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Lokesh Pal
June 02, 2026 05:31
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भारतीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा व्यक्तिगत आपराधिक मामलों में स्वप्रेरित संज्ञान (अर्थात् स्वयं पहल करके कार्रवाई करना) के बढ़ते उपयोग ने एक गहन संवैधानिक बहस को जन्म दिया है।
इस बहस को न्यायिक दृष्टिकोणों के दो मार्गों के माध्यम से समझा जा सकता है—विशिष्ट मामलों में व्यक्तिगत हस्तक्षेप तथा आपराधिक न्याय प्रणाली का संरचनात्मक सुधार।
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