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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal May 08, 2026 05:17 6 0

फुजैराह

संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह पर ईरान द्वारा किए गए ड्रोन हमलों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।

फुजैराह के बारे में

  • फुजैराह संयुक्त अरब अमीरात के सात अमीरातों में से एक है और एक महत्त्वपूर्ण वैश्विक समुद्री और ऊर्जा केंद्र है।
  • स्थान: फुजैराह संयुक्त अरब अमीरात के पूर्वी तट पर ओमान की खाड़ी के किनारे, होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है, जिससे इसे अरब सागर तक सीधी पहुँच प्राप्त है।
  • फुजैराह का रणनीतिक महत्त्व
    • प्रमुख वैश्विक ऊर्जा पारगमन केंद्र: फुजैराह में विश्व की सबसे बड़ी तेल भंडारण और बंकरिंग सुविधाओं में से एक स्थित है, जिससे संयुक्त अरब अमीरात, होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह निर्भर हुए बिना तेल निर्यात कर सकता है।
      • इस अमीरात में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी की पाइपलाइनों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ी महत्त्वपूर्ण अवसंरचनाएँ मौजूद हैं।
    • महत्त्वपूर्ण समुद्री एवं जहाजरानी केंद्र: फुजैराह एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के मध्य संचालित होने वाले अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाजों के लिए एक प्रमुख ईंधन भरने और रसद केंद्र के रूप में कार्य करता है।
    • पश्चिम एशिया में सामरिक सुरक्षा महत्त्व: होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित होने के कारण ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच तनाव के माहौल में फुजैराह भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।

फुजैराह पर हमले क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों की सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।

सुदूर ट्रांस-नेप्च्यूनियन पिंड पर वायुमंडल का पता चला 

नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चला है कि खगोलविदों ने ट्रांस-नेप्च्यूनियन ऑब्जेक्ट (612533) 2002 XV93 के चारों ओर एक ‘विरल’ वायुमंडल की खोज की है।

  • इससे पहले, इतने दूरस्थ बर्फीले पिंडों में से केवल प्लूटो के पास ही वायुमंडल होने की जानकारी थी।

लगभग (612533) 2002 XV93

  • वर्गीकरण: नेप्च्यून के अतिरिक्त सूर्य की परिक्रमा करने वाली एक ट्रांस-नेप्च्यूनियन ऑब्जेक्ट (TNO)।
    • TNO नेप्च्यून के परे स्थित खगोलीय पिंड हैं, जो कुइपर बेल्ट में पाए जाते हैं और इन्हें प्रारंभिक सौर मंडल निर्माण के अवशेष माना जाता है।
  • स्थान: कुइपर बेल्ट में स्थित, जो प्रारंभिक सौर मंडल के बर्फीले अवशेषों का क्षेत्र है।
  • आकार: इसका व्यास लगभग 310 मील (500 किमी.) है, जो दो सबसे बड़े ट्रांस-नेप्च्यूनियन पिंडों – प्लूटो (व्यास 2,370 किमी.) और एरिस (व्यास 2,326 किमी.) से काफी छोटा है।
    • प्लूटो और एरिस को बौने ग्रह के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • कक्षीय अवधि: सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 247 वर्ष लगते हैं।
  • संरचना: संभवतः जल बर्फ, चट्टानों और कार्बनिक पदार्थों से युक्त सामग्री द्वारा निर्मित है।

मुख्य निष्कर्ष

  • वायुमंडल की उपस्थिति: वैज्ञानिकों ने (612533) 2002 XV93 के आसपास एक अत्यंत विरल वायुमंडल का पता लगाया।
  • संभावित वायुमंडलीय संरचना: वायुमंडल में मेथेन, नाइट्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड हो सकते हैं।
  • वायुमंडलीय घनत्व: पृथ्वी के वायुमंडल से लगभग 5-10 मिलियन गुना विरल।
    • प्लूटो के वायुमंडल से लगभग 50-100 गुना विरल।

वातावरण के संभावित कारण

  • क्रायोवोलकैनिज्म: आंतरिक गतिविधि के कारण सतह पर मौजूद दरारों से गैसें निकल सकती हैं।
    • पृथ्वी के ज्वालामुखियों के विपरीत, ये “ठंडे ज्वालामुखी” हैं जिनमें बर्फ और वाष्पशील गैसें शामिल होती हैं।
  • टकराव द्वारा  निर्मित वायुमंडल: किसी अन्य वस्तु से हाल ही में हुए टकराव के कारण अस्थायी रूप से गैसें निकल सकती हैं।
    • वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि भविष्य के अवलोकन से यह निर्धारित किया जा सकता है कि वायुमंडल स्थायी है या अल्पकालिक।

