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इंडिया एनर्जी स्टैक (IES): विद्युत क्षेत्र के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI)

Lokesh Pal July 09, 2026 03:38 12 0

संदर्भ

हाल ही में विद्युत मंत्रालय ऊर्जा क्षेत्र के डिजिटल रूपांतरण के लिए इंडिया एनर्जी स्टैक (IES) विकसित कर रहा है।

संबंधित तथ्य

  • इस पहल का उद्देश्य भारत के विद्युत क्षेत्र को परस्पर-संचालनीय, डेटा-संचालित, दक्ष तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)-सक्षम बनाना है, ठीक उसी प्रकार जैसे आधार एवं यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में सफलता प्राप्त की है।

इंडिया एनर्जी स्टैक (IES) के बारे में

  • इंडिया एनर्जी स्टैक (IES) विद्युत क्षेत्र के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) है, जो विभिन्न हितधारकों के मध्य ऊर्जा-संबंधी डेटा के सुरक्षित एवं निर्बाध आदान-प्रदान हेतु समान डिजिटल मानक स्थापित करता है।
  • यह भारत के विद्युत पारितंत्र के लिए एक साझा डिजिटल आधार के रूप में कार्य करता है।
  • इंडिया एनर्जी स्टैक (IES) के उद्देश्य
    • विद्युत डेटा का सुरक्षित आदान-प्रदान।
    • विद्युत उपयोगिताओं में मानकीकरण।
    • विद्युत वितरण की दक्षता में सुधार।
    • प्रतिस्पर्धा एवं नवाचार को प्रोत्साहन।
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित विद्युत प्रबंधन को सक्षम बनाना।
    • भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को समर्थन प्रदान करना।

प्रमुख विशेषताएँ

  • परस्पर-संचालनीयता: समान डिजिटल मानकों एवं प्रोटोकॉल के माध्यम से विद्युत-संबंधी डेटा के निर्बाध आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है।
    • डिस्कॉम (DISCOMs), पारेषण उपयोगिताओं, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों, उपभोक्ताओं, नियामकों तथा अन्य हितधारकों को एकीकृत मंच पर जोड़ता है।
    • समन्वय में सुधार करता है, सूचना संबंधी पृथकता को कम करता है तथा विद्युत पारितंत्र की दक्षता बढ़ाता है।
  • सुरक्षित डेटा साझाकरण: अधिकृत संस्थाओं के मध्य ऊर्जा डेटा के साझाकरण हेतु सुरक्षित एवं मानकीकृत ढाँचा प्रदान करता है।
    • गोपनीयता संरक्षण, सहमति-आधारित अभिगम, डेटा प्रमाणीकरण तथा सत्यापन योग्य लेन-देन सुनिश्चित करता है।
    • डेटा की पुनरावृत्ति को कम करता है, पारदर्शिता बढ़ाता है तथा त्वरित एवं बेहतर निर्णय-निर्माण को समर्थन प्रदान करता है।
  • संघीय व्यवस्था: भारत की संघीय व्यवस्था के अनुरूप विकसित, जहाँ विद्युत समवर्ती सूची का विषय है।
    • राज्यों एवं विद्युत उपयोगिताओं की परिचालन स्वायत्तता को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय सुनिश्चित करता है।
    • विद्युत क्षेत्र में समान मानकों, परस्पर-संचालनीयता तथा सहकारी संघवाद को प्रोत्साहित करता है।
  • साझा डिजिटल संरचना: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) मॉडल का अनुसरण करता है, जैसा आधार एवं यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) में किया गया है।
    • सरकार साझा डिजिटल अवसंरचना उपलब्ध कराती है, जबकि निजी क्षेत्र नवाचारी मूल्य-वर्द्धित सेवाओं का विकास करता है।
    • ऊर्जा क्षेत्र में प्रतिस्पर्द्धा, नवाचार, विस्तारशीलता तथा उपभोक्ता-केंद्रित समाधानों को प्रोत्साहित करता है।

भारत की विद्युत क्षेत्र में उपलब्धियाँ

  • सार्वभौमिक पहुँच
    • ग्रामीण एवं शहरी भारत में विद्युत पहुँच का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
    • रात्रिकालीन कृत्रिम प्रकाश (ALAN): के उपग्रह चित्रों से विद्युतीकरण में सुधार परिलक्षित होता है।
  • सुदृढ़ राष्ट्रीय ग्रिड
    • भारत एकल राष्ट्रीय आवृत्ति पर संचालित विश्व के सबसे बड़े समकालिक विद्युत ग्रिडों में से एक का संचालन करता है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा
    • भारत ने वर्ष 2025 में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 50% स्थापित विद्युत क्षमता का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच वर्ष पूर्व प्राप्त कर लिया।
      • लक्ष्य
        • वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता प्राप्त करना।

