत्पादन होता है।
  • चुनौती: इसकी प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं, विशेषकर वितरण, दीर्घकालिक सुरक्षा तथा विभिन्न ऊतकों में प्रदर्शन के संबंध में।
  • अनुप्रयोग
    • यह सिस्टिक फाइब्रोसिस तथा बीटा थैलेसीमिया जैसी बीमारियों के उपचार में सहायक है।
    • यह पारंपरिक CRISPR एडिटिंग की तुलना में अधिक सटीक और संभावित रूप से अधिक सुरक्षित है।
    • यह समान रणनीति का उपयोग करके ‘नॉनसेंस म्यूटेशन’ (Nonsense Mutations) से उत्पन्न अनेक विकारों का उपचार कर सकता है।
    • यह जीनोम के गैर-लक्षित क्षति के जोखिम को कम करता है।

मुख्य अवधारणाएँ

  • PERT:  ‘प्राइम-एडिटिंग-मीडिएटेड रीडथ्रू ऑफ प्रीमेच्योर टर्मिनेशन कोडॉन्स’।
  • CRISPR-Cas9: क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट्स – CRISPR संबद्ध प्रोटीन 9।
  • जीनों का पुनःउपयोग: इसका अर्थ है किसी मौजूदा जीन को उसके मूल जैविक कार्य से भिन्न एक नए चिकित्सीय कार्य के लिए संशोधित करना।
  • pegRNA: प्राइम एडिटिंग गाइड आरएनए
    • एडिटिड एंजाइम को एक विशिष्ट DNA स्थल तक मार्गदर्शित करता है।
    • सटीक आनुवंशिक सुधार के लिए टेंपलेट प्रदान करता है।
  • NMD: नॉनसेंस-मीडिएटेड डिके
    • एक कोशिकीय तंत्र, जो समय-पूर्व ‘स्टॉप कोडॉन’ वाले दोषपूर्ण mRNA को अपघटित करता है।

‘नॉनसेंस म्यूटेशन’ (Nonsense mutations) के बारे में

  • ‘नॉनसेंस म्यूटेशन’ एक प्रकार का बिंदु आधारित उत्परिवर्तन है, जिसमें एकल न्यूक्लियोटाइड प्रतिस्थापन के कारण अमीनो अम्ल को एडिट करने वाला कोडॉन, स्टॉप कोडॉन (UAA, UAG, UGA) में परिवर्तित हो जाता है, जिससे प्रोटीन संश्लेषण का समय-पूर्व समापन हो जाता है।
  • ‘नॉनसेंस म्यूटेशन’ ज्ञात सभी रोग-कारक आनुवंशिक परिवर्तनों के लगभग एक-चौथाई के लिए उत्तरदायी हैं।
  • कार्यप्रणाली
    • DNA में आधार प्रतिस्थापन के कारण उत्पन्न होता है।
    • परिवर्तित कोडॉन ट्रांसलेशन के दौरान समापन का संकेत देता है।
    • एक अपूर्ण (संक्षिप्त) और सामान्यतः अकार्यात्मक प्रोटीन का निर्माण करता है।
    • नॉनसेंस-मीडिएटेड डिके (NMD) को सक्रिय कर सकता है, जिससे दोषपूर्ण mRNA का अपघटन होता है।

आनुवंशिक विकारों के बारे में

  • आनुवंशिक विकार वे रोग या स्थितियाँ हैं, जो किसी व्यक्ति के जीन या गुणसूत्रों में असामान्यताओं के कारण उत्पन्न होते हैं, जो या तो वंशानुगत हो सकते हैं अथवा स्वतःस्फूर्त उत्परिवर्तनों के कारण उत्पन्न हो सकते हैं।
    • उदाहरण: डाउन सिंड्रोम, टर्नर सिंड्रोम।
  • कारण
    • जीन उत्परिवर्तन (जैसे- बिंदु उत्परिवर्तन, समावेशन, विलोपन)
    • गुणसूत्रीय असामान्यताएँ (संरचनात्मक या संख्यात्मक परिवर्तन)
    • कोशिका विभाजन (मीओसिस/माइटोसिस) के दौरान त्रुटियाँ
    • उत्परिवर्तन उत्पन्न करने वाले पर्यावरणीय कारक

‘कोडॉन’ के बारे में

  • कोडॉन मैसेंजर आरएनए (mRNA) में तीन न्यूक्लियोटाइडों के अनुक्रम होते हैं, जो किसी विशिष्ट अमीनो अम्ल को निर्दिष्ट करते हैं या ट्रांसलेशन के दौरान प्रोटीन संश्लेषण के समापन का संकेत देते हैं।
  • प्रत्येक कोडॉन तीन ‘नाइट्रोजनी बेस’ (त्रिक कोड) से मिलकर बना होता है।
  • कोडॉनों के प्रकार
    • स्टार्ट कोडॉन
      • AUG → मेथियोनीन के लिए कोड उत्पन्न करता है और प्रोटीन संश्लेषण की शुरुआत करता है।
    • स्टॉप कोडॉन: UAA, UAG, UGA
  • प्रोटीन संश्लेषण में भूमिका
    • ट्रांसलेशन की प्रक्रिया में राइबोसोम mRNA के कोडॉनों को पढ़कर प्रोटीन संश्लेषण करते हैं।
    • प्रत्येक कोडॉन tRNA पर स्थित पूरक एंटी कोडॉन के साथ युग्मित होता है।
    • प्रोटीन निर्माण में अमीनो अम्लों के सही अनुक्रम को सुनिश्चित करता है।

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.