वायुमंडल की खोज का तरीका

  • तारकीय ग्रहण: यह एक खगोलीय तकनीक है, जिसमें एक खगोलीय पिंड किसी दूर के तारे के सामने से गुजरता है, जिससे अस्थायी रूप से उसका प्रकाश अवरुद्ध हो जाता है।
    • तारे के प्रकाश में होने वाले परिवर्तनों का विश्लेषण करके, वैज्ञानिक पिंड के आकार, आकृति, वलय या वायुमंडल जैसे गुणों का निर्धारण कर सकते हैं।

इस खोज का महत्त्व 

  • पूर्व धारणा को चुनौती: यह इस मान्यता को चुनौती देता है कि कुइपर बेल्ट के छोटे पिंड पूरी तरह से निष्क्रिय हैं।
  • गतिशील प्रक्रियाओं के प्रमाण: यह दर्शाता है कि दूरस्थ बर्फीले ग्रहों में भी भू-वैज्ञानिक या वायुमंडलीय गतिविधियाँ घटित हो सकती है।
  • वैज्ञानिक महत्त्व: यह कम गुरुत्वाकर्षण वाले वातावरण में वायुमंडलीय स्थिरता और बाह्य सौरमंडल के विकास की समझ को बेहतर बनाता है।

एडवांस्ड न्यूक्लियर एनर्जी फॉर एनरिच्ड लाइफ (ANEEL) फ्यूल

अमेरिका स्थित क्लीन कोर थोरियम एनर्जी ने इडाहो नेशनल लैबोरेटरी में अपने ‘एडवांस्ड न्यूक्लियर एनर्जी फॉर एनरिच्ड लाइफ’ (ANEEL) फ्यूल का ‘हाई बर्नअप रेडिएशन’ पूरा कर लिया है।

एडवांस्ड न्यूक्लियर एनर्जी फॉर एनरिच्ड लाइफ (ANEEL) के बारे में

  • एनील एक थोरियम-आधारित परमाणु ईंधन है, जिसे ‘क्लीन कोर थोरियम एनर्जी’ द्वारा विकसित किया गया है।
  • नामकरण: इस ईंधन का नाम भारत के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख वास्तुकार अनिल काकोदकर के सम्मान में रखा गया है।
  • संरचना: यह थोरियम को ‘हाई-असे लो-एनरिच्ड यूरेनियम’ (HALEU) के साथ मिलाकर बनाया गया है, जिससे कुशल परमाणु अभिक्रियाएँ संभव होती हैं।
  • हाई-असे निम्न-संवर्द्धित यूरेनियम: यह यूरेनियम ईंधन का एक प्रकार है, जिसमें लगभग 5–20% तक U-235 का संवर्द्धन होता है, जिससे उन्नत परमाणु रिएक्टरों की दक्षता बढ़ती है।
  • उच्च बर्नअप क्षमता: यह अत्यधिक उच्च ‘बर्नअप’ (~60+ गीगावॉट-दिन प्रति मीट्रिक टन यूरेनियम) प्राप्त करता है, जिससे पारंपरिक ईंधनों की तुलना में कहीं अधिक ऊर्जा निकाली जा सकती है।
  • लक्षित रिएक्टर: इसे दाबित भारी जल रिएक्टरों (PHWRs) के लिए प्रत्यक्ष उपयोग योग्य ईंधन के रूप में डिजाइन किया गया है, जिससे भारत के मौजूदा रिएक्टर बेड़े में न्यूनतम संशोधनों के साथ इसका उपयोग संभव है।
  • सुरक्षा एवं अपशिष्ट लाभ: इससे परमाणु अपशिष्ट में कमी, बेहतर सुरक्षा तथा परमाणु प्रसार-प्रतिरोध क्षमता में वृद्धि होती है।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह थोरियम के उपयोग और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देता है, विशेषकर भारत जैसे देशों के लिए जहाँ थोरियम के विशाल भंडार उपलब्ध हैं।

‘पाथफाइंडर’-भारत का पहला कक्षीय डेटा सेंटर उपग्रह (Pathfinder: India’s First Orbital Data Centre Satellite)

पिक्सेल, सर्वम् एआई के साथ मिलकर “पाथफाइंडर” नामक एक कक्षीय डेटा सेंटर उपग्रह का निर्माण कर रहा है।

