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विश्व बैंक ने जलवायु वित्त संबंधी लक्ष्य को समाप्त किया

Lokesh Pal July 08, 2026 02:59 4 0

संदर्भ

हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका (विश्व बैंक का सबसे बड़ा शेयरधारक) की आलोचना के बाद विश्व बैंक समूह (WBG) ने घोषणा की है कि वह जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (CCAP) के अंतर्गत निर्धारित 45% जलवायु सह-लाभ लक्ष्य को समाप्त कर देगा।

  • हालाँकि, विश्व बैंक समूह (WBG) ने स्पष्ट किया कि उसकी जलवायु-संबंधी गतिविधियाँ सदस्य देशों की विकास प्राथमिकताओं तथा राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) के आधार पर सदस्य-देशों की माँग-आधारित बनी रहेंगी।

विश्व बैंक का हालिया निर्णय

  • वित्तपोषण लक्ष्यों की समाप्ति: विश्व बैंक समूह (WBG) ने 45% जलवायु सह-लाभ लक्ष्य तथा पूर्व निर्धारित 35% जलवायु वित्तपोषण मानदंड दोनों को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, उसने व्यय-आधारित लक्ष्यों के स्थान पर मापन योग्य विकासात्मक परिणामों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है।
  • निर्णय का कारण: यह निर्णय संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बाद लिया गया। अमेरिका का तर्क था कि कठोर जलवायु वित्तपोषण लक्ष्य विश्व बैंक को उसके मूल दायित्वों जैसे- गरीबी उन्मूलन, आर्थिक वृद्धि तथा विकासात्मक प्रभावशीलता से विमुख करते हैं तथा उसके परिचालनगत लचीलेपन को भी सीमित करते हैं।
  • जलवायु प्रतिबद्धता जारी रहेगी: यद्यपि वित्तपोषण लक्ष्यों को समाप्त कर दिया गया है, फिर भी जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (CCAP) जारी रहेगी।
    • विश्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि जलवायु संबंधी हस्तक्षेप सदस्य-देशों की माँग आधारित बने रहेंगे। साथ ही, वह वित्तपोषण प्रतिशत के स्थान पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जलवायु सहनशीलता संकेतकों तथा समग्र विकासात्मक परिणामों की निगरानी जारी रखेगा।

विश्व बैंक की जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (CCAP) के बारे में

  • उद्भव एवं विकास: प्रथम जलवायु परिवर्तन कार्य-योजना (CCAP) को पेरिस समझौते के बाद वर्ष 2016 में पाँच वर्षीय रणनीति (2016–2020) के रूप में प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य विकास वित्तपोषण में जलवायु कार्रवाई का एकीकरण करना था।
    • इसकी उपलब्धियों के आधार पर द्वितीय CCAP (2021–2025) को पाँच वर्षीय संस्थागत रणनीति के रूप में प्रारंभ किया गया, जिसे बाद में 30 जून, 2026 तक विस्तारित कर दिया गया।
    • जलवायु वित्तपोषण लक्ष्य प्रारंभ में कुल वित्तपोषण का 35% निर्धारित किया गया था, जिसे बाद में वर्ष 2023 में बढ़ाकर 45% कर दिया गया।
  • उद्देश्य: CCAP का उद्देश्य जलवायु शमन, अनुकूलन तथा सहनशीलता के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता का विस्तार करते हुए जलवायु कार्रवाई को आर्थिक विकास के साथ एकीकृत करना तथा विश्व बैंक की गतिविधियों को पेरिस समझौते के उद्देश्यों के अनुरूप बनाना है।
  • रणनीतिक स्तंभ
    • जलवायु एवं विकास का एकीकरण: राष्ट्रीय विकास नियोजन तथा नीतिगत सुधारों में जलवायु संबंधी विचारों का समावेशन करना।
    • प्रणालीगत संक्रमण में तीव्रता: ऊर्जा, कृषि, परिवहन, विनिर्माण, शहरी क्षेत्रों तथा जल क्षेत्र में निम्न-कार्बन एवं जलवायु-सहनशील परिवर्तन को प्रोत्साहित करना।
    • जलवायु वित्तपोषण का अभिसंचयन: सार्वजनिक वित्त को सुदृढ़ करना, निजी निवेश का लाभ उठाना तथा रियायती वित्तपोषण का विस्तार करना, ताकि जलवायु-सहनशील विकास को समर्थन प्रदान किया जा सके।

