संदर्भ
नीति आयोग द्वारा जारी 10-वर्षीय रोडमैप के अनुसार, भारत का 265 अरब डॉलर का प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र वर्ष 2035 तक बढ़कर 750–850 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है, जिससे विकसित भारत@2047 विजन में योगदान मिलेगा।
संबंधित तथ्य
- रोडमैप ने विकास के पाँच प्राथमिक साधनों की पहचान की है:
- एजेंटिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एजेंटिक AI),
- सॉफ्टवेयर और उत्पाद,
- डिजिटल अवसंरचना,
- नवाचार-प्रेरित इंजीनियरिंग, तथा
- इंडिया-फॉर-इंडिया समाधान।
प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र के बारे में
- प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएँ, व्यवसाय प्रक्रिया प्रबंधन (BPM), डिजिटल इंजीनियरिंग, क्लाउड सेवाएँ, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधान तथा वैश्विक और घरेलू ग्राहकों को प्रदान की जाने वाली उद्यम आधुनिकीकरण सहायता शामिल हैं।
- इस क्षेत्र में सॉफ्टवेयर विकास, एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) का कार्यान्वयन, क्लाउड माइग्रेशन, डेटा विश्लेषण, AI मॉडल परिनियोजन, साइबर सुरक्षा प्रबंधन, तथा डिजिटल परिवर्तन परामर्श शामिल है।
- मुख्य विशेषताएँ
- निर्यात-उन्मुख विकास मॉडल: यह क्षेत्र विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका से होने वाले निर्यात के माध्यम से राजस्व का एक बड़ा हिस्सा अर्जित करता है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 7% का योगदान देता है।
- प्रतिभा-आधारित प्रतिस्पर्द्धात्मक लाभ: कुशल और लागत-प्रभावी इंजीनियरों के बड़े समूह ने भारत को निरंतर वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता और विस्तार क्षमता प्रदान की है।
- AI-नेतृत्व आधारित सेवा प्रणाली की ओर संक्रमण: उद्योग श्रम-आर्बिट्राज मॉडल से हटकर बौद्धिक संपदा-आधारित, AI-सक्षम, परिणाम-आधारित सेवा-प्रदान ढाँचों की ओर बढ़ रहा है।
- वैश्विक प्रौद्योगिकी सेवा परिदृश्य: वैश्विक प्रौद्योगिकी सेवा बाजार का मूल्य लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर आँका गया है।
- इसने डिजिटल योग के प्रारंभ (2015–2020), कोविड-प्रेरित तीव्रता (2020–2022), तथा महामारी के बाद AI-नेतृत्व वाले व्यवधान (2022–2024) के चरण अवलोकित किए गए हैं।

भारत में प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति
- बाजार हिस्सेदारी: भारत का प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग 265 अरब डॉलर का राजस्व उत्पन्न करता है और वैश्विक बाजार में लगभग 20% हिस्सेदारी रखता है।
- क्षेत्र में वृद्धि: कोविड-19 महामारी अवधि के दौरान इस क्षेत्र ने 11–13% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की, लेकिन व्यापक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, वीजा प्रतिबंध और प्रारंभिक चरण के AI व्यवधान के कारण यह घटकर 7–8% CAGR रह गई है।
- सबसे बड़ा हिस्सा: लगभग 60% निर्यात संयुक्त राज्य अमेरिका के बाजार में केंद्रित है, जिससे यह उद्योग उस क्षेत्र में नियामक और आर्थिक परिवर्तनों के प्रति संवेदनशील बन जाता है।
- डेटा अवसंरचना का विस्तार: भारत वैश्विक डेटा का लगभग 20% उत्पन्न करता है और वर्तमान में डेटा सेंटर क्षमता 1.4 गीगावाट है, जिसके अगले दशक में उल्लेखनीय रूप से बढ़ने की संभावना है।
प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र में भारत की संभावनाएँ
- AI-नेतृत्व वाली परिवर्तन की संभावना: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विशेष रूप से जेनAI और एजेंटिक AI, सेवा-प्रदान मॉडलों को पुनर्परिभाषित कर रही है। भारत AI एकीकरण, मॉडल इंजीनियरिंग और शासन का वैश्विक केंद्र बन सकता है।
