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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal May 21, 2026 05:07 11 0

SHE-MARTs पहल

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों और विपणन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए ‘शी-मार्ट्स’ (SHE-MARTs) को संचालित करने के उद्देश्य से भुवनेश्वर, ओडिशा में एक परामर्श बैठक आयोजित की।

शी-मार्ट्स (SHE-MARTs) के बारे में

  • पूरा नाम: SHE-MART का तात्पर्य ‘सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर्स – मार्केटिंग एवेन्यूज फॉर रूरल ट्रांसफॉर्मेशन’ (Self Help Entrepreneurs – Marketing Avenues for Rural Transformation) है।
  • घोषणा: इसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी।
  • नोडल मंत्रालय: यह पहल ग्रामीण विकास मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत विकसित की जा रही है।
  • उद्देश्य: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए उद्यम विकास, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुँच में सुधार करने के लिए महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण विपणन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना।

शी-मार्ट्स की प्रमुख विशेषताएँ

  • सामुदायिक स्वामित्व वाले आउटलेट: शी-मार्ट्स क्लस्टर स्तर के संघों (CLFs) के माध्यम से महिला समूहों के स्वामित्व और प्रबंधन वाले खुदरा (रिटेल) आउटलेट के रूप में कार्य करेंगे।
  • प्रत्यक्ष बाजार पहुँच: इस पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बिना किसी बिचौलियों के सीधे उपभोक्ताओं को उत्पाद बेचने के लिए संरचित खुदरा मंच प्रदान करना है।
  • स्थायी बुनियादी ढाँचा: यह योजना स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए मूल्य-वर्द्धन सहायता के साथ-साथ स्थायी खुदरा और एकत्रीकरण केंद्र स्थापित करेगी।
  • लखपति दीदी मिशन: यह पहल वर्ष 2029 तक 3 करोड़ अतिरिक्त “लखपति दीदी” बनाने के सरकार के लक्ष्य का समर्थन करती है।
  • अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण: उम्मीद है कि शी-मार्ट्स महिला-केंद्रित बुनियादी ढाँचे और बाजार सहायता प्रणालियों के लिए VB-GRAM-G जैसी पहलों के साथ सामंजस्य स्थापित करेंगे।

महत्त्व: शी-मार्ट्स का उद्देश्य महिला उद्यमिता, ग्रामीण आय, वित्तीय समावेशन और टिकाऊ ग्रामीण बाजार प्रणालियों को मजबूत करना है।

विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा के लिए कीमती धातुओं के आयात पर रोक

भारत सरकार ने रुपये, विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटे (CAD) पर दबाव को कम करने के लिए सोने और चाँदी के आयात को रोकने के लिए कई उपाय किए हैं।

मुख्य सरकारी उपाय

  • चाँदी का आयात: सरकार ने घरेलू उपभोग के लिए चाँदी के आयात को “प्रतिबंधित” श्रेणी में डाल दिया है, जिसके लिए पहले सरकारी मंजूरी की आवश्यकता होगी।
  • सीमा शुल्क में वृद्धि: सोने और चाँदी पर सीमा शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया, जबकि प्लैटिनम पर शुल्क 6.4% से बढ़ाकर 15.4% कर दिया गया।
  • सोने के आयात पर सीमा: शुल्क मुक्त आयात सुविधाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक प्रमुख निर्यात योजना के तहत सोने के आयात पर 100 किलोग्राम की मात्रात्मक सीमा लगाई गई थी।
  • छूट: आभूषण निर्यात के लिए चाँदी का आयात, 100% निर्यात-उन्मुख इकाइयाँ (EOUs) और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) में स्थित इकाइयाँ अप्रतिबंधित रहेंगी।

भारत ये कदम क्यों उठा रहा है?

  • कीमती धातुओं के आयात में वृद्धि: वर्ष 2025-26 में भारत का चाँदी का आयात 150% बढ़कर 12.05 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि सोने का आयात 24% बढ़कर 71.98 बिलियन डॉलर हो गया।
  • उच्च कीमतें: इस वर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चाँदी की कीमतें 74% और सोने की कीमतें 30% बढ़ीं, जिससे आयात की मात्रा कम होने के बावजूद भारत का आयात बिल बढ़ गया।
  • विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव: पश्चिम एशिया संकट के बीच कथित तौर पर 10 हफ्तों के भीतर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 32 बिलियन डॉलर की गिरावट आई।
  • रुपये का अवमूल्यन (मूल्यह्रास): कमजोर होते रुपये ने आयात की लागत और बाहरी क्षेत्र के दबावों को और बढ़ा दिया है।

चाँदी के बारे में

चांदी एक प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली कीमती धातु है, जिसका प्रतीक ‘Ag’ और परमाणु संख्या 47 है।

