संदर्भ
वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस, 2026 के अनुसार, भारत में 5-9 वर्ष की आयु के लगभग 1.5 करोड़ बच्चे और 10-19 वर्ष की आयु के 2.6 करोड़ से अधिक बच्चे वर्ष 2025 में अधिक वजन वाले या मोटापे से ग्रस्त थे।
मोटापा (ओबेसिटी) क्या है?
- इसे आधिकारिक रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एक बीमारी के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन (WOF) के बारे में
- यह एक वैश्विक गैर-लाभकारी संगठन है, जो विश्व में मोटापे को कम करने, उसकी रोकथाम करने और उसका उपचार करने के लिए कार्य करता है।
- स्थापना: वर्ष 2015 (‘इंटरनेशनल ओबेसिटी टास्क फोर्स’ और ‘द इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ ओबेसिटी’ के विलय के माध्यम से)।
- मुख्यालय: लंदन, यूनाइटेड किंगडम।
- मुख्य कार्य
- अनुसंधान और आँकड़े: विश्व स्तर की रिपोर्टें प्रकाशित करता है, जैसे वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस, जो ‘ग्लोबल ओबेसिटी ट्रेंड्स’ का आकलन करती है।
- नीति वकालत: मोटापे की रोकथाम के लिए नीतियाँ विकसित करने में सरकारों का समर्थन करता है।
- क्षमता निर्माण: स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों के लिए प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराता है।
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संबंधित तथ्य
- ‘वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन’ के अनुसार, वर्ष 2040 तक कुल 507 मिलियन बच्चे मोटापे से ग्रस्त होंगे या अधिक वजन की श्रेणी में होंगे।
- ‘वर्ल्ड ओबेसिटी डे’ (विश्व मोटापा दिवस) प्रत्येक वर्ष 4 मार्च को मनाया जाता है।
वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस, 2026 के बारे में
- यह एटलस वर्ष 2025 से 2040 की अवधि के लिए बाल्यावस्था में मोटापे की व्यापकता के अनुमान प्रस्तुत करता है।
मुख्य निष्कर्ष
भारत से संबंधित
- ‘बॉडी मास इंडेक्स’ में उच्च वृद्धि: भारत में लगभग 41 मिलियन बच्चों का बॉडी मास इंडेक्स उच्च हो सकता है और 14 मिलियन बच्चे मोटापे के साथ जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
- ‘चाइल्डहुड ओबेसिटी’ की वर्तमान स्थिति: भारत में वर्ष 2025 में पाँच से नौ वर्ष आयु वर्ग के लगभग 14.9 मिलियन बच्चे तथा 10–19 वर्ष आयु वर्ग के 26 मिलियन से अधिक बच्चे अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित थे।

- भविष्य के अनुमान: अनुमान है कि भारत में 20 मिलियन बच्चे मोटापे के साथ जीवन व्यतीत कर रहे होंगे और 56 मिलियन बच्चे या तो अधिक वजन वाले होंगे या मोटापे से प्रभावित होंगे।
- BMI से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि: बच्चों में उच्च ‘बॉडी मास इंडेक्स’ से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि होने की संभावना है:-
- हाइपरटेंशन के मामले 2.99 मिलियन से बढ़कर 4.21 मिलियन हो सकते हैं।
- हाइपरग्लाइसीमिया के मामले 1.39 मिलियन से बढ़कर 1.91 मिलियन तक पहुँच सकते हैं।
- उच्च ट्राइग्लिसराइड्स के मामले 4.39 मिलियन से बढ़कर 6.07 मिलियन तक बढ़ सकते हैं।
- वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर भारत की स्थिति: भारत अपनी बड़ी जनसंख्या के कारण ‘चाइल्डहुड ओबेसिटी’ में विश्व में दूसरे स्थान पर है।
- भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में भी पहले स्थान पर है, जहाँ 0–19 वर्ष आयु वर्ग के 45 मिलियन से अधिक बच्चे और किशोर अधिक वजन या ओबेसिटी से प्रभावित हैं।
बॉडी मास इंडेक्स (Body Mass Index- BMI)
- बॉडी मास इंडेक्स (BMI), जिसे पहले क्वेटलेट इंडेक्स कहा जाता था, वयस्कों में यह जाँचने की एक विधि है कि उनका वजन सामान्य है या नहीं।
- इसे इस प्रकार गणना किया जाता है: वजन (किलोग्राम) / ऊँचाई² (मीटर²)।