जलवायु वित्तपोषण में विश्व बैंक का महत्त्व

  • प्रमुख बहुपक्षीय जलवायु वित्तपोषक: विश्व बैंक समूह (WBG) विश्व के सबसे बड़े बहुपक्षीय जलवायु वित्तपोषकों में से एक बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में इसके कुल वित्तपोषण का लगभग 48%जलवायु सह-लाभ’ उत्पन्न करने वाला था, जिसने जलवायु कार्रवाई तथा सामाजिक-आर्थिक विकास दोनों को समर्थन प्रदान किया।
  • जलवायु सह-लाभ का अर्थ: जलवायु सह-लाभ से तात्पर्य ऐसे वित्तीय संसाधनों से है, जो एक साथ जलवायु परिवर्तन शमन (ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी) तथा जलवायु अनुकूलन (जलवायु प्रभावों के प्रति सहनशीलता में वृद्धि) में योगदान देते हैं, साथ ही व्यापक विकासात्मक लाभ भी सुनिश्चित करते हैं।
  • भारत को समर्थन: विश्व बैंक भारत में जलवायु-सहिष्णु कृषि, सौर पार्कों, हरित हाइड्रोजन, बैटरी भंडारण, विद्युतीकृत माल परिवहन, अटल भूजल योजना, बाढ़ सहनशीलता, मैंग्रोव पुनर्स्थापन, बाँध पुनर्वास तथा जलवायु-संवेदनशील जूनोटिक रोगों के लिए वन हेल्थ कार्यक्रम सहित अनेक जलवायु-केंद्रित पहलों का वित्तपोषण करता है।

निर्णय के प्रमुख निहितार्थ

  • जलवायु वित्तपोषण की गति में कमी: स्पष्ट वित्तपोषण लक्ष्यों को समाप्त किए जाने से, विशेषकर विकासशील तथा जलवायु-संवेदनशील देशों में, जलवायु निवेश के विस्तार हेतु संस्थागत प्रोत्साहन कमजोर पड़ सकता है।
  • वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के समक्ष चुनौती: यह निर्णय यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के अंतर्गत COP-29 में अपनाए गए नए सामूहिक परिमाणित लक्ष्य (NCQG) की प्राप्ति के प्रयासों को जटिल बना सकता है। इस लक्ष्य का उद्देश्य वर्ष 2035 तक विकासशील देशों के लिए प्रतिवर्ष कम-से-कम 1.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का संसाधन जुटाना है।
  • विद्यमान जलवायु वित्तपोषण अंतराल: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की अनुकूलन अंतराल प्रतिवेदन, 2025 के अनुसार, विकासशील देशों में अनुकूलन वित्तपोषण की आवश्यकता वर्तमान वित्तीय प्रवाह की तुलना में पहले से ही 12–14 गुना अधिक है, जो एक गंभीर वित्तपोषण अंतराल को दर्शाती है।
  • भारत के लिए निहितार्थ: नीति आयोग के अनुमान के अनुसार, भारत को शुद्ध-शून्य उत्सर्जन तथा दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वर्ष 2070 तक संचयी रूप से लगभग 22.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। बहुपक्षीय जलवायु वित्तपोषण में किसी भी प्रकार की मंदी का प्रभाव नवीकरणीय ऊर्जा, सहनशील अवसंरचना तथा जलवायु अनुकूलन में निवेश पर पड़ सकता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: पश्चिम एशिया में संघर्षों सहित हालिया भू-राजननीतिक व्यवधानों ने पारंपरिक ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं की संवेदनशीलता को उजागर किया है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा तथा स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में निवेश को तीव्र गति से बढ़ाने की आवश्यकता और अधिक सुदृढ़ हुई है।