- सन्निकट बाजारों में विस्तार: भारत उद्यम संचालन स्वचालन, सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस उत्पाद, डिजिटल अवसंरचना, AI-नेटिव प्लेटफॉर्म और अनुसंधान एवं विकास इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में प्रवेश कर सकता है, जिनका संयुक्त संभावित बाजार लगभग 14 ट्रिलियन डॉलर है।
- अवसंरचना और डेटा लाभ: भारत डेटा सेंटर क्षमता को 1.4 गीगावाट से बढ़ाकर वर्ष 2035 तक 10–12 गीगावाट करने तथा AI कार्यभार के लिए जीपीयू-सक्षम अवसंरचना बढ़ाकर वैश्विक AI केंद्र बन सकता है।
- घरेलू बाजार का लाभ (इंडिया-फॉर-इंडिया रणनीति): शासन, UPI भुगतान, हेल्थ-टेक और बहुभाषी AI प्लेटफॉर्म में डिजिटलीकरण से घरेलू स्तर पर बड़े अवसर बनते हैं।
- नवाचार और बौद्धिक संपदा सृजन: अनुसंधान एवं विकास पर व्यय को 1–2% तक बढ़ाकर भारतीय कंपनियाँ उच्च मूल्य प्राप्ति की ओर बढ़ सकती हैं।
प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने हेतु सरकारी पहल
- इंडियाAI मिशन (2024): इस मिशन का उद्देश्य स्वदेशी आधारभूत AI मॉडल बनाना, कंप्यूटिंग अवसंरचना तैयार करना और इंडियाAI इनोवेशन सेंटर के माध्यम से समावेशी AI नवाचार पारितंत्र स्थापित करना है।
- ANRF के अंतर्गत अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) कोष: 1 लाख करोड़ रुपये का यह कोष सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और AI जैसे उच्च-जोखिम डीप-टेक क्षेत्रों को रियायती वित्तपोषण प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय डीप-टेक स्टार्टअप नीति: यह नीति वित्तपोषण, बौद्धिक संपदा और नियामक बाधाओं का समाधान करती है तथा डीप-टेक नवाचारों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देती है।
- डिजिटल इंडिया फ्यूचर लैब्स (2024): यह पहल अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली डिजाइन को बढ़ावा देती है और स्वदेशी बौद्धिक संपदा विकास के लिए शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्ट-अप्स और सरकार के मध्य सहयोग को प्रोत्साहित करती है।
- भारतजेन (2024): भारतजेन भारतीय भाषाओं में बहु-माध्यम ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ विकसित करने पर केंद्रित है, जिससे सार्वजनिक सेवा वितरण और बहुभाषी AI पहुँच में सुधार होता है।
भारत की संभावनाओं को प्राप्त करने हेतु सिफारिशें
- संरक्षित बौद्धिक संपदा और प्लेटफॉर्म-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश: कंपनियों को अपने राजस्व का 1–2% अनुसंधान एवं विकास में लगाकर दोहराए जाने योग्य सेवाओं को स्केलेबल, AI-नेटिव प्लेटफॉर्म में परिवर्तित करना चाहिए।
- एजेंटिक AI के साथ सेवा मॉडल की पुनर्कल्पना: उद्योग को “मानव + एजेंट + प्लेटफॉर्म” मॉडल अपनाना चाहिए और परिणाम-आधारित वाणिज्यिक अनुबंधों की ओर बढ़ना चाहिए।
- बाजार और क्षेत्र विविधीकरण: कंपनियों को स्वास्थ्य, रक्षा, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों तथा जापान, मध्य पूर्व और घरेलू बाजार जैसे गंतव्यों में विस्तार करना चाहिए।
- AI-केंद्रित पुनः-कौशल और परिवर्तन प्रबंधन का विस्तार: कार्यबल परिवर्तन में AI साक्षरता, समस्या-समाधान, शासन कौशल और अनुकूलनशील सीखने की क्षमताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
निष्कर्ष
भारत का प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र AI-आधारित परिवर्तन के निर्णायक मोड़ पर है। रणनीतिक नवाचार, अवसंरचना विस्तार और बौद्धिक संपदा-आधारित वृद्धि इसे वर्ष 2035 तक 750–850 अरब डॉलर का वैश्विक अग्रणी बना सकती है।