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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal July 08, 2026 03:15 4 0

हिमालयी पैंगोलिन को ‘पृथक प्रजाति’ के रूप में मान्यता 

हाल ही में शोधकर्ताओं ने हिमालयी पैंगोलिन (Manis Aurita) को चीनी पैंगोलिन (Manis Pentadactyla) से पृथक एक विशिष्ट वर्तमान जीवित प्रजाति के रूप में मान्यता प्रदान की है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • विकासवादी विचलन: मूल नमूने (वर्ष 1836 के लेक्टोटाइप) के जीनोम अनुक्रमण तथा आधुनिक जीनोमिक आँकड़ों से तुलना से ज्ञात हुआ कि दोनों वंशावलियाँ प्रारंभिक प्लाइस्टोसीन युग (Pleistocene Epoch) के दौरान लगभग 18 लाख वर्ष पूर्व एक-दूसरे से पृथक हो गई थीं।
  • जलवायु की भूमिका: जलवायु घटनाओं के कारण पूर्वज आबादी एलोपैट्रिक (Allopatric) रूप से पृथक होकर पश्चिमी (हिमालयी) तथा पूर्वी (पूर्वी/दक्षिण-पूर्व एशियाई) आश्रय-स्थलों में विभाजित हो गई, जिसके परिणामस्वरूप एम. ऑरिटा (M. aurita) एक पृथक प्रजाति के रूप में विकसित हुई।
  • जनसंख्या का इतिहास: एम. ऑरिटा (M. aurita) की आबादी में प्लाइस्टोसीन युग के दौरान शीतलन एवं शुष्कीकरण के कारण तीव्र गिरावट आई। इसके अतिरिक्त 14वीं शताब्दी के आस-पास, हिमालयी क्षेत्र में लिटिल आइस एज (Little Ice Age) के साथ इसकी आबादी में पुनः संकुचन देखा गया।
  • आनुवंशिक अनुकूलन: दोनों प्रजातियों के भिन्न-भिन्न पर्यावरणों के अनुरूप अनुकूलित होने के साथ, कुछ जीन प्राकृतिक चयन के प्रभाव में एक-दूसरे से पृथक विकसित हुए।
  • अवैध वन्यजीव व्यापार: यह प्रजाति अवैध वन्यजीव व्यापार से गंभीर रूप से प्रभावित है।
    • शोधकर्ताओं ने ऐसे प्रमाण प्राप्त किए हैं कि इस प्रजाति से प्राप्त उत्पाद अवैध आपूर्ति शृंखलाओं के माध्यम से विनियमित पारंपरिक औषधि बाजारों तक पहुँच चुके हैं।
  • अंतःप्रजनन का जोखिम: काठमांडू घाटी के आस-पास की आबादियों में अंतःप्रजनन का स्तर अत्यधिक उच्च पाया गया है।
  • CITES संबंधी अनुशंसा: शोधकर्ताओं ने हिमालयी पैंगोलिन (Manis aurita) को साइट्स (CITES) के परिशिष्ट-I में सम्मिलित किए जाने की अनुशंसा की है।

विशिष्ट विशेषताएँ

विशेषताएँ हिमालयी पैंगोलिन 

(M. aurita)

चीनी पैंगोलिन 

(M. pentadactyla)

शरीर का आकार बड़ा शरीर (लगभग 95 सेमी.) छोटा शरीर (लगभग 71 सेमी.)
कपाल (खोपड़ी) अपेक्षाकृत बड़ा कपाल अपेक्षाकृत छोटा कपाल
कान स्पष्ट रूप से छोटे कान अपेक्षाकृत बड़े कान
नासिका अस्थि छोटी एवं चौड़ी नासिका अस्थि लंबी एवं सँकरी नासिका अस्थि

सहकारी जीवन बीमा कंपनी 

हाल ही में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने घोषणा की है कि देश में सहकारी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी की स्थापना की जाएगी।