पाथफाइंडर के बारे में 

  • पाथफाइंडर भारत का पहला कक्षीय डेटा सेंटर उपग्रह है, जिसे पिक्सेल द्वारा सर्वम् एआई के कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग से विकसित किया जा रहा है।
  • उद्देश्य: इसे पृथ्वी पर कच्चा डेटा भेजने के बजाय अंतरिक्ष में ही डेटा का प्रसंस्करण और विश्लेषण करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • प्रक्षेपण समय-सीमा: लगभग 200 किलोग्राम वजन वाला यह उपग्रह वर्ष 2026 के अंत तक प्रक्षेपित किए जाने की संभावना है।
  • महत्त्व: यह “AI उपग्रहों” की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जो वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराने और तीव्र निर्णय लेने में सहायता करेंगे।
    • डेटा सेंटर-स्तरीय GPU: कक्षा में ही उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रसंस्करण के लिए उच्च-प्रदर्शन GPU का उपयोग करता है।
    • ऑनबोर्ड कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रसंस्करण: यह भूमि-आधारित डेटा सेंटरों पर निर्भर हुए बिना वास्तविक समय में प्रशिक्षण और निष्कर्षण को संभव बनाता है।
    • हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग + कृत्रिम बुद्धिमत्ता: यह हाई-रिजॉल्यूशन हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसरों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ जोड़कर त्वरित डेटा विश्लेषण और अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
  • पाथफाइंडर बनाम पारंपरिक उपग्रह
    • डेटा प्रबंधन: पाथफाइंडर कक्षा में ही वास्तविक समय में डेटा का प्रसंस्करण करता है, जबकि पारंपरिक उपग्रह विश्लेषण के लिए डेटा पृथ्वी पर भेजते हैं, जिससे देरी होती है।
    • कार्यप्रणाली: पाथफाइंडर उपग्रह पर ही विश्लेषण, पैटर्न पहचान और अंतर्दृष्टि उत्पन्न कर सकता है, जबकि पारंपरिक उपग्रह मुख्यतः डेटा संग्रह और प्रसारण तक सीमित रहते हैं।
    • दक्षता एवं गति: पाथफाइंडर तीव्र निर्णयन और कम विलंबता को संभव बनाता है।

भगोड़ा आर्थिक अपराधियों (Fugitive Economic Offenders- FEOs)

प्रवर्तन निदेशालय ने 21 व्यक्तियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया है तथा 2,178 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियाँ जब्त की हैं।

भगोड़ा आर्थिक अपराधियों (FEO) के बारे में

  • भगोड़ा आर्थिक अपराधी वह व्यक्ति होता है, जो गंभीर आर्थिक अपराधों में अभियोजन से बचने के लिए भारत से भाग जाता है या वापस लौटने से इनकार करता है।
  • कानूनी आधार: भगोड़ा आर्थिक अपराधियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत घोषित किया जाता है।
  • सीमा: यह प्रावधान ₹100 करोड़ या उससे अधिक राशि से संबंधित अपराधों पर लागू होता है।
  • शर्त: इसके लिए किसी भारतीय न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी होना आवश्यक है।

भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018

  • उद्देश्य: यह अधिनियम आर्थिक अपराधियों को विदेश भागकर भारतीय कानून से बचने से रोकने तथा सार्वजनिक धन की वसूली सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
  • प्रयोज्यता: यह अधिनियम ₹100 करोड़ या उससे अधिक राशि से जुड़े आर्थिक अपराधों (अधिनियम में सूचीबद्ध अनुसूचित अपराधों) पर लागू होता है।
  • प्राधिकरण: भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के लिए मामलों को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा विशेष न्यायालय (धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत) में प्रस्तुत किया जाता है।
  • संपत्तियों की जब्ती: यह अधिनियम भारत और विदेश में स्थित संपत्तियों को, आपराधिक मुकदमे की पूर्णता के बिना भी, कुर्क और जब्त करने की अनुमति देता है।
  • दीवानी दावों पर रोक: किसी व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने के बाद उसे भारतीय न्यायालयों में दीवानी दावे दायर करने या उनका बचाव करने से रोका जा सकता है।
  • त्वरित प्रक्रिया: यह अधिनियम अपराधियों को शीघ्रता से भगोड़ा घोषित करने और उनकी संपत्तियाँ जब्त करने के लिए समयबद्ध प्रक्रिया प्रदान करता है।

इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) समिट

भारत नई दिल्ली में ‘’बिग कैट्स को बचाएँ, मानवता को बचाएँ, पारिस्थितिकी तंत्र को बचाएँ’ की थीम पर पहले इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) समिट की मेजबानी करेगा।

इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) के बारे में

  • शुरुआत: इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) एक अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जिसे अप्रैल 2023 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की 50वीं वर्षगाँठ के अवसर पर शुरू किया गया था।
  • मुख्यालय: भारत।
  • केंद्रित प्रजातियाँ: IBCA सात ‘बिग कैट्स’ (Big Cats) के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करता है-शेर, बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा।
  • उद्देश्य: यह वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए 95 ‘रेंज’ (जिन देशों में ये जानवर पाए जाते हैं) और ‘नॉन-रेंज’ (जिन देशों में ये जानवर नहीं पाए जाते) देशों, संरक्षण भागीदारों, वैज्ञानिक संगठनों और निगमों को एक साथ लाता है।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: इस अलायंस का कार्यान्वयन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’ (NTCA) के माध्यम से किया जाता है।
  • संस्थापक सदस्य: भारत, आर्मेनिया, बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, मिस्र, इथियोपिया, इक्वाडोर, केन्या, मलेशिया, मंगोलिया, नेपाल, नाइजीरिया, पेरू, सूरीनाम और युगांडा।
  • सदस्यता: इसकी सदस्यता संयुक्त राष्ट्र (UN) के सभी सदस्य देशों के लिए खुली है, जिनमें शामिल हैं:
    • वे देश जहाँ बिग कैट्स प्राकृतिक रूप से पाई जाती हैं।
    • वे देश जो बिग कैट्स के वैश्विक संरक्षण में सहयोग करने के इच्छुक हैं।
  • संस्थागत सहयोग और वित्तपोषण: भारत ने वर्ष 2023–2028 की अवधि के लिए ₹150 करोड़ की राशि देने का वादा किया है, जिसका उपयोग इन कार्यों के लिए किया जाएगा: एक कोष का निर्माण, बुनियादी ढाँचे का विकास और IBCA के आवर्ती परिचालन व्यय।

पुलित्जर पुरस्कार, 2026 Pulitzer Prize 2026

दो भारतीय पत्रकारों ने साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल निगरानी को उजागर करना करने के लिए प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार जीता है।

पुलित्जर पुरस्कार, 2026 के बारे में

  • विजेता: आनंद आर.के. और सुपना शर्मा (नैटली ओबिको पियर्सन के साथ) ने भारत में साइबर अपराध को उजागर करने के लिए ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री’ श्रेणी में जीत हासिल की।
  • एक और विजेता: हनोई स्थित अनिरुद्ध घोषाल ने US बॉर्डर पेट्रोल द्वारा बड़े पैमाने पर निगरानी के लिए प्रयोग किए जाने वाले गोपनीय उपकरणों की जाँच करने के लिए ‘अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग’ श्रेणी में यह पुरस्कार प्राप्त किया हासिल की।
  • मुख्य जाँच: इस रिपोर्ट में US और चीन से जुड़ी एजेंसियों सहित अन्य एजेंसियों द्वारा बड़े पैमाने पर निगरानी उपकरणों के उपयोग का खुलासा किया गया।
    • पुलित्जर पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1917 में जोसेफ पुलित्जर की वसीयत के माध्यम से पत्रकारिता और कला के क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
  • प्रशासक संस्था: यह पुरस्कार हर वर्ष कोलंबिया यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म द्वारा एक स्वतंत्र पुलित्जर पुरस्कार बोर्ड की सिफारिश पर प्रदान किया जाता है।
  • श्रेणियाँ: इन पुरस्कारों में पत्रकारिता (जन सेवा, रिपोर्टिंग, आदि), साहित्य (कथा साहित्य, इतिहास, जीवनी, कविता), नाटक और संगीत रचना शामिल हैं।

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (Electronic Gold Receipts) 

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) ने भारत के सोने के बाजार को आधुनिक बनाने और औपचारिक रूप देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) लॉन्च की हैं।

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) (EGRs) क्या हैं?

  • इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा विनियमित डिजिटल परिसंपत्तियाँ हैं, जो भौतिक सोने के स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करती हैं तथा शेयरों और बॉण्डों की तरह एक्सचेंजों पर कारोबार योग्य होती हैं।
  • व्यापार तंत्र: भौतिक सोने को सेबी-मान्यता प्राप्त स्टोर में रखा जाता है, जिसकी पुष्टि एक वॉल्ट प्रबंधक द्वारा की जाती है। इसके बाद समतुल्य इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) डीमैट खातों में जारी की जाती हैं और उनका व्यापार किया जाता है।
  • सोने के मानक: ये उन शुद्धता मानकों वाले सोने द्वारा समर्थित होती हैं, जो लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन के “गुड डिलीवरी” अथवा भारत “गुड डिलीवरी मानक” को पूरा करते हैं।
  • मोचन में लचीलापन: इन्हें डिजिटल रूप में रखा जा सकता है या छोटे मूल्यवर्ग में भौतिक सोने में परिवर्तित किया जा सकता है, जो सार्वभौम स्वर्ण बॉण्ड और स्वर्ण विनिमय कारोबार निधि से भिन्न है।
  • कराधान: इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) के व्यापार पर वस्तु एवं सेवा कर नहीं लगता; केवल भौतिक सोना निकालने पर 3% वस्तु एवं सेवा कर लागू होता है।
  • जमानत उपयोगिता: इन्हें ऋण के लिए जमानत के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जिससे तरलता और वित्तीय उपयोगिता बढ़ती है।
  • इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) व्यापार योग्य डिजिटल सोना प्रदान करती हैं, जिनमें भौतिक डिलीवरी का विकल्प भी होता है; जबकि स्वर्ण विनिमय कारोबार निधि में छोटे निवेशकों को भौतिक सोने तक पहुँच नहीं मिलती और सार्वभौम स्वर्ण बॉण्ड नकद-निपटान आधारित होते हैं, जिनमें भौतिक सोना उपलब्ध नहीं होता है।

विश्व प्रवासन रिपोर्ट, 2026

हाल ही में जारी विश्व प्रवासन रिपोर्ट, 2026 वैश्विक प्रवासन पैटर्न में भारत की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।

विश्व प्रवासन रिपोर्ट, 2026 के बारे में

  • जारीकर्ता: विश्व प्रवासन रिपोर्ट, अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (International Organization for Migration) का एक वार्षिक प्रमुख प्रकाशन है।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और आम जनता को दुनिया भर में प्रवासन के पैटर्न, चुनौतियों और अवसरों के बारे में जानकारी देना है।
  • विषय-वस्तु: इसमें प्रवासन के प्रवाह, प्रमुख गलियारों, शरणार्थियों की आवाजाही, प्रवासी समुदायों से जुड़े रुझानों और नीतिगत मुद्दों को शामिल किया गया है।

विश्व प्रवासन रिपोर्ट, 2026 के मुख्य अंश

  • वैश्विक प्रवासी संख्या: वर्ष 2024 में लगभग 30.4 करोड़ लोग अपने जन्म के देश से बाहर रह रहे थे (विश्व की जनसंख्या का लगभग 3.7%)।
  • शीर्ष प्रवासन गलियारे 
    • मैक्सिको संयुक्त राज्य अमेरिका अभी भी सबसे बड़ा प्रवासन गलियारा बना हुआ है।
    • भारत-यूएई (5वाँ) और भारत-यू.एस. (छठा) वैश्विक स्तर पर शीर्ष गलियारों में शामिल हैं।
  • क्षेत्रीय रुझान: एशिया से होने वाला प्रवासन मुख्य रूप से श्रम-आधारित है, विशेष रूप से खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर।
  • लैंगिक स्वरूप: एशिया में प्रवासन अक्सर पुरुष-प्रधान होता है, विशेषकर श्रम प्रवासन गलियारों में।
  • भारतीय प्रवासियों की संख्या: संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 32 लाख भारतीय रहते हैं (यह दूसरा सबसे बड़ा विदेशी मूल का समूह है)।
  • खाड़ी देशों में प्रवासन: संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में प्रवासियों की हिस्सेदारी बहुत अधिक (जनसंख्या का लगभग 74%) है, जिसमें श्रम प्रवासियों का वर्चस्व है।
  • प्रवासन की प्रकृति: भारत का प्रवासन दोहरी प्रकृति का है—खाड़ी देशों में श्रम प्रवासन और अमेरिका में कुशल प्रवासन (छात्र, पेशेवर)।
  • जोखिम और चुनौतियाँ: प्रवासन मार्गों पर प्रत्येक वर्ष हजारों प्रवासियों की मृत्यु हो जाती है या वे लापता हो जाते हैं, जो मानवीय चिंताओं को उजागर करता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM)

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन प्रवासन पर अग्रणी अंतर-सरकारी एजेंसी है, जो सुरक्षित, व्यवस्थित और मानवीय प्रवासन सुनिश्चित करने के लिए काम करती है।

  • स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 1951 में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में जनसंख्या विस्थापन के प्रबंधन के लिए की गई थी।
  • संयुक्त राष्ट्र (UN) स्थिति: यह वर्ष 2016 में संयुक्त राष्ट्र का एक संबंधित संगठन बन गया।
  • सदस्यता: इसके 174 सदस्य देश हैं, जिनमें भारत भी शामिल है।
  • मुख्यालय: जिनेवा।

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