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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal May 19, 2026 03:25 6 0

होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री केबल को खतरा

हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आस-पास समुद्र तल पर बिछी इंटरनेट केबलों को लेकर बढ़ता तनाव, भारत के इंटरनेट, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए मौजूद जोखिमों को उजागर करता है।

समुद्र के नीचे बिछी केबल क्या हैं?

  • समुद्री केबल (Undersea cables), जिन्हें सबमरीन केबल (submarine cables) भी कहा जाता है, फाइबर-ऑप्टिक संचार केबल होती हैं, जो देशों और महाद्वीपों के बीच इंटरनेट और दूरसंचार डेटा को प्रसारित करने के लिए समुद्र तल पर बिछाई जाती हैं।
  • महत्त्व: ये वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी का आधार हैं और 95% से अधिक इंटरनेशनल इंटरनेट ट्रैफिक का वहन करती हैं।
    • क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑनलाइन बैंकिंग, शेयर बाजार, वीडियो स्ट्रीमिंग और अंतरराष्ट्रीय संचार जैसी आधुनिक वैश्विक सेवाएँ काफी सीमा तक समुद्री केबलों पर निर्भर हैं।
  • कार्यप्रणाली: ये केबल बहुत तेज गति और कम विलंबता (Low latency) पर अत्यधिक पतले फाइबर-ऑप्टिक तारों (Strands) के माध्यम से प्रकाश संकेतों का उपयोग करके डेटा प्रसारित करते हैं।
    • सबमरीन केबल दुनिया भर के समुद्र तटों पर स्थित केबल लैंडिंग स्टेशनों को जोड़ते हैं।
    • उपग्रहों की तुलना में, सबमरीन केबल तेजी से, सस्ते और उच्च क्षमता वाले डेटा प्रसारण की सुविधा प्रदान करते हैं।
  • जोखिम: समुद्री केबल भूकंप, जहाजों के लंगर (Anchors), मत्स्यन गतिविधियों, तोड़फोड़ या भू-राजनीतिक संघर्षों से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर इंटरनेट सेवाएँ प्रभावित हो सकती हैं।

वैश्विक इंटरनेट के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य का महत्त्व

  • डिजिटल कनेक्टिविटी मार्ग: भारत, यूरोप और पश्चिम एशिया को जोड़ने वाले कई महत्त्वपूर्ण सबमरीन इंटरनेट केबल होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र से होकर गुजरते हैं।
  • महत्त्वपूर्ण केबल प्रणाली: फाल्कन, गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल (GBI) और टाटा-TGN गल्फ जैसे प्रमुख केबल नेटवर्क इसी मार्ग से गुजरते हैं।
  • भू-राजनीतिक तनावों के प्रति संवेदनशीलता: होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का संघर्ष, तोड़फोड़ या प्रतिबंध वैश्विक स्तर पर इंटरनेट सेवाओं और डिजिटल बुनियादी ढाँचे को बाधित कर सकता है।

भारत की रणनीतिक चिंताएँ

  • अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट और डेटा कनेक्टिविटी के लिए भारत पश्चिम एशिया से गुजरने वाले सबमरीन केबल नेटवर्क पर काफी हद तक निर्भर है।
  • डिजिटल अवसंरचना जोखिम: महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर भू-राजनीतिक तनाव, संघर्ष से भारत की इंटरनेट, क्लाउड और वित्तीय सेवाएँ बाधित हो सकती हैं।

मिलियन माइंड्स टेक पार्क से ग्रेमी सिटी कैंपस

केंद्रीय गृह मंत्री ने अहमदाबाद में नवनिर्मित मिलियन माइंड्स टेक पार्क और ग्रेमी सिटी कैंपस का उद्घाटन किया।

