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नवीकरणीय ऊर्जा का भंडारण

Lokesh Pal May 19, 2026 03:19 5 0

संदर्भ

भारत तेजी से अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार कर रहा है, लेकिन ऊर्जा भंडारण के अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे ग्रिड स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहे हैं।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा की स्थिति

  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि: भारत की लगभग 532 गीगावाट (GW) की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 53% (283 गीगावाट) है।
  • सौर ऊर्जा का प्रभुत्व: भारत के नवीकरणीय ऊर्जा मिश्रण में सौर ऊर्जा 150 गीगावाट से अधिक का योगदान देती है, जो इसे सबसे बड़ा घटक बनाती है।
  • गैर-जीवाश्म ईंधन विस्तार का लक्ष्य: भारत अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं के तहत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है।
  • ऊर्जा संक्रमण का दीर्घकालिक दृष्टिकोण: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) का अनुमान है कि वर्ष 2035-36 तक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता बढ़कर लगभग 786 गीगावाट हो जाएगी।
  • भंडारण प्रणालियों का बढ़ता महत्त्व: भारत बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के माध्यम से वर्ष 2035-36 तक कुल 174 GW/888 GWh की ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने की योजना बना रहा है।

ऊर्जा भंडारण क्या है? 

  • ऊर्जा भंडारण से तात्पर्य उन तकनीकों से है, जो नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न अतिरिक्त विद्युत को संगृहीत करती हैं और ऊर्जा की माँग उत्पादन से अधिक होने पर इसे जारी करती हैं।
  • नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण में इसकी आवश्यकता: सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत सतत कार्य नहीं करते हैं क्योंकि इनका उत्पादन सूर्य के प्रकाश और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है।

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अन्य ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियाँ

  • कंसंट्रेटेड सोलर थर्मल स्टोरेज सिस्टम (Concentrated Solar Thermal Storage Systems): ये प्रणालियाँ सूर्य की रोशनी को एक रिसीवर (प्राप्तकर्ता) पर केंद्रित करने के लिए दर्पणों का उपयोग करती हैं, जहाँ बाद में विद्युत उत्पादन के लिए पिघले हुए लवण (Molten salt) जैसे पदार्थों में ऊष्मा को संचित किया जाता है।
  • कंप्रेस्ड-एयर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (Compressed-Air Energy Storage Systems): ये प्रणालियाँ भूमिगत गुफाओं या टैंकों में वायु को संपीडित और संगृहीत करने के लिए अतिरिक्त विद्युत का उपयोग करती हैं, जिसे बाद में टरबाइन के माध्यम से विद्युत उत्पन्न करने के लिए उत्सर्जित किया जाता है।
  • फ्लाईव्हील एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (Flywheel Energy Storage Systems): यह रोटर्स (घूर्णक) को बहुत तेज गति से घुमाकर विद्युत को घूर्णन ऊर्जा (Rotational Energy) के रूप में संगृहीत करता है और ग्रिड स्थिरता के लिए तेजी से विद्युत की आपूर्ति प्रदान करता है।
  • ग्रेविटी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (Gravity Energy Storage Systems): ये प्रणालियाँ भारी वस्तुओं को उठाने के लिए विद्युत का उपयोग करती हैं और जब वे भारी वस्तुएँ जनरेटर के माध्यम से नीचे आती हैं, तो विद्युत उत्पन्न करती हैं।

