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Lokesh Pal
July 04, 2026 02:00
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सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा जनित अस्तित्वहीन न्यायिक पूर्वनिर्णय तैयार करना तथा उन पर निर्भरता न्यायिक प्रक्रिया के लिए अत्यंत गंभीर खतरा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में न्यायिक दक्षता, विधिक अनुसंधान तथा न्याय तक पहुँच को बेहतर बनाने की अपार क्षमता है। किंतु न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता अंततः मानवीय विवेक, संवैधानिक नैतिकता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा विधि के शासन पर आधारित है। सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय ने पुनः स्पष्ट किया है कि AI न्यायालयों की सहायता कर सकता है, लेकिन न्याय प्रदान करने की जिम्मेदारी कभी भी मशीनों को नहीं सौंपी जा सकती है।
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