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Lokesh Pal
June 04, 2026 04:27
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हाल ही में भारत सरकार ने मुद्रास्फीति के माप की सटीकता में सुधार करने के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) को उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) से वर्ष 2031 तक चरणबद्ध तरीके से बदलने की मंजूरी दे दी है, जिसमें नए 2022-23 आधार वर्ष (Base Year) पर आधारित संशोधित सूचकांक शृंखला शामिल होगी।
यह अद्यतन केवल आधार वर्ष बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मूल्य मापन के लिए डेटा संग्रह और गणना की विधियों में मौलिक सुधार करता है, ताकि मूल्य निर्धारण अधिक सटीक हो सके।


नया उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) ढाँचा, उन कीमतों में परिवर्तन को मापता है, जो उत्पादकों को वस्तुओं और सेवाओं के लिए प्राप्त होती हैं, इससे पहले कि वे उपभोक्ताओं तक पहुँचें। यह भारत के राष्ट्रीय लेखा की ‘आपूर्ति और उपयोग तालिकाओं’ (Supply and Use Tables) पर आधारित भार का उपयोग करता है। इसमें तीन अलग-अलग सूचकांक शामिल हैं:-
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पिछले आठ दशकों से भी अधिक समय से भारत में आपूर्ति-पक्ष की मुद्रास्फीति (supply-side inflation) को मापने का एक पारंपरिक पैमाना रहा है। हालाँकि, इसमें कई ऐसी संरचनात्मक सीमाएँ हैं, जो इसे एक आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए अनुपयुक्त बनाती हैं:-
WPI से PPI की ओर यह परिवतन सटीक फैक्टरी-गेट और सेवा-क्षेत्र की कीमतों को सुनिश्चित करता है, जीडीपी डिफ्लेशन (GDP Deflation) में सुधार करता है, नीतिगत सटीकता को मजबूत करता है, वैश्विक तुलनात्मकता को बढ़ाता है, और अनुबंधों के लिए एक पूर्वानुमानित ढाँचा प्रदान करता है, जो भारत के आर्थिक डेटा आधुनिकीकरण में एक बड़ा कदम है।
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