- BMI निकालने के लिए किसी व्यक्ति के वजन (किलोग्राम) को उसकी ऊँचाई (मीटर) के वर्ग से विभाजित किया जाता है।
- सामान्य BMI सीमा: विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुसार सामान्य BMI 18.5 से 24.9 के बीच माना जाता है।
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मोटापे में वृद्धि से जुड़े प्रमुख जोखिम कारक
- किशोरों में कम शारीरिक गतिविधि: 11–17 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 74% किशोर अनुशंसित स्तर की शारीरिक गतिविधि पूरी नहीं करते, जिससे मोटापे और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।
- स्कूल भोजन कार्यक्रमों का सीमित कवरेज: केवल 35.5% प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय के बच्चों को स्कूल में भोजन प्राप्त होता है, जो संस्थागत पोषण कार्यक्रमों में कमी को दर्शाता है।
- बच्चों द्वारा मीठे पेय पदार्थों का सेवन: 6–10 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे प्रतिदिन औसतन 0–50 मिलीलीटर मीठे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, जो अस्वास्थ्यकर खान-पान की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।
- स्तनपान की अपर्याप्त प्रथाएँ: लगभग 32.6% शिशुओं (पाँच महीने तक) को पर्याप्त रूप से स्तनपान नहीं कराया जाता है, जो प्रारंभिक बाल्यावस्था के पोषण और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
- महिलाओं में उच्च BMI का जोखिम: 15–49 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 13.4% महिलाओं में उच्च बॉडी मास इंडेक्स (BMI) से जुड़ा जोखिम व्याप्त है, जो मोटापे और उससे जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते संकट को दर्शाता है।
- महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज की व्यापकता: 15–49 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 4.2% महिलाएँ टाइप-2 डायबिटीज से प्रभावित हैं, जो प्रजनन आयु की महिलाओं में बढ़ती चयापचय संबंधी स्वास्थ्य चिंताओं को दर्शाता है।
वैश्विक स्तर पर
- अधिक वजन और मोटापे की बढ़ती व्यापकता: 5–19 वर्ष आयु वर्ग में प्रत्येक पाँच में से एक से अधिक (20.7%) बच्चे मोटापे से ग्रस्त हैं या अधिक वजन वाले हैं, जो वर्ष 2010 के बाद से 14.6% की वृद्धि दर्शाता है।
- उच्च BMI वाले बच्चों की संख्या: जिन आठ देशों में 1 करोड़ से अधिक बच्चों में उच्च BMI होने का अनुमान है, उनमें चीन, भारत और अमेरिका में 1 करोड़ से अधिक बच्चे मोटापे के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
- देशों के अनुसार स्थिति: चीन दोनों श्रेणियों में अग्रणी है, जहाँ 62 मिलियन बच्चों में उच्च BMI और 33 मिलियन बच्चे केवल मोटापे से प्रभावित हैं। इसके बाद भारत और अमेरिका का स्थान है, जहाँ 27 मिलियन बच्चों में उच्च BMI और 13 मिलियन बच्चे मोटापे से प्रभावित हैं।
मोटापे की रोकथाम के लिए सुझाव
- निवारक नीतियों को मजबूत करना: स्वस्थ विद्यालयी भोजन वातावरण, अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के विपणन से बच्चों की सुरक्षा और चीनीयुक्त पेय पदार्थों पर कर जैसे वित्तीय उपायों सहित मजबूत रोकथाम नीतियाँ बनाई जानी चाहिए।
- क्षेत्रीय स्तर पर नेतृत्व का अवसर: भारत के पास मोटापे की बढ़ती प्रवृत्ति को उलटने में क्षेत्र का नेतृत्व करने का अवसर है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान स्थिति को परिवर्तित करने के लिए त्वरित और निर्णायक नीतिगत कदम आवश्यक हैं।
- निवारक और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना: बच्चों के लिए वैश्विक शारीरिक गतिविधियों संबंधी सिफारिशों को लागू करना, स्तनपान की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रोकथाम व उपचार को प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत करना आवश्यक है।