सहकारी जीवन बीमा कंपनी के बारे में

  • प्रस्तावित सहकारी जीवन बीमा कंपनी का उद्देश्य भारत के व्यापक सहकारी नेटवर्क के माध्यम से, विशेषकर ग्रामीण एवं सेवावंचित क्षेत्रों में, सुलभ जीवन बीमा उपलब्ध कराना है।
  • नोडल मंत्रालय: सहकारिता मंत्रालय।
  • नियामक प्राधिकरण: इस बीमा कंपनी का विनियमन भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा बीमा अधिनियम, 1938 के अंतर्गत किया जाएगा।
  • प्रस्तावित संरचना: इस कंपनी को सहकारी संस्थाओं द्वारा भारतीय किसान उर्वरक सहकारी–इफको-टोकियो (IFFCO-Tokio) के सफल मॉडल के आधार पर प्रोत्साहित किए जाने की संभावना है।
    • इफको-टोकियो (IFFCO-Tokio) मॉडल एक सफल सहकारी–निजी संयुक्त उद्यम है, जो व्यापक सहकारी नेटवर्क तथा स्थानीय बीमा केंद्रों (Bima Kendras) के माध्यम से ग्रामीण एवं अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में बीमा सेवाएँ प्रदान करता है।
    • यह 8.5 लाख सहकारी समितियों तथा 30 करोड़ से अधिक सदस्यों वाले सहकारी नेटवर्क का उपयोग करेगा।
    • प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) तथा ई-पैक्स/कॉमन सर्विस सेंटर (e-PACS/CSCs) से बीमा उत्पादों के वितरण माध्यम के रूप में कार्य करने की अपेक्षा की जाती है।
  • हाल का सक्षमकारी सुधार: सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानूनों का संशोधन) अधिनियम द्वारा बीमा अधिनियम, 1938 में संशोधन कर सहकारी समितियों द्वारा बीमा कंपनियाँ स्थापित करने के लिए ₹100 करोड़ की अनिवार्य न्यूनतम चुकता पूँजी की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है।
  • संबद्ध सहकारी पहलें
    • 50,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का ई-पैक्स (e-PACS) में डिजिटलीकरण किया जा रहा है।
    • गुजरात के आणंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना, ताकि सहकारी क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन विकसित किए जा सकें।
    • गतिशीलता, भंडारण, बीज उत्पादन तथा अन्य क्षेत्रों में सहकारी पहलों का विस्तार किया जा रहा है।
  • भारत में सहकारिता की स्थिति: वर्तमान में भारत में लगभग 8.5 लाख सहकारी समितियाँ तथा 30 करोड़ से अधिक सदस्य हैं, जिससे यह विश्व के सबसे बड़े सहकारी पारितंत्रों में से एक है।
  • महत्त्व: यह ग्रामीण भारत में बीमा कवरेज का विस्तार करता है, वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ बनाता है, सहकारी आंदोलन को पारंपरिक क्षेत्रों से आगे विविधीकृत करता है तथा “वर्ष 2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य को समर्थन प्रदान करता है।

INS महेंद्रगिरी (F38)

हाल ही में भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट 17A की छठी स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरी को नौसेना में शामिल (कमीशन) किया।

INS महेंद्रगिरी (F38) के बारे में

  • INS महेंद्रगिरी (F38) प्रोजेक्ट 17A (नीलगिरी श्रेणी) की एक स्वदेशी स्टील्थ निर्देशित-मिसाइल फ्रिगेट है, जिसे बहु-भूमिका समुद्री अभियानों के लिए अभिकल्पित किया गया है।
    • यह पूर्वी घाट की महेंद्रगिरी पर्वतमाला के नाम पर नामित भारतीय नौसेना का पहला युद्धपोत है।
    • इसे प्रोजेक्ट 17A के अंतर्गत विकसित किया गया है, जो प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक श्रेणी) फ्रिगेटों का उन्नत संस्करण (Follow-on Class) है।
  • डिजाइन: भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा।
  • निर्माता: मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई।
  • आदर्श वाक्य: शक्तिशाली – भव्य – अद्वितीय।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • स्टील्थ क्षमता: कम रडार परावर्तन क्षेत्र, उन्नत स्टील्थ अभिकल्पना, बेहतर उत्तरजीविता तथा उच्च स्तर के स्वचालन से युक्त, जिससे शत्रु द्वारा इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है।
    • प्रणोदन प्रणाली: संयुक्त डीजल अथवा गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली से संचालित, जो उच्च गति से संचालन तथा लंबी दूरी की तैनाती को सक्षम बनाती है।
    • अस्त्र एवं सेंसर: इसमें स्वदेशी सतह-से-सतह एवं सतह-से-आकाश मिसाइलें, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, पनडुब्बी-रोधी युद्ध प्रणाली तथा एकीकृत युद्ध प्रबंधन प्रणाली (CMS) सम्मिलित हैं।
    • स्वदेशी सामग्री एवं भूमिका: इसमें 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) तथा भारतीय रक्षा उद्योगों की भागीदारी है।
      • इसे वायु-रोधी, सतह-रोधी, पनडुब्बी-रोधी युद्ध, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), खोज एवं बचाव तथा निरंतर समुद्री उपस्थिति संबंधी अभियानों के लिए अभिकल्पित किया गया है।

