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Lokesh Pal
June 04, 2026 04:22
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हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने खनन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंताओं के बीच अरावली पर्वतमाला की वैज्ञानिक परिभाषा की स्वतंत्र समीक्षा हेतु एक उच्चस्तरीय समिति (HPC) का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के प्रमुख कर रहे हैं।

अरावली पर्वतमाला पृथ्वी की सबसे प्राचीन भू-वैज्ञानिक संरचनाओं में से एक है, जिसका निर्माण प्रोटेरोजोइक युग में हुआ था, अर्थात् हिमालय से भी बहुत पहले। यह उत्तर-पश्चिम भारत की पारिस्थितिकी आधार मानी जाती है।

अरावली पर्वतमाला एक बहु-कार्यात्मक पारिस्थितिकी “कवच” के रूप में कार्य करती है, जो उत्तर भारत की पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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