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Lokesh Pal
July 06, 2026 03:00
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हाल ही में, बंगलूरू स्थित कैपजेमिनी (Capgemini) परिसर के भीतर संचालित ‘लिटिल बड्स डे केयर सेंटर’ में छोटे बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना ने बाल सुरक्षा, देखभालकर्ताओं की जवाबदेही तथा भारत में क्रेच संबंधी नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न की हैं।

सुरक्षित एवं सुदृढ़ रूप से विनियमित क्रेच केवल कल्याणकारी सुविधाएँ नहीं हैं, बल्कि बाल विकास, महिला सशक्तीकरण तथा समावेशी आर्थिक विकास की आधारभूत संस्थाएँ हैं। बंगलूरू की घटना यह स्पष्ट करती है कि केवल दिशा-निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है; बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन, व्यावसायिक मानक, नियमित निगरानी तथा बाल-केंद्रित प्रशासन बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने एवं संस्थागत बाल देखभाल के प्रति जनविश्वास को पुनर्स्थापित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
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