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संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal July 02, 2026 02:29 6 0

FCRA 2.0 पोर्टल और ई-ओसीआई (e-OCI) कार्ड

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने FCRA 2.0 पोर्टल तथा ई-ओसीआई (e-OCI) कार्ड का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शिता तथा नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को सुदृढ़ बनाना है।

FCRA 2.0 पोर्टल के बारे में

  • FCRA 2.0 पोर्टल विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के प्रशासन हेतु विकसित एक उन्नत डिजिटल प्लेटफार्म है।
  • उद्देश्य: गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) एवं संघों द्वारा प्राप्त विदेशी अंशदान के पंजीकरण, अनुपालन, निगरानी एवं विनियमन को सुव्यवस्थित करना।
  • नोडल निकाय: केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA)।
  • मेजबान: राष्ट्रीय सरकारी क्लाउड (मेघराज)
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • त्वरित आवेदन निस्तारण हेतु प्रक्रिया पुनर्रचना।
    • विदेशी निधि प्रवाह की वास्तविक समय निगरानी के लिए एकीकृत डैशबोर्ड।
    • आधार-आधारित प्रमाणीकरण तथा ई-साइन (e-Sign) सुविधा।
    • ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) आधारित दस्तावेज विश्लेषण द्वारा स्वचालित दस्तावेज सत्यापन।
    • दस्तावेजों की भौतिक प्रस्तुति की आवश्यकता समाप्त।
  • आगामी सुविधाएँ
    • FCRA मोबाइल ऐप
    • AI-संचालित चैटबॉट
    • बैंकों के लिए समर्पित ऑनलाइन डैशबोर्ड।
  • महत्त्व: प्रौद्योगिकी-सक्षम विदेशी अंशदान निगरानी के माध्यम से पारदर्शिता, अनुपालन की सुगमता, डिजिटल गवर्नेंस तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाता है।

ई-ओसीआई कार्ड के बारे में

  • ई-ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (e-OCI) कार्ड, ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड का डिजिटल संस्करण है, जिसे OCI कार्डधारकों को सुरक्षित एवं कागजरहित सेवाएँ प्रदान करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • प्रत्येक OCI कार्डधारक के लिए विशिष्ट आजीवन पंजीकरण संख्या।
    • नया पासपोर्ट प्राप्त होने पर OCI बुकलेट पुनः जारी कराने की आवश्यकता नहीं।
    • कार्डधारकों को वास्तविक समय में डिजिटल सत्यापन की सुविधा।
    • भौतिक दस्तावेजों के खोने अथवा क्षतिग्रस्त होने के जोखिम की समाप्ति।
    • सुरक्षित डिजिटल प्रारूप के माध्यम से अधिक सुविधा एवं सुगमता।
  • महत्त्व: ई-ओसीआई कार्ड 50 लाख से अधिक OCI कार्डधारकों के लिए सुरक्षित, कागजरहित एवं डिजिटल रूप से सत्यापनीय पहचान प्रबंधन सुनिश्चित करते हुए सेवाओं को सरल एवं अधिक सुगम बनाता है।

ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) के बारे में

  • ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) का दर्जा भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को आजीवन आव्रजन संबंधी विशेषाधिकार प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत वे भारत में अनिश्चितकाल तक निवास, कार्य तथा यात्रा कर सकते हैं।
  • उद्भव: भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए वर्ष 2005 में प्रारंभ किया गया, क्योंकि भारतीय कानून दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता है।
  • हालिया परिवर्तन: नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 के अंतर्गत इस व्यवस्था में व्यापक डिजिटल परिवर्तन किया गया, जिसके तहत सेवाओं को सरलीकृत एवं इलेक्ट्रॉनिक अवसंरचना में रूपांतरित किया गया।

केंद्रीकृत आईटी-सक्षम प्रणाली (Centralised IT-Enabled System- CITES)

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने केंद्रीकृत आईटी-सक्षम प्रणाली (Centralised IT-Enabled System–CITES) परियोजना के अंतर्गत डेटाबेस एकीकरण एवं सॉफ्टवेयर उन्नयन का कार्य पूरा करने के लिए दावा (क्लेम) प्रस्तुत करने तथा पासबुक डाउनलोड जैसी सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया।

