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अमेरिका की सेक्शन 301 और भारत

Lokesh Pal June 09, 2026 03:27 12 0

संदर्भ

जबरन श्रम से संबंधित चिंताओं के आधार पर यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने सेक्शन 301 के अंतर्गत भारत पर अतिरिक्त 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है।

संबंधित तथ्य

अमेरिका ने भारत के विरुद्ध सेक्शन 301 के तहत दो जाँचें शुरू की हैं:

  • पहली, उन उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध न लगाने से संबंधित है, जिनके बारे में आरोप है कि उनका उत्पादन जबरन श्रम (Forced Labour) के माध्यम से किया गया है।
  • दूसरी, अतिरिक्त उत्पादन क्षमता (Excess Capacity) से संबंधित है।
    • अतिरिक्त उत्पादन क्षमता (Excess Capacity) वह स्थिति है, जब कोई उद्यम अपनी अधिकतम संभावित उत्पादन क्षमता से कम उत्पादन करता है। अर्थात् किसी कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता और उसके वास्तविक उत्पादन एवं बिक्री के मध्य का अंतर अतिरिक्त उत्पादन क्षमता कहलाती है।

यू.एस. सेक्शन 301 के बारे में

  • अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 (US Trade Act of 1974) के तहत अधिनियमित, सेक्शन 301 (Section 301) यू.एस. ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) को उन विदेशी नियामक प्रथाओं की जाँच करने और एकतरफा कार्रवाई करने का व्यापक अधिकार देती है, जिन्हें अमेरिकी वाणिज्य के लिए अनुचित, भेदभावपूर्ण या बोझिल माना जाता है।
  • न्यायिक परिवर्तन: अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय (फरवरी 2026) के बाद, जिसने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत व्यापक आपातकालीन शुल्कों को खारिज कर दिया था, अमेरिकी प्रशासन ने प्राथमिक व्यापार प्रवर्तन तंत्र के रूप में सेक्शन 301 की ओर तेजी से रुख किया है।

  • वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को लक्षित करना: पारंपरिक रूप से प्रत्यक्ष बाजार-पहुँच के टकरावों या बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के उल्लंघनों को हल करने के लिए उपयोग की जाने वाली सेक्शन 301 की हालिया कार्रवाइयाँ, सीमा पार श्रम अनुपालन और आपूर्ति शृंखला की उचित तत्परता को लागू करने की दिशा में एक आधुनिक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करती हैं।

यूएस के सेक्शन 301 के तहत की गई कार्रवाई के मुख्य पहलू

  • प्रवर्तन  का आधार: यू.एस. ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने यह घोषणा करने के बाद सेक्शन-301 के तहत टैरिफ की यह प्रक्रिया शुरू की कि भारत सहित 53 देशों में जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के आयात पर स्पष्ट और व्यापक कानूनी प्रतिबंध मौजूद नहीं हैं।
  • एक संसदीय बाधा: अमेरिकी प्रशासन सेक्शन 301 का उपयोग इसलिए कर रहा है क्योंकि संवैधानिक और राजनीतिक सीमाओं के कारण अमेरिकी कांग्रेस द्वारा व्यापक पारस्परिक टैरिफ संबंधी कानूनों को पारित किए जाने की संभावना कम है।
  • समानांतर व्यापार वार्ता: इसके साथ ही, भारत और अमेरिका एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का प्रयास कर रहे हैं, साथ ही इन दंडात्मक टैरिफ प्रस्तावों पर चर्चा भी जारी  है।

मुख्य संरचनात्मक चुनौतियाँ

  • निर्यात संवेदनशीलता: यदि 12.5% का टैरिफ अधिभार लागू होता है, तो यह पश्चिमी बाजारों में भारत के प्रमुख, श्रम-प्रधान निर्यात क्षेत्रों की मूल्य निर्धारण और प्रतिस्पर्द्धी बढ़त को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगा।
  • निगमित क्षेत्र की संकुचित मानसिकता: एक निरंतर आंतरिक बाधा यह है कि भारतीय बैंक और बड़े निगम एक बड़े घरेलू बाजार से ही बहुत संतुष्ट हैं और यू.पी.आई. जैसी सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने में संकोच दिखा रहे हैं।