प्रोजेक्ट 17A (P-17A) के बारे में

  • प्रोजेक्ट 17A (नीलगिरी श्रेणी) भारतीय नौसेना का प्रमुख स्वदेशी कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक श्रेणी) के उत्तराधिकारी के रूप में सात स्टील्थ निर्देशित-मिसाइल फ्रिगेटों का निर्माण किया जा रहा है।
  • लक्ष्य: 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ वायु-रोधी, सतह-रोधी तथा पनडुब्बी-रोधी युद्ध में सक्षम एक आधुनिक ब्लू-वॉटर नौसैनिक बेड़े (Blue-water Naval Fleet) का विकास करना, जो आत्मनिर्भर भारत को समर्थन प्रदान करे।
  • बजट: इस परियोजना की कुल लागत लगभग ₹45,000 करोड़ है।
    • प्रत्येक फ्रिगेट की अनुमानित लागत ₹4,000 करोड़ से अधिक है।
  • प्रोजेक्ट 17A के अंतर्गत सात फ्रिगेट
    • मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई: INS नीलगिरी, उदयगिरी, तारागिरी तथा महेंद्रगिरी।
    • गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता: INS हिमगिरी, दूनागिरी तथा विंध्यगिरी।

ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (GPI) 2026

ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत 125वें स्थान पर रहा, जो इसके समग्र कंपोजिट स्कोर में सुधार के बावजूद सामान्य गिरावट को दर्शाता है।

ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (GPI) के बारे में

ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (GPI) एक वैश्विक रैंकिंग है, जो केवल वीजा-मुक्त यात्रा के बजाय अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता, निवेश के अवसरों और जीवन स्तर की गुणवत्ता के आधार पर पासपोर्ट की क्षमता का मूल्यांकन करती है।

  • प्रकाशक: यह इंडेक्स सालाना ग्लोबल सिटीजन सॉल्यूशंस (GCS) द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जो एक अंतरराष्ट्रीय निवास और नागरिकता सलाहकार फर्म है।
  • मुख्य मानदंड: GPI तीन व्यापक स्तंभों के तहत 14 संकेतकों का उपयोग करके स्कोर आवंटित करता है:-
    • बेहतर गतिशीलता (50%): वीजा-मुक्त, आगमन पर वीजा और यात्रा पहुँच को मापता है।
    • निवेश (25%): निवेश और व्यवसाय के अवसरों का आकलन करता है।
    • जीवन स्तर की गुणवत्ता (25%): स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा, पर्यावरण की गुणवत्ता और समग्र जीवन स्तर का मूल्यांकन करता है।

भारत का प्रदर्शन (2026)

  • समग्र रैंक: 197 देशों में 125वाँ (वर्ष 2025 में 124वाँ था)।
  • समग्र गणना: 45.1, जो सूचकांक की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक है।
  • वीजा-मुक्त/आगमन पर वीजा पहुँच: 26 देशों तक पहुँच।
  • जीवन स्तर की गुणवत्ता सूचकांक: पिछले वर्ष की तुलना में 11 स्थानों का सुधार करते हुए 118वें स्थान पर रहा।
  • निवेश सूचकांक: 3 स्थानों का सुधार करते हुए 94वें स्थान पर रहा।

शीर्ष रैंक वाले पासपोर्ट: स्वीडन (96.05 के समग्र स्कोर के साथ रैंक 1), स्विट्जरलैंड (रैंक 2), फिनलैंड, जर्मनी और नीदरलैंड (संयुक्त रैंक 4); डेनमार्क (संयुक्त रैंक 4); आयरलैंड (रैंक 7); यूनाइटेड किंगडम (रैंक 8); नॉर्वे (रैंक 9); सिंगापुर (रैंक 10)।