केंद्रीकृत आईटी-सक्षम प्रणाली (CITES) के बारे में

  • केंद्रीकृत आईटी-सक्षम प्रणाली (CITES), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की डिजिटल आधुनिकीकरण परियोजना है, जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) द्वारा विकसित किया गया है।
    • यह विकेंद्रीकृत संरचना के स्थान पर एकल राष्ट्रीय डेटाबेस तथा स्वचालित, नियम-आधारित प्रसंस्करण प्रणाली स्थापित करती है।
  • उद्देश्य: पारदर्शिता, दक्षता तथा निर्बाध सेवा वितरण को सुदृढ़ बनाना।

इसकी आवश्यकता के कारण

  • विकेंद्रीकृत डेटाबेस संरचना: पूर्व में EPFO 120 से अधिक विकेंद्रीकृत क्षेत्रीय डेटाबेसों के माध्यम से कार्य करता था, जहाँ प्रत्येक सदस्य किसी विशिष्ट क्षेत्रीय कार्यालय से संबद्ध होता था।
  • क्षेत्रीय कार्यालय पर निर्भरता: दावों (क्लेम), अभिलेख संशोधन, पेंशन सेवाओं तथा मृत्यु दावों के लिए सदस्यों को संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय जाना पड़ता था।
  • नियोक्ता-केंद्रित दावा निस्तारण: अधिकांश दावों के निस्तारण हेतु नियोक्ता की स्वीकृति आवश्यक होती थी, जिससे विलंब होता था तथा पूरी व्यवस्था नियोक्ता-केंद्रित बनी रहती थी।

केंद्रीकृत आईटी-सक्षम प्रणाली (CITES) की प्रमुख विशेषताएँ

  • एकल राष्ट्रीय डेटाबेस: किसी भी EPFO कार्यालय द्वारा सदस्य के अनुरोधों का निस्तारण किया जा सकेगा।
  • एकीकृत डिजिटल इंटरफेस: मौजूदा यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एवं पासवर्ड के माध्यम से सुलभ।
  • ऑनलाइन सेवाएँ: KYC अद्यतन, दावा (क्लेम) प्रस्तुत करना, दावे की स्थिति का पता लगाना तथा शिकायत निवारण जैसी सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध।
  • इलेक्ट्रॉनिक प्रश्न निस्तारण: सदस्य EPFO की पूछताछ का डिजिटल माध्यम से उत्तर दे सकेंगे, जिससे भौतिक रूप से कार्यालय जाने की आवश्यकता तथा दावा अस्वीकृति की संभावना कम होगी।

सदस्यों के लिए लाभ

  • समेकित सदस्य अभिलेख: सभी पूर्व सदस्य IDs को आधार-संबद्ध यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के अंतर्गत समेकित करता है।
  • एकीकृत खाता डैशबोर्ड: सदस्य भविष्य निधि (PF) शेष राशि, दावा (क्लेम) की स्थिति, पेंशन-योग्य सेवा, प्राप्त लाभ तथा निकासी पात्रता जैसी जानकारी एक ही स्थान पर देख सकते हैं।
  • तीव्र एवं सरल दावा निस्तारण: PF अंतरण को सरल बनाता है, सर्विस हिस्ट्री (Service history) को सटीक बनाए रखता है तथा मृत्यु दावों सहित सभी दावों के निस्तारण में तेजी लाता है।
  • भविष्य-उन्मुख डिजिटल अवसंरचना: EPFO की प्रस्तावित UPI-संबद्ध PF निकासी प्रणाली के लिए तकनीकी आधार प्रदान करता है।

नासा रोबोटिक रेस्क्यू मिशन 

नासा ने लंबे समय से परिचालन में रहे स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप को बचाने के लिए एक रोबोटिक मिशन प्रारंभ किया, जो कक्षा में उपग्रहों की सर्विसिंग तथा अंतरिक्षीय संधारणीयता की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

