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व्हाइट-रम्प्ड वल्चर (जिप्स बेंगालेन्सिस)

Lokesh Pal July 01, 2026 02:15 18 0

संदर्भ

हाल ही में तमिलनाडु के नीलगिरि जिले स्थित मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में इस वर्ष पूर्व में छोड़ा गया एक कैप्टिव ब्रीडिंग (Captive breeding) एवं रेडियो-टैगयुक्त व्हाइट-रम्प्ड वल्चर (Gyps bengalensis) विद्युत करंट लगने से मृत पाया गया।

मुदुमलाई टाइगर रिजर्व (MTR) के बारे में

  • मुदुमलाई टाइगर रिजर्व (MTR), तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में स्थित, भारत के सर्वाधिक पारिस्थितिकीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों में से एक है।
  • यह तमिलनाडु, कर्नाटक एवं केरल के त्रि-जंक्शन पर स्थित है तथा पश्चिमी घाट, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, का भाग है।
  • इसे वर्ष 1940 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में स्थापित किया गया था, जिससे यह भारत के सबसे प्राचीन संरक्षित क्षेत्रों में से एक है। बाद में वर्ष 2007 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।

व्हाइट-रम्प्ड वल्चर (Gyps bengalensis) के बारे में

  • व्हाइट-रम्प्ड वल्चर (Gyps bengalensis) भारतीय उपमहाद्वीप का मूल निवासी ‘ओल्ड वर्ल्ड वल्चर’ है तथा विश्व के सर्वाधिक संकटग्रस्त मृतभक्षी पक्षियों में से एक है।
    • यह कभी भारत की सर्वाधिक प्रचुर गिद्ध प्रजाति थी, किंतु 1990 के दशक से इसकी जनसंख्या में अत्यधिक गिरावट आई है।