चाँदी के गुण

  • चांदी एक नरम, सफेद, चमकदार कीमती धातु है, जिसमें उच्च आघातवर्धनीयता और तन्यता होती है।
  • इसमें सभी धातुओं में सबसे अधिक विद्युत और तापीय चालकता भी होती है।

चाँदी के उपयोग

  • अपनी उत्कृष्ट विद्युत चालकता के कारण चाँदी का व्यापक रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर पैनलों, बैटरी और विद्युत उपकरणों में उपयोग किया जाता है।
  • अपनी चमक, परावर्तकता और जीवाणुरोधी गुणों के कारण इसका उपयोग आभूषणों, सिक्कों, चिकित्सा, दर्पणों और रोगाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) उत्पादों में भी किया जाता है।

भारत में चाँदी

  • भंडार: भारत में प्राकृतिक चाँदी के बहुत सीमित भंडार हैं, जिसमें राजस्थान का प्रसिद्ध ‘भरक भंडार’ (Bharak deposit) एक दुर्लभ अपवाद है।
  • उप-उत्पाद के रूप में उपलब्धता: चाँदी मुख्य रूप से सीसा, जस्ता, ताँबे और सोने के अयस्कों, विशेष रूप से अर्जेंटीफेरस गैलेना (Argentiferous Galena) जैसे सल्फाइड अयस्कों के साथ पाई जाती है।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: भारत के चाँदी के भंडार में लगभग 86% हिस्सेदारी के साथ राजस्थान का स्थान है, जिसके बाद कर्नाटक, झारखंड और आंध्र प्रदेश का स्थान है।
  • वैश्विक स्थिति: पेरू के पास दुनिया का सबसे बड़ा चाँदी का भंडार है, जबकि मैक्सिको दुनिया का सबसे बड़ा चाँदी उत्पादक देश है।

अफस्लूटडाइक बाँध (Afsluitdijk Dam)

भारतीय प्रधानमंत्री ने डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन (Rob Jetten) के साथ नीदरलैंड में प्रतिष्ठित अफस्लूटडाइक (Afsluitdijk) बाँध का दौरा किया।

अफस्लूटडाइक (Afsluitdijk) के बारे में

  • संरचना: अफस्लूटडाइक नीदरलैंड में एक 32 किलोमीटर लंबा बाँध और सेतु-मार्ग (कॉजवे) है, जो उत्तरी सागर को इज्स्सेल्मीर (IJsselmeer) मीठे जल की झील से अलग करता है।
  • वैश्विक बेंचमार्क: इसे बाढ़ नियंत्रण और भूमि सुधार (Land Reclamation) में एक वैश्विक बेंचमार्क माना जाता है।
  • मीठे पानी का भंडारण: यह मीठे जल के भंडारण को भी सक्षम बनाता है।

भारत-नीदरलैंड सहयोग

  • आशय पत्र: भारत और नीदरलैंड ने गुजरात में कल्पसर परियोजना (Kalpasar Project) के संबंध में एक आशय पत्र (Letter of Intent – LoI) पर हस्ताक्षर किए।
  • भागीदार मंत्रालय: इस आशय पत्र पर जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बुनियादी ढाँचा और जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच हस्ताक्षर किए गए थे।
  • सहयोग का क्षेत्र: यह सहयोग कल्पसर परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग पर केंद्रित है।

कल्पसर परियोजना के बारे में

  • मीठे जल का जलाशय: इस परियोजना का उद्देश्य गुजरात में खंभात की खाड़ी में एक मीठे जल का जलाशय बनाना है।
  • एकीकृत बुनियादी ढाँचा: यह ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई और परिवहन बुनियादी ढाँचे के एकीकरण का प्रस्ताव करती है।

नीदरलैंड के बारे में

  • स्थिति: उत्तर-पश्चिमी यूरोप में स्थित एक देश जिसकी सीमाएँ उत्तरी सागर, जर्मनी और बेल्जियम से लगती हैं।
  • राजधानी: एम्स्टर्डम।
  • प्रशासनिक राजधानी: द हेग (The Hague)।
  • उपनाम: इसे अक्सर “लो कंट्रीज” (Low Countries) कहा जाता है क्योंकि इसकी अधिकांश भूमि समुद्र तल से नीचे स्थित है।

ज्वान-वुल्फ प्रभाव (Zwan-Wolf Effect)

नासा के मेवेन (Mars Atmosphere and Volatile Evolution- MAVEN) मिशन के तहत शोध करने वाले  वैज्ञानिकों ने, पृथ्वी पर वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र की कमी के बावजूद, पहली बार मंगल के संकीर्ण वायुमंडल में ‘ज्वान-वुल्फ प्लाज्मा प्रभाव’ (Zwan-Wolf plasma effect) को देखा है।

