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Lokesh Pal
May 06, 2026 03:22
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की 30 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति देकर प्रजनन संबंधी स्वायत्तता को पुनः पुष्ट किया तथा निर्णय के केंद्र में महिला की इच्छा और अधिकार को रखा।

यह निर्णय अधिकार-आधारित गर्भसमापन ढाँचे की ओर एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को रेखांकित करता है, जो महिलाओं की स्वायत्तता, गरिमा तथा सुरक्षित एवं समयबद्ध गर्भसमापन सेवाओं तक पहुँच को प्राथमिकता देने के लिए विधिक सुधारों की आवश्यकता पर बल देता है, साथ ही नैतिक एवं चिकित्सीय संतुलन बनाए रखने का प्रयास करता है।
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