  • भौतिक विशेषताएँ: इस प्रजाति का शरीर गहरे भूरे रंग का होता है, जबकि इसकी सफेद पूँछ (White Rump), काला सिर तथा लंबी एवं चौड़ी उड़ान-पंख इसकी प्रमुख पहचान हैं।
    • यह मध्यम आकार का औपनिवेशिक (Colonial) गिद्ध है, जो ऊँचे वृक्षों पर घोंसला बनाता है तथा लंबी दूरी तक उड़ान भरने के लिए ऊष्मीय वायु धाराओं (Thermal Currents) का उपयोग करता है।
  • आवास: व्हाइट-रम्प्ड वल्चर खुले वनों, कृषि परिदृश्यों, घासभूमियों तथा मानव बस्तियों के निकट उन क्षेत्रों में पाया जाता है, जहाँ पशुओं के शव उपलब्ध होते हैं।
    • दक्षिण भारत में मुदुमलाई–सत्यमंगलम–बाँदीपुर–वायनाड परिदृश्य इसकी शेष बची प्रमुख प्रजनन आबादियों में से एक का आश्रय स्थल है।
  • आहार: यह एक अनिवार्य मृतभक्षी (Obligate Scavenger) प्रजाति है, जो लगभग पूर्णतः पालतू एवं जंगली पशुओं के शवों पर निर्भर रहती है।
    • यह सामान्यतः जीवित शिकार नहीं करती तथा मृत पशुओं के त्वरित निपटान में विशेष भूमिका निभाती है।
  • पारिस्थितिकीय भूमिका: व्हाइट-रम्प्ड वल्चर पशुओं के शवों का शीघ्र निपटान कर रोगों के प्रसार को रोकने तथा पारिस्थितिकीय स्वच्छता बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • यह आवारा कुत्तों जैसे अन्य मृतभक्षियों की संख्या को नियंत्रित करता है, जिससे रेबीज एवं एन्थ्रेक्स जैसे जूनोटिक रोगों का जोखिम कम होता है।
  • वितरण: यह प्रजाति भारत, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, पाकिस्तान तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ भागों में पाई जाती है, यद्यपि वर्तमान में इसका वितरण क्षेत्र काफी सीमित हो गया है।
  • प्रमुख खतरे (UPSC प्रारंभिक परीक्षा, वर्ष 2012)
    • पशु-चिकित्सीय औषधियों से विषाक्तता: पशु-चिकित्सा में डाइक्लोफेनाक एवं अन्य विषैले NSAIDs के उपयोग से दूषित पशु शवों का सेवन करने पर गिद्धों में गुर्दा विफलता हो जाती है, जो उनकी मृत्यु का प्रमुख कारण है।
    • विद्युत अवसंरचना: विद्युत करंट लगना तथा विद्युत लाइनों एवं ट्रांसमिशन अवसंरचना से संघर्ष गिद्धों की मृत्यु के प्रमुख कारणों के रूप में उभरे हैं।
    • अन्य खतरे: आवास क्षरण, भोजन की उपलब्धता में कमी, विषाक्तता तथा घोंसला स्थलों पर मानवीय व्यवधान भी इसकी दीर्घकालिक जनसंख्या पुनर्प्राप्ति के लिए गंभीर चुनौती हैं।
  • संरक्षण स्थिति
    • IUCN रेड लिस्ट: व्हाइट-रम्प्ड वल्चर को अत्यंत संकटग्रस्त (Critically Endangered- CR) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, वर्ष 1972: यह प्रजाति अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित है, जिससे इसे भारत में सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
    • CITES: यह प्रजाति परिशिष्ट-II में सूचीबद्ध है, जिसके अंतर्गत इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को विनियमित किया जाता है।
  • संरक्षण उपाय
    • भारत ने इसकी जनसंख्या की पुनर्प्राप्ति के लिए वल्चर संरक्षण प्रजनन केंद्र, वल्चर सेफ जोन स्थापित किए हैं तथा पशु-चिकित्सा में डाइक्लोफेनाक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है।
    • इसके अतिरिक्त, संरक्षण एजेंसियाँ बर्ड डाइवर्टर, इन्सुलेटेड विद्युत लाइनें तथा सुरक्षित शव प्रबंधन को बढ़ावा दे रही हैं, ताकि मानवीय कारणों से होने वाली मृत्यु को कम किया जा सके।

भारत में पाए जाने वाले गिद्धों के प्रकार

गिद्ध प्रजाति वैज्ञानिक नाम IUCN संरक्षण स्थिति
व्हाइट-रम्प्ड वल्चर जिप्स बेंगालेन्सिस (Gyps bengalensis) अत्यंत संकटग्रस्त (CR)
इंडियन (लॉन्ग-बिल्ड) वल्चर जिप्स इंडिकस (Gyps indicus) अत्यंत संकटग्रस्त (CR)
स्लेंडर-बिल्ड वल्चर जिप्स टेनुइरोस्ट्रिस (Gyps tenuirostris) अत्यंत संकटग्रस्त (CR)
रेड-हेडेड (एशियन किंग) वल्चर सार्कोजिप्स कैल्वस (Sarcogyps calvus) अत्यंत संकटग्रस्त (CR)
इजिप्टीयन वल्चर नियोफ्रॉन पर्स्नॉप्टेरस (Neophron percnopterus) संकटग्रस्त (EN)
हिमालयी गिद्ध (हिमालयन ग्रिफॉन) जिप्स हिमालयेन्सिस (Gyps himalayensis) निकट संकटग्रस्त (NT)
सिनेरियस (यूरेशियन ब्लैक) वल्चर एजीपियस मोनाकस (Aegypius monachus) निकट संकटग्रस्त (NT)
बीयर्ड वल्चर (लैमरगायर) जिपेटस बार्बेटस (Gypaetus barbatus) निकट संकटग्रस्त (NT)
यूरेशियन ग्रिफॉन वल्चर जिप्स फुल्वस (Gyps fulvus) कम चिंताग्रस्त (LC)।

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