संदर्भ:
हाल के दिनों में युवा बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर पर जारी बहस ने भारत के रोज़गार संकट और आर्थिक संवृद्धि के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण रोज़गार सृजन के लिए आवश्यक संरचनात्मक आर्थिक सुधारों की ओर पुनः ध्यान केंद्रित किया है।
रोज़गार सृजन क्यों महत्त्वपूर्ण है?
- जनसांख्यिकीय लाभांश : भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा जनसंख्या है, जिससे अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग करने और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए उत्पादक रोज़गार अनिवार्य हो जाता है।
- समावेशी आर्थिक संवृद्धि: उच्च रोज़गार से घरेलू आय में वृद्धि होती है, उपभोग को बढ़ावा मिलता है, सकल माँग सुदृढ़ होती है और सतत आर्थिक संवृद्धि को बल मिलता है।
- सामाजिक स्थिरता: रोज़गार गरीबी, असमानता, सामाजिक अशांति और आर्थिक असुरक्षा को कम करता है, साथ ही यह सामाजिक सामंजस्य को भी मज़बूत करता है।
- मानव पूँजी विकास: स्थिर रोज़गार से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पोषण तथा कौशल विकास में अधिक निवेश को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे दीर्घकालिक उत्पादकता में सुधार होता है।
मुख्य चुनौतियाँ:
- रोज़गार-विहीन संवृद्धि : उच्च सकल घरेलू उत्पाद (GDP) संवृद्धि पर्याप्त रोज़गार सृजन में परिवर्तित नहीं हो पाई है, जिसके परिणामस्वरूप रोज़गार लोच की स्थिति अभी भी निम्न बनी हुई है।
- AI-संचालित स्वचालन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स और स्वचालन का तीव्र प्रसार उत्पादकता को तो बढ़ाता है, परंतु विशेष रूप से वह नियमित एवं निम्न-कौशल वाले व्यवसायों में श्रमिकों के विस्थापन का जोखिम भी उत्पन्न करता है।
- कमज़ोर विनिर्माण आधार: श्रम-प्रधान विनिर्माण क्षेत्रों का विस्तार बढ़ते कार्यबल को समाहित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
- विशाल अनौपचारिक कार्यबल: श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी अनौपचारिक रोज़गार में संलग्न है, जहाँ कम मज़दूरी, निम्न उत्पादकता और अपर्याप्त सामाजिक सुरक्षा की स्थिति विद्यमान है।
- कौशल असंतुलन : अधिकांश शिक्षित युवाओं में उद्योग-प्रासंगिक कौशल का अभाव है, जिससे उच्च शैक्षणिक उपलब्धि के बावजूद बेरोज़गारी दर में वृद्धि हो रही है।
- क्षेत्रीय असमानताएँ: राज्यों में असमान औद्योगीकरण और रोज़गार अवसर, प्रवासन और क्षेत्रीय असमानताओं को बढ़ावा देते हैं।
चीन की रोज़गार रणनीति से सीख:
- रोज़गार-प्रथम दृष्टिकोण: चीन ने आर्थिक नीति-निर्माण के केंद्र में रोज़गार सृजन और सामाजिक स्थिरता को क्रमिक रूप से प्राथमिकता दी है।
- उत्तरदायित्वपूर्ण AI को अपनाना : चीनी अधिकारियों ने इस बात पर बल दिया है कि तकनीकी प्रगति को रोज़गार और श्रमिकों के कल्याण की रक्षा करते हुए उत्पादकता में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- श्रमिक पुनर्कौशल विकास : नीतियाँ नियोक्ताओं को AI-संचालित अर्थव्यवस्था के लिए श्रमिकों को तैयार करने हेतु निरंतर प्रशिक्षण और पुनर्कौशल विकास में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
- सुदृढ़ सरकारी हस्तक्षेप: श्रम बाज़ार नीतियाँ औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को रोज़गार सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण के साथ संतुलित करने में मदद करती हैं।
भारत के वर्तमान दृष्टिकोण से जुड़ी मुख्य चिंताएँ:
- सीमित रोज़गार केंद्रितता: आर्थिक सुधारों ने मुख्यतः व्यापार करने में सुगमता को प्राथमिकता दी है, जबकि रोज़गार सृजन को समान नीतिगत महत्त्व नहीं मिल पाया है।
- पूँजी-प्रधान संवृद्धि: हाल की आर्थिक संवृद्धि तेज़ी से पूँजी-प्रधान क्षेत्रों द्वारा संचालित हुई है, जो अपेक्षाकृत सीमित रोज़गार सृजित करते हैं।
- नियोक्ताओं की सीमित ज़िम्मेदारी: तकनीकी बदलावों के दौरान श्रमिकों के पुनर्प्रशिक्षण, पुनर्नियोजन और कौशल उन्नयन के संबंध में नियोक्ताओं पर सीमित दायित्व हैं।
- अपर्याप्त सामाजिक संरक्षण: अनौपचारिक श्रमिकों को आय सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बीमा और अन्य सामाजिक संरक्षण उपायों तक सीमित पहुँच प्राप्त है।
आगे की राह:
- रोज़गार-प्रधान संवृद्धि अपनाना: आर्थिक नीतियों को उत्पादकता और निवेश के साथ-साथ विकास के केंद्र में रोज़गार सृजन को रखना चाहिए।
- श्रम-प्रधान उद्योगों को बढ़ावा देना: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), वस्त्र, परिधान, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन, निर्माण तथा अन्य रोज़गार-प्रधान क्षेत्रों को अधिक समर्थन प्रदान किए जाने की आवश्यकता है ।
- एक उत्तरदायीत्वपूर्ण AI शासन सुनिश्चित करना: AI को वृहद स्तर पर अपनाने के साथ-साथ श्रमिक पुनर्कौशल विकास, आजीवन सीखने और बड़े पैमाने पर तकनीकी विस्थापन के विरुद्ध सुरक्षा उपाय की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ।
- कौशल विकास को सुदृढ़ करना: उद्योग-संबद्ध व्यावसायिक शिक्षा, प्रशिक्षुता , डिजिटल कौशल और भविष्य के लिए निर्मित कार्यबल विकास कार्यक्रमों का विस्तार किया जाना चाहिए ।
- सामाजिक सुरक्षा को मज़बूत करना: औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों प्रकार के श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक संरक्षण, स्वास्थ्य बीमा, बेरोज़गारी सहायता और वहनीय लाभ को सुदृढ़ करना।
- संवृद्धि और समता में संतुलन: आर्थिक सुधार को व्यापार करने में सुगमता, जीवन यापन में सुगमता तथा आय अर्जन में सुगमता इत्यादि को समावेशी विकास सुनिश्चित करने हेतु एक साथ बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
निष्कर्ष:
निष्कर्षतः विकसित भारत बनने की भारत की आकांक्षा के लिए एक ऐसे रोज़गार-प्रधान संवृद्धि मॉडल की आवश्यकता है जो सतत आर्थिक संवृद्धि के साथ-साथ उत्पादक, सुरक्षित और गरिमापूर्ण रोज़गार सृजित कर सकने में सक्षम हो । तकनीकी नवाचार को श्रमिक संरक्षण, कौशल विकास और समावेशी आर्थिक नीतियों के साथ समायोजित किया जाना चाहिए जो कि रोज़गार-प्रधान एवं समावेशी विकास प्राप्त करने की दिशा में आवश्यक होगा।
UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न (UPSC CSE Mains 2024, GS-III):
भारत में ‘रोज़गार-विहीन संवृद्धि’ (Jobless Growth) की समस्या के प्रमुख कारणों का विश्लेषण कीजिए। समावेशी एवं रोज़गार-प्रधान आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक नीतिगत उपायों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न
प्रश्न (UPSC CSE Prelims 2019):
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग-संबद्ध कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी रोज़गार क्षमता को बढ़ाना है।
- इस योजना का कार्यान्वयन राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के माध्यम से किया जाता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (c) |