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Lokesh Pal
April 25, 2026 03:40
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हाल ही में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा “द साइकोसोशल वर्किंग एनवायरनमेंट: ग्लोबल डेवलपमेंट्स एंड पाथवे फॉर एक्शन” शीर्षक से एक नई वैश्विक रिपोर्ट जारी की गई है।
| पहल / कानून (Initiative / Law) | मुख्य विशेषताएँ | कार्य-संस्कृति से प्रासंगिकता |
| श्रम संहिताएँ (2019–2020) | 29 श्रम कानूनों का 4 संहिताओं में समेकन (वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य)। | अनुपालन को सरल बनाता है, बेहतर कार्य परिस्थितियाँ एवं श्रमिक संरक्षण सुनिश्चित करता है। |
| व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएँ संहिता, 2020 | कार्य-घंटों, सुरक्षा मानकों एवं कल्याण प्रावधानों का विनियमन | सुरक्षित, मानवीय एवं विनियमित कार्यस्थलों को प्रोत्साहित करता है। |
| सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 | मातृत्व लाभ, बीमा, पेंशन (गिग श्रमिकों सहित) प्रदान करता है। | नौकरी की असुरक्षा एवं वित्तीय तनाव को कम करता है। |
| POSH अधिनियम, 2013 | आंतरिक शिकायत समिति (ICC) एवं उत्पीड़न के लिए शिकायत निवारण तंत्र अनिवार्य | विशेषकर महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं समावेशी कार्य वातावरण सुनिश्चित करता है। |
| राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) | मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं परामर्श सेवाओं को बढ़ावा | कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन को समर्थन |
| ई-श्रम पोर्टल (2021) | असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस | रोजगार सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण को सुदृढ़ करता है। |
| कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर राष्ट्रीय नीति (2009) | निवारक सुरक्षा संस्कृति एवं श्रमिक सहभागिता पर बल | स्वस्थ एवं सहभागी कार्य-संस्कृति को प्रोत्साहित करता है। |
| CPGRAMS (शिकायत पोर्टल) | ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र | कार्यस्थल पर जवाबदेही एवं पारदर्शिता को बढ़ाता है। |
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