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Lokesh Pal
April 25, 2026 03:35
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वैश्विक ऊर्जा व्यवधानों तथा कच्चे तेल के आयात पर बढ़ती निर्भरता के परिप्रेक्ष्य में भारत एथेनॉल-आधारित ईंधनों तथा स्वच्छ विकल्पों—जैसे E100 ईंधन, फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFVs) और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF)—की ओर संक्रमण को तीव्र कर रहा है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सके।
भारत पारंपरिक स्थिर मिश्रण मॉडल (जैसे- E20) से आगे बढ़कर फ्लेक्स-फ्यूल वाहन व्यवस्था की ओर अग्रसर है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सतत् विमानन ईंधन (विपणन विनियमन) आदेश, 2001 में संशोधन के माध्यम से विमानन क्षेत्र में हरित उड़ान संबंधी क्षेत्र में संक्रमण हेतु विधिक आधार प्रदान किया है।
जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति का एक महत्त्वपूर्ण घटक फीडस्टॉक का विविधीकरण है, जिसका उद्देश्य “खाद्य बनाम ईंधन” दुविधा का समाधान करना है।
पश्चिम एशिया में ऊर्जा संकट की वर्तमान स्थिति के दौरान अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने हेतु सरकार ने नियामकीय त्वरितीकरण उपायों को लागू किया है।
भारत द्वारा E100 ईंधन, फ्लेक्स-फ्यूल वाहन, सतत् विमानन ईंधन तथा संपीडित जैव-गैस को बढ़ावा देना ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु लक्ष्यों और ग्रामीण परिवर्तन के रणनीतिक समन्वय को दर्शाता है। इसकी सफलता प्रौद्योगिकी नवाचार, सतत् फीडस्टॉक उपलब्धता तथा स्थिर नीतिगत समर्थन पर निर्भर करेगी, जिससे यह संक्रमण आर्थिक रूप से व्यवहार्य, पर्यावरणीय रूप से सतत् और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्द्धी बन सके।
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