मिलियन माइंड्स टेक पार्क के बारे में

  • उद्देश्य: इस टेक पार्क का लक्ष्य उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचार, उद्यमिता और वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के लिए एक विश्व स्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
  • एकीकृत विकास मॉडल: इस परियोजना में वाणिज्यिक स्थान, आवासीय क्षेत्र, मॉल और होटल शामिल हैं, जो एक एकीकृत तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
  • केंद्रित क्षेत्र: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, स्वचालन, रक्षा प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  • निवेश और विस्तार: यह परियोजना 65 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही है और अगले पाँच वर्षों में इससे 63,000 से अधिक उच्च-मूल्य वाली नौकरियाँ सृजित होने की उम्मीद है।

ग्रेमी सिटी कैम्पस (GREMI City Campus) 

  • GREMI (गणेश रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट) की स्थापना रियल एस्टेट और शहरी नियोजन क्षेत्रों में आधुनिक सोच, नेतृत्व और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए की गई है।
  • महत्त्व: संस्थान का उद्देश्य शहरी नियोजन, पर्यावरण प्रबंधन और सतत् रियल एस्टेट विकास में विशेषज्ञता को मजबूत करना है।

मिलियन माइंड्स टेक पार्क और GREMI सिटी कैंपस का महत्त्व

  • आर्थिक महत्त्व: इन परियोजनाओं का उद्देश्य अहमदाबाद को बंगलूरू, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी केंद्रों के समकक्ष स्थापित करना है।
  • रोजगार और नवाचार: इन पहलों से उच्च कौशल रोजगार, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और स्टार्टअप-आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
  • राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी मिशन: ये परियोजनाएँ उन्नत प्रौद्योगिकियों और ज्ञान-आधारित उद्योगों के लिए वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में भारत के व्यापक प्रयासों के अनुरूप हैं।

डी. आर. कांगो में इबोला का प्रकोप

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया है।

  • वायरस का प्रकार: यह प्रकोप बंडीबुग्यो इबोलावायरस के कारण हुआ है, जिसके लिए वर्तमान में कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है।

इबोला वायरस रोग क्या है?

  • इबोला एक गंभीर जूनोटिक वायरल रोग है, जो जानवरों से मनुष्यों में फैलती है और बाद में मनुष्यों के बीच भी फैल सकती है।
  • पहली बार खोज: इबोला की पहचान सबसे पहले वर्ष 1976 में वर्तमान कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला नदी के पास हुई थी।
  • कारण: यह फिलोविरिडे कुल के ऑर्थोएबोलावायरस वंश से संबंधित वायरस के कारण होता है।
  • लक्षण: लक्षणों में बुखार, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गंभीर मामलों में रक्तस्राव शामिल हैं।
  • संचरण: इबोला संक्रमित रक्त, शरीर के तरल पदार्थ, दूषित पदार्थों या संक्रमित जीवों जैसे फल खाने वाले चमगादड़ और प्राइमेट के सीधे संपर्क से फैलता है।
  • ऊष्मायन अवधि: लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 2 से 21 दिनों के बीच दिखाई देते हैं।
  • टीकाकरण की स्थिति: जैरे स्ट्रेन जैसे कुछ इबोला स्ट्रेन के लिए टीके उपलब्ध हैं, लेकिन बंडीबुग्यो इबोला जैसे सभी प्रकारों के लिए नहीं हैं।

अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल

  • अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR), 2005 के तहत घोषित एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य घटना है।
  • उद्देश्य: यह तब घोषित किया जाता है, जब कोई प्रकोप या स्वास्थ्य घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसार का जोखिम उत्पन्न करती है और समन्वित वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता होती है।
  • अधिकार: यह घोषणा विशेषज्ञों की एक आपातकालीन समिति की सिफारिशों के आधार पर WHO के महानिदेशक द्वारा की जाती है।

AMCA प्रोग्राम 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले के पुट्टपर्थी में एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम सुविधा की आधारशिला रखी।

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट  (Advanced Medium Combat Aircraft- AMCA) के बारे में