आगे की राह

  • बहुपक्षीय जलवायु वित्तपोषण को सुदृढ़ करना: बहुपक्षीय विकास बैंक (MDBs) को विकास प्राथमिकताओं तथा जलवायु प्रतिबद्धताओं के मध्य संतुलन बनाए रखते हुए सुलभ जलवायु वित्तपोषण का विस्तार जारी रखना चाहिए।
  • निजी पूंजी का अभिसंचयन: बढ़ते जलवायु निवेश अंतराल को पाटने के लिए हरित बॉण्ड, मिश्रित वित्तपोषण, कार्बन बाजार तथा अन्य नवोन्मेषी वित्तपोषण तंत्रों का व्यापक विस्तार आवश्यक है।
  • अनुकूलन वित्तपोषण को प्राथमिकता: विशेष रूप से विकासशील देशों, जो जलवायु जोखिमों से असमान रूप से प्रभावित हैं, के लिए अनुकूलन वित्तपोषण पर अधिक बल दिया जाना चाहिए।
  • घरेलू जलवायु वित्तपोषण को सुदृढ़ करना: देशों को अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्तपोषण के पूरक के रूप में घरेलू संसाधन अभिसंचयन, नीतिगत सुधारों तथा संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना चाहिए।
  • परिणाम-आधारित दृष्टिकोण अपनाना: जलवायु हस्तक्षेपों का मूल्यांकन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जलवायु सहनशीलता तथा विकासात्मक परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए, साथ ही जलवायु कार्रवाई के लिए पर्याप्त वित्तीय समर्थन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

विश्व बैंक के बारे में

  • विश्व बैंक एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था है, जो गरीबी उन्मूलन, सतत् विकास तथा साझी समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए विकासशील देशों को वित्तीय सहायता, तकनीकी विशेषज्ञता तथा नीतिगत समर्थन प्रदान करती है।
  • स्थापना: वर्ष 1944, ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में।
  • मुख्यालय: वॉशिंगटन, डी.सी., संयुक्त राज्य अमेरिका।
  • सदस्य: 189 सदस्य देश (IBRD)
  • संरचना: विश्व बैंक समूह (WBG) के अंतर्गत निम्नलिखित संस्थाएँ सम्मिलित हैं:-
    • अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (IBRD): मध्यम-आय तथा ऋण-योग्य निम्न-आय वाले देशों को ऋण प्रदान करता है।
    • अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (IDA): सबसे निर्धन देशों को रियायती ऋण एवं अनुदान प्रदान करता है।
    • अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC): ऋण, इक्विटी तथा परामर्श सेवाओं के माध्यम से निजी क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करता है।
    • बहुपक्षीय निवेश गारंटी अभिकरण (MIGA): प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को प्रोत्साहित करने हेतु राजनीतिक जोखिम बीमा उपलब्ध कराता है।
    • निवेश विवादों के निपटान हेतु अंतरराष्ट्रीय केंद्र (ICSID): राज्यों एवं विदेशी निवेशकों के मध्य निवेश संबंधी विवादों का समाधान करता है।
  • शासन संरचना: इसकी शासन व्यवस्था में बोर्ड ऑफ गवर्नर’ (सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय), कार्यकारी निदेशकों का बोर्ड (दैनिक संचालन) तथा अध्यक्ष, जो विश्व बैंक समूह का नेतृत्व करता है, सम्मिलित हैं।
  • कार्य
    • विकास वित्तपोषण: अवसंरचना, सामाजिक क्षेत्रों तथा आर्थिक विकास के लिए ऋण, अनुदान, गारंटी तथा तकनीकी सहायता प्रदान करना।
    • जलवायु एवं सतत् विकास: जलवायु अनुकूलन, जलवायु शमन, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण तथा आपदा सहनशीलता को समर्थन प्रदान करना।
    • ज्ञान एवं क्षमता निर्माण: वैश्विक विकास प्रतिवेदन प्रकाशित करना, नीतिगत परामर्श, अनुसंधान तथा क्षमता निर्माण के माध्यम से सदस्य देशों को सहायता प्रदान करना।
  • वित्तपोषण के स्रोत: सदस्य देशों के पूँजी अंशदान, अंतरराष्ट्रीय पूँजी बाजारों से उधार, दाता देशों के अंशदान (विशेषकर IDA के लिए) तथा ऋण पुनर्भुगतान के माध्यम से वित्तपोषित।

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