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Lokesh Pal
May 21, 2026 05:15
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यह मुद्दा तब सामने आया जब एक RTI आवेदन में यह प्रश्न उठाया गया कि क्या भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के अंतर्गत “सार्वजनिक प्राधिकरण” माना जाना चाहिए, क्योंकि:
प्रारंभ में, वर्ष 2018 में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने यह माना कि BCCI एक लोक प्राधिकरण है। हालाँकि, न्यायिक समीक्षा और पूर्ववर्ती सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के आधार पर पुनर्विचार के बाद, CIC ने बाद में निष्कर्ष निकाला कि RTI अधिनियम के तहत BCCI एक लोक प्राधिकरण नहीं है।
मुख्य मुद्दा यह था कि क्या BCCI को “अन्य प्राधिकरण” के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
इस प्रकार, कोई निकाय अनुच्छेद 12 के अंतर्गत “राज्य” न होने पर भी RTI के तहत “लोक प्राधिकरण” की श्रेणी में आ सकता है, यदि वह लोक प्राधिकरण के मानदंडों को पूरा करता है।
यद्यपि BCCI “राज्य” नहीं है, फिर भी न्यायालय ने स्वीकार किया कि यह राष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन से जुड़े सार्वजनिक कार्य करता है।
ये सिद्धांत बाद में BCCI की स्थिति तय करने में महत्त्वपूर्ण साबित हुए।
BCCI संसद द्वारा नहीं बनाया गया है: यह एक पंजीकृत संस्था है, वैधानिक निकाय नहीं।
“धूप सबसे अच्छा कीटाणुनाशक है।” (“Sunlight is the best disinfectant.”)
यह वाक्यांश इस बात पर बल देता है कि उन संस्थाओं में, जिनका जनता पर गहरा प्रभाव है, भ्रष्टाचार, मनमानी और सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए खुलापन और पारदर्शिता सबसे प्रभावी साधन हैं।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: “राज्य-सदृश कार्य करने और राष्ट्रीय खेल पर एकाधिकार रखने के बावजूद BCCI सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे से बाहर है।” हाल के CIC निर्णयों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आलोक में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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