ऊर्जा भंडारण के प्रकार

  • बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ (Battery Energy Storage Systems- BESS)
    • ये ऐसी तकनीकें हैं, जो विद्युत को रासायनिक रूप से संगृहीत करती हैं और विद्युत की माँग आपूर्ति से अधिक होने पर इसे जारी करती हैं।
    • विशेषताएँ 
      • लीथियम-आयन बैटरी: उच्च दक्षता और घटती लागत के कारण लीथियम-आयन बैटरी, विशेष रूप से लीथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरी, सबसे व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली तकनीक है।
      • त्वरित प्रतिक्रिया समय: बैटरी प्रणालियाँ त्वरित प्रतिक्रिया समय प्रदान करती हैं और कम अवधि के ऊर्जा भंडारण का समर्थन करती हैं।
      • बहुस्तरीय तैनाती: इन्हें ग्रिड-स्तर, औद्योगिक और घरेलू स्तर पर प्रयोग किया जा सकता है।
      • कम भूमि की आवश्यकता: बड़ी जल-आधारित भंडारण प्रणालियों की तुलना में बैटरी प्रणालियों के लिए अपेक्षाकृत कम भूमि की आवश्यकता होती है।
    • अनुप्रयोग
      • नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण: बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ सौर और पवन जैसी निरंतर न प्राप्त होने वाली नवीकरणीय ऊर्जा को विद्युत ग्रिड में एकीकृत करने में मदद करती हैं।
      • ग्रिड स्थिरता: ये ग्रिड स्थिरता, फ्रीक्वेंसी रेगुलेशन (आवृत्ति नियंत्रण) और पीक लोड मैनेजमेंट (अधिकतम माँग के समय प्रबंधन) का समर्थन करती हैं।
      • EV और बैकअप: इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और बैकअप पॉवर सप्लाई सिस्टम के लिए किया जाता है।
      • निरंतर आपूर्ति: ये वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध रूप से नवीकरणीय ऊर्जा की आपूर्ति को सक्षम बनाती हैं।
  • पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PHSPs)
    • ये परियोजनाएँ अतिरिक्त विद्युत का उपयोग करके जल को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय में पंप करके ऊर्जा का भंडारण करती हैं।
    • विशेषताएँ
      • उच्च माँग के दौरान उत्पादन: अत्यधिक माँग के दौरान, संगृहीत जल को टरबाइन के माध्यम से छोड़कर विद्युत उत्पन्न की जाती है।
      • दीर्घकालिक भंडारण: पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज लंबी अवधि और बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण के लिए उपयुक्त है।
      • लंबा परिचालन काल: इन परियोजनाओं का परिचालन काल अधिक होता है और स्थापना के बाद परिचालन लागत कम होती है।
      • उच्च भंडारण क्षमता: ये उच्च भंडारण क्षमता प्रदान करती हैं और ग्रिड की विश्वसनीयता का समर्थन करती है।
    • अनुप्रयोग
      • उतार-चढ़ाव का संतुलन: पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज प्रोजेक्ट्स नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में मदद करती हैं।
      • बड़े पैमाने पर भंडारण: ये राष्ट्रीय ग्रिड और औद्योगिक माँग के लिए बड़े पैमाने पर विद्युत भंडारण का समर्थन करती हैं।
      • ऊर्जा सुरक्षा में सुधार: ये अत्यधिक खपत वाले समय (Peak Consumption Periods) के दौरान विद्युत की उपलब्धता सुनिश्चित करके ऊर्जा सुरक्षा में सुधार करती हैं।
      • जलवायु लक्ष्यों में भूमिका: ये भारत के नवीकरणीय ऊर्जा और डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने के) लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के भंडारण से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ

  • नवीकरणीय ऊर्जा की अनिश्चितता: सूर्य अस्त होने के बाद सौर ऊर्जा का उत्पादन बंद हो जाता है, जबकि वायु से मिलने वाली ऊर्जा, मौसम के हिसाब से घटती-बढ़ती रहती है, जिससे माँग और आपूर्ति में असमानता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
  • ग्रिड स्थिरता से जुड़ी चिंताएँ: भंडारण की क्षमता कम होने से ग्रिड में अस्थिरता, विद्युत की कमी और माँग के चरम समय में नवीकरणीय ऊर्जा में कटौती का खतरा बढ़ जाता है।
  • मौजूदा भंडारण क्षमता का कम होना: भारत के पास अभी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की क्षमता लगभग 0.27 GW और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज की क्षमता लगभग 7.2 GW ही है।
    • ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का वैश्विक स्तर पर विस्तार तेजी से हो रहा है; अनुमान है कि बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की कुल स्थापित क्षमता लगभग 270 GW है और वर्ष 2025 में ही इसमें 108 GW की बढोतरी होने की उम्मीद जताई गई थी।
    • ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को स्थापित करने के मामले में चीन दुनिया में सबसे आगे है; नए BESS (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) में से लगभग 60% और PHSP (पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज) क्षमता में से लगभग 66 GW चीन में ही स्थापित किया गया है।
  • आयातित बैटरी सेल पर निर्भरता: भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 75-80% लीथियम-आयन बैटरी सेल का आयात करता है, जिससे वह भू-राजनीतिक जोखिमों और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
  • वित्तीय और बुनियादी ढाँचे से जुड़ी अधिक लागतें: बड़े पैमाने पर भंडारण प्रणालियों को स्थापित करने के लिए भारी निवेश, उन्नत तकनीक और विद्युत के पारेषण (ट्रांसमिशन) से जुड़े बुनियादी ढाँचे को बेहतर बनाने की आवश्यकता होती है।
  • लंबे समय तक भंडारण की सीमित उपलब्धता: भारत के पास उद्योगों और शहरी केंद्रों को चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक, लंबे समय तक ऊर्जा भंडारण करने वाली प्रणालियों की कमी है।

आगे की राह

  • घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार करना: आयात निर्भरता को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा में सुधार के लिए भारत को PLI जैसी योजनाओं के तहत स्वदेशी बैटरी विनिर्माण को मजबूत करना चाहिए।
  • पंप्ड हाइड्रो और बैटरी के प्रयोग में तेजी लाना: बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का तेजी से कार्यान्वयन आवश्यक है।
  • ग्रिड आधुनिकीकरण और नवाचार को बढ़ावा देना: कुशल ऊर्जा प्रबंधन के लिए स्मार्ट ग्रिड, उन्नत पूर्वानुमान प्रणाली (Advanced Forecasting Systems) और विविध भंडारण प्रौद्योगिकियों को विकसित किया जाना चाहिए।
  • सार्वजनिक-निजी निवेश को प्रोत्साहित करना: स्थिर नीतिगत ढाँचे और वित्तीय प्रोत्साहन ऊर्जा भंडारण बुनियादी ढाँचे तथा अनुसंधान में निजी निवेश को आकर्षित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

ग्रिड की स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की सफलता सुनिश्चित करने के लिए उच्च क्षमता आधारित ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का विकास अत्यंत आवश्यक है।

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