नासा रोबोटिक रेस्क्यू मिशन के बारे में 

  • नासा ने अमेरिका स्थित स्टार्टअप कैटालिस्ट (Katalyst) के सहयोग से नील गेह्रेल्स स्विफ्ट वेधशाला (Neil Gehrels Swift Observatory) को बचाने के लिए एक अभूतपूर्व रोबोटिक सर्विसिंग मिशन प्रारंभ किया है, जो निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit–LEO) में धीरे-धीरे अपनी ऊँचाई खो रही है।
  • इस वेधशाला का प्रक्षेपण वर्ष 2004 में निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में किया गया था।
  • उद्देश्य: स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप के साथ डॉकिंग (Docking) कर उसे अधिक ऊँची एवं स्थिर कक्षा में स्थापित करना, जिससे उसकी परिचालन अवधि बढ़ाई जा सके तथा भविष्य की कक्षा-आधारित उपग्रह सर्विसिंग (On-Orbit Satellite Servicing) प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया जा सके।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • स्वायत्त रोबोटिक डॉकिंग: लिंक (LINK) रोबोटिक अंतरिक्ष यान स्वायत्त रूप से स्विफ्ट टेलीस्कोप का पता लगाएगा, उसके चारों ओर संचालित होगा तथा तीन रोबोटिक भुजाओं की सहायता से उसे पकड़कर लगभग 300 किमी. ऊँची सुरक्षित कक्षा में ले जाएगा।
    • नवोन्मेषी वायु-प्रक्षेपण प्रणाली: इस मिशन में पेगासस (Pegasus) रॉकेट का उपयोग किया गया है, जिसे पारंपरिक प्रक्षेपण स्थल के बजाय एक विमान से छोड़ा जाता है, जिससे अधिक लचीली एवं लागत-प्रभावी प्रक्षेपण व्यवस्था उपलब्ध होती है।
    • वैज्ञानिक परिसंपत्ति की परिचालन अवधि का विस्तार: वर्ष 2004 में प्रक्षेपित नील गेह्रेल्स स्विफ्ट वेधशाला, केवल दो वर्ष के लिए डिजाइन किए जाने के बावजूद, आज भी गामा-रे विस्फोटों (Gamma-ray Bursts) का पता लगाने एवं उनके अध्ययन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
  • महत्त्व
    • कक्षा-आधारित उपग्रह सर्विसिंग को बढ़ावा: यह मिशन उपग्रहों की मरम्मत, रिफ्यूलिंग, पुनर्स्थापन, उन्नयन तथा परिचालन अवधि के विस्तार के लिए एक नए मॉडल की स्थापना कर सकता है, जिससे प्रतिस्थापन लागत कम होगी तथा परिचालन दक्षता बढ़ेगी।
    • सतत् अंतरिक्ष संचालन को प्रोत्साहन: मिशन की सफलता अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) को कम करने, अंतरिक्ष परिसंपत्तियों के दीर्घकालिक उपयोग को बढ़ावा देने तथा अत्यधिक भीड़भाड़ वाली निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) के सतत् प्रबंधन को सुदृढ़ करने में सहायक होगी।

इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) 

बांग्लादेश इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (International Big Cat Alliance–IBCA) का 27वाँ सदस्य बन गया, जिससे बिग कैट प्रजातियों के संरक्षण हेतु वैश्विक सहयोग और अधिक सुदृढ़ हुआ।

इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के बारे में 

  • इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) भारत द्वारा वर्ष 2024 में स्थापित एक संधि-आधारित (Treaty-based) वैश्विक पहल है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
  • उद्देश्य: विश्व की सात प्रमुख बिग कैट प्रजातियों (बाघ, सिंह, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर तथा प्यूमा) का संरक्षण करना।
  • सदस्य: वर्तमान में इस गठबंधन में 27 सदस्य देश तथा 5 पर्यवेक्षक देश शामिल हैं, जो 95 बिग कैट रेंज देशों में से हैं। बांग्लादेश इसका नवीनतम सदस्य बना है।
  • पात्रता: IBCA की सदस्यता संयुक्त राष्ट्र (UN) के सभी सदस्य देशों के लिए खुली है।
    • इसमें रेंज स्टेट्स (Range States) अर्थात् वे देश जहाँ बिग कैट प्रजातियाँ प्राकृतिक रूप से पाई जाती हैं, तथा
    • नॉन-रेंज देश (Non-Range Countries), जो वैश्विक वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में सहयोग करना चाहते हैं, दोनों शामिल हो सकते हैं।
  • शासन व्यवस्था: इसका संचालन सभी सदस्य देशों वाली सामान्य सभा, निर्वाचित सदस्य देशों की परिषद तथा सचिवालय द्वारा किया जाता है।
  • वित्तपोषण: भारत सरकार ने वर्ष 2023-24 से वर्ष 2027-28 की पाँच वर्षीय अवधि के लिए 150 करोड़ रुपये की प्रारंभिक वित्तीय सहायता प्रदान की है।

इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान, क्षमता निर्माण तथा ज्ञान-साझाकरण को बढ़ावा देकर बिग कैट प्रजातियों एवं उनके आवासों के वैश्विक संरक्षण को सुदृढ़ करता है, साथ ही जैव विविधता संरक्षण को भी प्रोत्साहित करता है।

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