आगे की राह 

  • मजबूत मैक्रो बफर्स का लाभ उठाना: पूरी तरह से अप्रतिबंधित पूँजी और बाहरी निवेश प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए भारत को अपने मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और 2% से कम के स्थिर चालू खाता घाटे (CAD) का आसानी से उपयोग करना चाहिए।
  • निगमित विविधीकरण को बढ़ावा देना: सरकार को कॉरपोरेट इंडिया को अपने पारंपरिक दायरे से बाहर निकलने और इंजीनियरिंग, आभूषण, शिक्षा तथा वित्तीय सेवाओं जैसे प्रतिस्पर्द्धी वैश्विक क्षेत्रों में वैश्विक बाजार हिस्सेदारी को सक्रिय रूप से हासिल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
  • संरचनात्मक छूट को सुरक्षित करना: यू.एस. ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमिसन ग्रीर की आगामी नई दिल्ली यात्रा के दौरान, भारतीय वार्ताकारों को मध्य-जुलाई के अंतरिम व्यापार समझौते के समापन को एकतरफा सेक्शन 301 शुल्क अधिभार से स्पष्ट राहत या छूट के साथ जोड़ना चाहिए।
  • वैश्विक गुणवत्ता मानकों की ओर संक्रमण: घरेलू निर्यात केंद्रों को अपनी आपूर्ति शृंखला ट्रैकिंग प्रणालियों को उन्नत करना चाहिए, ताकि वे पश्चिमी श्रम-अनुपालन (Labour Compliance) मानकों को सहजता से पूरा कर सकें और टैरिफ जैसे एकपक्षीय व्यापारिक उपायों के औचित्य को निष्प्रभावी बना सकें।

सेक्शन 301 बनाम WTO विवाद निपटान

आयाम  अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की सेक्शन 301 विश्व व्यापार संगठन (WTO) विवाद निपटान तंत्र
प्रकृति  घरेलू अमेरिकी व्यापार प्रवर्तन कानून। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के तहत बहुपक्षीय व्यापार विवाद निपटान प्रणाली।
प्राधिकरण  यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) द्वारा प्रशासित। विश्व व्यापार संगठन के विवाद निपटान निकाय (DSB) के माध्यम से प्रशासित।
कार्रवाई कौन शुरू करता है? अमेरिका एकतरफा रूप से जाँच शुरू कर सकता है। एक WTO सदस्य देश दूसरे सदस्य देश के विरूद्ध शिकायत दर्ज करता है।
कानूनी आधार  अमेरिकी राष्ट्रीय कानून: वर्ष 1974 का व्यापार अधिनियम। WTO समझौते जैसे कि GATT, GATS, TRIPS, SCM समझौता आदि।
निर्णय लेना  यू.एस. ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) यह जाँच करता है और निर्धारित करता है कि किसी विदेशी देश की नीति, कार्यवाही या प्रथा अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित, अविवेकपूर्ण, भेदभावपूर्ण अथवा बोझिल है या नहीं। स्वतंत्र WTO  पैनल और अपीलीय निकाय/अपील मध्यस्थता यह आकलन करते हैं कि WTO  नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
उपचार/समाधान  अमेरिका टैरिफ, कर, आयात प्रतिबंध या अन्य प्रतिशोधात्मक उपाय लागू कर सकता है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की अनुमति केवल तब देता है, जब विवाद का विधिवत निपटारा हो जाए और हारने वाला पक्ष निर्णय का पालन करने में विफल रहे।
दृष्टिकोण  एकतरफा: एक देश अपने घरेलू कानून के आधार पर कार्य करता है। बहुपक्षीय/नियम-आधारित: निर्णय सहमत अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों पर आधारित होते हैं।
गति तुलनात्मक रूप से तेज और राजनीतिक रूप से अधिक लचीला। परामर्श, पैनल की कार्यवाही, अपीलों और अनुपालन चरणों के कारण धीमा।
जोखिम  व्यापारिक तनाव और संरक्षणवाद के आरोपों को जन्म दे सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक वैध, लेकिन वर्तमान में अपीलीय निकाय के संकट के कारण कमजोर।
उदाहरण  जबरन श्रम (बंधुआ मजदूरी) से बने सामानों के आयात-प्रतिबंध की चिंताओं पर सेक्शन 301 के तहत भारत के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क कार्रवाई का अमेरिकी प्रस्ताव। यदि व्यापार प्रतिबंध WTO के दायित्वों का उल्लंघन करते हैं, तो भारत या कोई अन्य देश उन्हें WTO  में चुनौती दे सकता है।

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