  • AMCA भारत का स्वदेशी पाँचवीं पीढ़ी का मध्यम-वजन वाला स्टील्थ मल्टीरोल लड़ाकू विमान है।
  • इसका विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अंतर्गत वैमानिकी विकास एजेंसी द्वारा भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए किया जा रहा है।
  • AMCA विमान की विशेषताएं: इस लड़ाकू विमान में स्टील्थ तकनीक, दो इंजनों से संबद्ध सुपरक्रूज क्षमता और उन्नत एवियोनिक्स होंगे।
  • प्रकार
    • AMCA Mk1: इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका से आयातित GE-F414 इंजन लगे होंगे।
    • AMCA Mk2: इसमें स्वदेशी इंजन लगाने की योजना है, जो वर्तमान में विकास के अधीन हैं।

सुविधा के बारे में मुख्य बिंदु

  • AMCA कार्यक्रम सुविधा: यह सुविधा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अंतर्गत वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA) द्वारा भारत के स्वदेशी पाँचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए विकसित की जा रही है।
    • यह लगभग 650 एकड़ में फैली होगी और इसमें अनुमानित ₹15,803 करोड़ का निवेश होगा।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह परिसर विमान एकीकरण, परीक्षण, सत्यापन और प्रामाणीकरण में सहयोग प्रदान करेगा।
    • यह आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा।
  • आर्थिक प्रभाव: इस परियोजना से लगभग 7,500 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
    • इस कार्यक्रम से जुड़े सहायक उद्योग लगभग ₹1 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित कर सकते हैं।
  • अतिरिक्त रक्षा परियोजनाएँ: चार अतिरिक्त रक्षा परियोजनाओं और आठ ड्रोन परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी जाएगी।
    • इन परियोजनाओं से आंध्र प्रदेश में ₹4,145 करोड़ का निवेश आने और 6,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की आशा है।

महिला सशक्तीकरण समिति (2026-27)

लोकसभा अध्यक्ष ने वर्ष 2026-27 के लिए महिला सशक्तीकरण समिति का गठन किया।

महिला सशक्तीकरण समिति के बारे में

  • स्थापना: इसका गठन सर्वप्रथम 29 अप्रैल, 1997 को 11वीं लोकसभा के दौरान हुआ था।
  • संरचना: समिति में 30 सदस्य होते हैं।
    • 20 सदस्यों को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा मनोनीत किया जाता है।
    • 10 सदस्यों को राज्यसभा अध्यक्ष द्वारा मनोनीत किया जाता है।
  • कार्यकाल: समिति का कार्यकाल एक वर्ष से अधिक नहीं होता है और इसका पुनर्गठन प्रत्येक वर्ष किया जाता है।
  • कार्य: समिति के सदस्य दलीय संबद्धता से परे सामूहिक रूप से महिला सशक्तीकरण के लिए कार्य करते हैं।
    • समिति महिलाओं के कल्याण, विकास और सशक्तीकरण से संबंधित सरकारी नीतियों, कार्यक्रमों और उपायों की समीक्षा करती है।
  • महत्त्व: यह लैंगिक न्याय, महिला कल्याण और प्रभावी नीति कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एक संसदीय तंत्र के रूप में कार्य करती है।

वर्ष 2026-27 के लिए हालिया समिति के बारे में मुख्य बिंदु 

  • अध्यक्ष: भाजपा सांसद दग्गुबाती पुरंदेश्वरी को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
  • समिति की संरचना: समिति में 28 सदस्य शामिल हैं, जिनमें 18 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से हैं।
  • लोकसभा के सदस्य: प्रमुख सदस्यों में हेमा मालिनी, हरसिमरत कौर बादल और इकरा चौधरी शामिल हैं।
  • राज्यसभा के सदस्य: सदस्यों में सुधा मूर्ति, पीटी उषा और स्वाति मालीवाल शामिल हैं।

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