संकल्प योजना के कार्यान्वयन में अंतराल

21 Feb 2026

संदर्भ

हाल ही में लोक लेखा समिति (PAC) ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की एक रिपोर्ट द्वारा विलंब और निधियों के अल्प-उपयोग को रेखांकित किए जाने के पश्चात् संकल्प योजना के अल्प कार्यान्वयन की आलोचना की।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में रेखांकित प्रमुख मुद्दे

  • वित्तीय अल्प-उपयोग: वित्त वर्ष 2017-18 से वित्त वर्ष 2023-24 के बीच आवंटित निधियों का केवल 44 प्रतिशत ही व्यय किया गया, जो निरंतर वित्तीय कमजोर प्रदर्शन को दर्शाता है।
  • कमजोर कार्यान्वयन एवं तैयारी का अभाव: मंत्रालय ने विश्व बैंक द्वारा वितरित ₹1,606.15 करोड़ में से केवल ₹850.71 करोड़ (86 प्रतिशत) का उपयोग किया, जो अपर्याप्त तैयारी और कमजोर निगरानी तंत्र को प्रतिबिंबित करता है।

संकल्प (जीविकोपार्जन प्रोत्साहन हेतु कौशल अधिग्रहण एवं ज्ञान जागरूकता) योजना के बारे में

  • संकल्प एक विश्व बैंक-सहायता प्राप्त कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारत के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना है।
  • नोडल मंत्रालय: कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित।
  • प्रारंभ: 19 जनवरी, 2018 को प्रारंभ; इसे अक्टूबर 2017 में स्वीकृत किया गया था।
  • बजट: ₹4,455 करोड़ का कुल प्रावधान।
  • कार्यान्वयन अवधि: इसकी मूल समय-सीमा मार्च 2023 से बढ़ाकर मार्च 2024 कर दी गई।
  • उद्देश्य
    • अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार,
    • संस्थागत क्षमता का संवर्द्धन,
    • उद्योग संबंधों को सुदृढ़ करना तथा
    • वंचित समुदायों के समावेशन को प्रोत्साहित करना।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के बारे में

  • भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक संघ और राज्य स्तर पर लोक वित्त की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी सर्वोच्च लेखा-परीक्षण प्राधिकरण है।
  • संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान का अनुच्छेद-148 नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को एक स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकरण के रूप में स्थापित करता है।
  • नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति छह वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, के लिए की जाती है।
  • पद से हटाना: पद से हटाने के लिए संसद की ऐसी प्रक्रिया आवश्यक है, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
  • भूमिका एवं कार्य: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सरकारी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण करता है तथा वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु अपनी प्रतिवेदन संसद और राज्य विधानमंडलों को प्रस्तुत करता है।

लोक लेखा समिति (PAC) के बारे में

  • लोक लेखा समिति का प्रथम परिचय वर्ष 1921 में भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अंतर्गत हुआ था, जो नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों के आधार पर सरकारी व्यय की परीक्षा करती है।
  • संरचना: इसमें 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से), जिनका चुनाव प्रतिवर्ष किया जाता है, तथा अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है।
  • भूमिका एवं प्रकृति: लोक लेखा समिति वित्तीय शुचिता और दक्षता के लिए सार्वजनिक व्यय की जाँच करती है, परंतु इसकी अनुशंसाएँ कार्यपालिका संबंधी नहीं, बल्कि परामर्शात्मक होती हैं।

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