ज्वान-वुल्फ प्रभाव के बारे में

  • प्लाज्मा संपीडन: यह एक प्लाज्मा घटना है, जिसमें आवेशित कणों को संपीडित किया जाता है और चुंबकीय प्रवाह नलिकाओं के साथ निर्देशित किया जाता है।
  • खोज: इस प्रभाव की खोज वर्ष 1976 में हुई थी।
  • पिछले अवलोकन: इससे पहले, इसे केवल पृथ्वी जैसे ग्रहों के मैग्नेटोस्फीयर (चुंबकीय क्षेत्र) में देखा गया था।

अंतरिक्ष मौसम की भूमिका

  • सौर विस्फोटों के दौरान प्रवर्द्धन: माना जाता है कि सौर विस्फोट और तीव्र अंतरिक्ष मौसम की घटनाएँ मंगल के वायुमंडल में ज्वान-वुल्फ प्रभाव को बढ़ा देती हैं।
  • मंगल ग्रह के मैग्नेटोस्फीयर की गतिशील प्रकृति: सौर गतिविधियों में होने वाले बदलावों के कारण, मंगल का प्रेरित चुम्बकमंडल (Induced Magnetosphere) लगातार अपने आकार और रूप को बदलता रहता है।

अनुसंधान निष्कर्षों का वैज्ञानिक महत्त्व और प्रभाव 

  • मंगल का चुंबकीय वातावरण: यह अवलोकन इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि मंगल ग्रह के पास अपना कोई मजबूत वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र नहीं है; इसके बजाय, वहाँ सौर हवा और उसके वायुमंडल के बीच होने वाली पारस्परिक क्रिया से बना एक प्रेरित मैग्नेटोस्फीयर (Induced Magnetosphere) मौजूद है।
  • वैज्ञानिक समझ में प्रगति: यह खोज मंगल पर वायुमंडलीय और प्लाज्मा प्रक्रियाओं की समझ को बेहतर बनाती है और यह दर्शाती है कि ऐसे प्रभाव कमजोर और अस्थिर चुंबकीय वातावरण में भी हो सकते हैं।
  • अन्य खगोलीय पिंडों के लिए अंतर्दृष्टि: ये निष्कर्ष अन्य कमजोर चुंबकीय या बिना चुंबकीय क्षेत्र वाले पिंडों, जैसे कि शुक्र (वीनस) और टाइटन पर इसी तरह की प्लाज्मा घटनाओं के बारे में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

मेवेन (MAVEN) मिशन के बारे में

  • प्रक्षेपण: मेवेन अंतरिक्ष यान को नासा द्वारा नवंबर 2013 में लॉन्च किया गया था और इसने सितंबर 2014 में मंगल की कक्षा में प्रवेश किया था।
  • मिशन का उद्देश्य: मेवेन सात सक्रिय मंगल ऑर्बिटर्स में से एक है। यह मंगल के वायुमंडल और सौर पवन के साथ उसकी अंतर्क्रिया का अध्ययन करता है, ताकि यह समझा जा सके कि इस ग्रह ने अपने वायुमंडल का एक बड़ा हिस्सा कैसे खो दिया और यह कभी नमी से युक्त ग्रह से आज के ठंडे व सूखे ग्रह के रूप में कैसे विकसित हुआ।

फारसी खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (Persian Gulf Strait Authority- PGSA)

 

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग संचालन की निगरानी के लिए ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ (PGSA) नामक एक नए नियामक निकाय की स्थापना की है।

‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ (PGSA) के बारे में

  • नियामक निकाय: PGSA एक नवनिर्मित ईरानी वैधानिक प्राधिकरण है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से समुद्री पारगमन (मैरिटाइम ट्रांजिट) की निगरानी और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।
  • शिपिंग नियंत्रण: जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को इस प्राधिकरण के पास पंजीकरण कराना, इसके निर्देशों का पालन करना, पारगमन शुल्क (ट्रांजिट चार्ज) का भुगतान करना और प्रवेश परमिट प्राप्त करना आवश्यक होगा।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा संदर्भ: यह कदम अमेरिका-इजरायल गठबंधन सेनाओं और ईरान से जुड़े संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बारे में

  • स्थिति: यह एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
  • भौगोलिक स्थिति: यह उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान-यू.ए.ई. के बीच स्थित है।
  • वैश्विक ऊर्जा मार्ग: दुनिया का लगभग 20% तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आमतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
  • संकीर्ण मार्ग: अपने सबसे संकीर्ण बिंदु पर, यह जलडमरूमध्य लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है, जो इसे एक प्रमुख समुद्री चोकपॉइंट बनाता है।
  • रणनीतिक द्वीप: ईरान जलडमरूमध्य के पास अबू मूसा और ग्रेटर व लेसर टुन्ब्स (Greater and Lesser Tunbs) सहित कई रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण द्वीपों को नियंत्रित करता है।

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