इंडिया एनर्जी स्टैक (IES) के लाभ

  • आर्थिक लाभ
    • कुशल ऊर्जा प्रबंधन तथा परिचालन संबंधी अक्षमताओं में कमी के माध्यम से विद्युत लागत को कम करता है।
    • विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति एवं ऊर्जा दक्षता में सुधार के माध्यम से औद्योगिक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाता है।
    • पारेषण एवं वितरण (T&D) हानियों को कम करता है तथा व्यवसाय करने की सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार करता है।
  • सुशासन संबंधी लाभ
    • साझा डिजिटल मंच के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकारों, नियामकों तथा विद्युत उपयोगिताओं के मध्य समन्वय को सुदृढ़ करता है।
    • नीतियों के त्वरित क्रियान्वयन तथा विद्युत क्षेत्र की वास्तविक समय निगरानी को सक्षम बनाता है।
    • कुशल ऊर्जा नियोजन एवं संसाधन आवंटन हेतु डेटा-संचालित निर्णय-निर्माण को प्रोत्साहित करता है।
  • उपभोक्ता संबंधी लाभ
    • स्मार्ट मीटरिंग एवं डिजिटल अभिलेखों के माध्यम से बिलिंग की शुद्धता में सुधार करता है।
    • शिकायतों के त्वरित निवारण तथा बेहतर उपभोक्ता सेवाओं को सक्षम बनाता है।
    • विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर समग्र उपभोक्ता अनुभव को बेहतर बनाता है।
  • पर्यावरणीय लाभ
    • सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बैटरी भंडारण, विद्युत वाहन (EVs) तथा हरित हाइड्रोजन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के निर्बाध एकीकरण को सक्षम बनाता है।
    • परिवर्तनशील नवीकरणीय ऊर्जा के प्रबंधन हेतु ग्रिड के लचीलेपन में सुधार करता है।
    • भारत के स्वच्छ एवं निम्न-कार्बन ऊर्जा प्रणाली की ओर संक्रमण को गति प्रदान करता है।
  • भारत की AI अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्व
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) डेटा केंद्रों, क्लाउड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर विनिर्माण तथा उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के लिए आवश्यक विश्वसनीय एवं दक्ष विद्युत उपलब्ध कराता है।
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित विद्युत माँग पूर्वानुमान, स्मार्ट ग्रिड प्रबंधन तथा गतिशील विद्युत मूल्य निर्धारण को सक्षम बनाता है।
    • भारत की तीव्र गति से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था के समर्थन हेतु आवश्यक डिजिटल अवसंरचना का निर्माण करता है।

चुनौतियाँ

  • डेटा प्रशासन
    • ऊर्जा-संबंधी डेटा की गोपनीयता, साइबर सुरक्षा तथा सुरक्षित साझाकरण सुनिश्चित करना एक प्रमुख चुनौती है।
    • डेटा स्वामित्व तथा उपयोगकर्ता की सहमति से संबंधित स्पष्ट नियम आवश्यक हैं।
    • महत्त्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा हेतु सुदृढ़ डिजिटल सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
  • संस्थागत समन्वय
    • ऊर्जा प्रशासन में अनेक मंत्रालय, नियामक, राज्य सरकारें तथा डिस्कॉम (DISCOMs) सम्मिलित हैं।
    • निर्बाध समन्वय के अभाव में एकीकृत डिजिटल समाधानों के क्रियान्वयन में विलंब हो सकता है।
    • विभिन्न हितधारकों के मध्य नीतियों का सामंजस्य स्थापित करना एक प्रमुख चुनौती है।
  • डिजिटल अवसंरचना अंतराल
    • अनेक डिस्कॉम (DISCOMs) के पास स्मार्ट मीटर, उन्नत डिजिटल अवसंरचना तथा प्रशिक्षित मानव संसाधनों का अभाव है।
    • राज्यों के बीच प्रौद्योगिकी अपनाने में असमानता परस्पर-संचालनीयता को प्रभावित कर सकती है।
    • प्रभावी क्रियान्वयन हेतु क्षमता निर्माण आवश्यक है।
  • डिस्कॉम (DISCOMs) का वित्तीय संकट
    • वित्तीय रूप से कमजोर डिस्कॉम (DISCOMs) के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों में निवेश करना कठिन हो सकता है।
    • उच्च कुल तकनीकी एवं वाणिज्यिक (AT&C) हानियाँ उनकी वित्तीय व्यवहार्यता को प्रभावित करती हैं।
    • डिजिटल सुधारों के साथ संरचनात्मक वित्तीय सुधार भी आवश्यक हैं।

आगे की राह

  • स्मार्ट मीटरिंग का विस्तार
    • पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के अंतर्गत देशव्यापी स्मार्ट मीटरों की स्थापना में तेजी लाई जाए।
    • बिलिंग दक्षता में सुधार, हानियों में कमी तथा वास्तविक समय निगरानी को सक्षम बनाया जाए।
  • डेटा प्रशासन को सुदृढ़ बनाना
    • डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा तथा सहमति-आधारित डेटा साझाकरण के लिए सुदृढ़ ढाँचा विकसित किया जाए।
    • ऊर्जा डेटा के सुरक्षित एवं परस्पर-संचालनीय आदान-प्रदान हेतु समान मानक स्थापित किए जाएँ।
  • डिजिटल क्षमता निर्माण
    • डिजिटल अवसंरचना के उन्नयन तथा कार्यबल के प्रशिक्षण के माध्यम से डिस्कॉम (DISCOMs) का आधुनिकीकरण किया जाए।
    • विद्युत क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तथा उन्नत विश्लेषण तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए।
  • डिस्कॉम (DISCOMs) की वित्तीय स्थिति में सुधार
    • परिचालन सुधारों तथा बेहतर प्रशासन के माध्यम से कुल तकनीकी एवं वाणिज्यिक (AT&C) हानियों को कम किया जाए।
    • लागत-आधारित टैरिफ तथा समयबद्ध सब्सिडी भुगतान को बढ़ावा देकर वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जाए।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट ग्रिड को बढ़ावा
    • माँग पूर्वानुमान, पूर्वानुमेय अनुरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण तथा गतिशील मूल्य निर्धारण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग किया जाए।
    • ग्रिड की विश्वसनीयता, दक्षता तथा लचीलेपन में वृद्धि की जाए।
  • एकीकृत ऊर्जा नियोजन
    • विद्युत, प्राकृतिक गैस, हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को एकीकृत करने वाला एकीकृत डिजिटल ढाँचा विकसित किया जाए।
    • दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा तथा नेट जीरो लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु समग्र-सरकार दृष्टिकोण (Whole-of-Government Approach) पर आधारित समन्वय को प्रोत्साहित किया जाए।

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