  • सिंगापुर ने सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले एशियाई पासपोर्ट के रूप में स्थान प्राप्त किया और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 20 में शामिल होने वाला एकमात्र एशियाई देश रहा।

विश्व जूनोसिस दिवस 2026

विश्व जूनोसिस दिवस, जो प्रतिवर्ष 6 जुलाई को मनाया जाता है, जूनोटिक बीमारियों (पशुजन्य रोगों) के बारे में जागरूकता बढ़ाता है।

विश्व जूनोसिस दिवस के बारे में

यह तारीख 6 जुलाई, 1885 को लुई पाश्चर द्वारा रेबीज के पहले टीके के सफल क्रियान्वयन की याद दिलाती है, जो रोग निवारण में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

महत्त्व

  • जूनोटिक खतरों को नियंत्रित करने में टीकाकरण, उत्तरदायी पशु देखभाल, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्वच्छता के महत्त्व पर प्रकाश डालता है।
  • ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है, जो भविष्य के प्रकोपों को रोकने और वैश्विक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य क्षेत्रों के बीच सहयोग पर जोर देता है।

जूनोटिक बीमारियों के उदाहरण

  • जूनोटिक बीमारियां, या जूनोसिस, ऐसी बीमारियाँ हैं, जो जानवरों (जिनमें पशुधन, वन्यजीव और पालतू जानवर शामिल हैं) और लोगों के बीच फैलती हैं।
  • जूनोटिक बीमारियों या जूनोसिस (जानवरों और मनुष्यों के बीच प्रसारित होने वाली बीमारियां) के उदाहरणों में जीका वायरस, इबोला वायरस, एवियन फ्लू, सार्स (SARS), मर्स (MERS), वेस्ट नाइल वायरस, लाइम रोग और पीला बुखार (येलो फीवर) शामिल हैं।

विकसित उड़ान (संशोधित उड़ान योजना)

प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी और विमानन बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए ₹29,000 करोड़ के परिव्यय के साथ उड़ान (UDAN) के अगले चरण ‘विकसित उड़ान’ की शुरुआत की।

विकसित उड़ान (Viksit UDAN) के बारे में

विकसित उड़ान, उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना का संशोधित संस्करण है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मार्च 2026 में किफायती क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार करने और ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को समर्थन देने के लिए मंजूरी दी गई थी।

  • अवधि: 10 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2035-36 तक)
  • उड़ान की शुरुआत: उड़ान योजना को अक्टूबर 2016 में राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति (NCAP), 2016 के तहत शुरू किया गया था।
  • नोडल निकाय: इसे नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।
  • उद्देश्य: वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के माध्यम से गैर-सेवित (Unserved) और कम-सेवित (Underserved) हवाई अड्डों को जोड़कर हवाई यात्रा को किफायती, सुलभ और समावेशी बनाना।

मुख्य उद्देश्य

  • मौजूदा गैर-सेवित हवाई पट्टियों से 100 एयरोड्रोम विकसित करना।
  • अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड का निर्माण करना।
  • क्षेत्रीय एयरलाइन परिचालनों को बनाए रखने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) जारी रखना।
  • क्षेत्रीय हवाई अड्डों के लिए संचालन और रखरखाव (O&M) सहायता प्रदान करना।
  • आत्मनिर्भर भारत के तहत एचएएल ध्रुव (HAL Dhruv) और डोर्नियर (Dornier) सहित स्वदेशी विमानों और हेलीकॉप्टरों को बढ़ावा देना।
  • टियर-2, टियर-3, दूरस्थ और आकांक्षी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बढ़ाना।

उड़ान (UDAN) की उपलब्धियाँ

  • 669 क्षेत्रीय मार्गों को क्रियाशील किया गया।
  • 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्टों और वॉटर एयरोड्रोम को जोड़ा गया।
  • अपनी शुरुआत के बाद से 1.66 करोड़ से अधिक यात्रियों को लाभान्वित किया।

महत्त्व

विकसित उड़ान संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देती है, पर्यटन, व्यापार और रोजगार को गति देती है, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को मजबूत करती है और सबकी उड़ान, सबका विकास तथा ‘विकसित भारत 2047‘ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है।

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