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Lokesh Pal
June 02, 2026 05:00
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अंतरिक्ष अब केवल वैज्ञानिक अन्वेषण तक सीमित नहीं रह गया है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा, संचार, नौवहन, खुफिया जानकारी एकत्रीकरण, बैंकिंग तथा सैन्य अभियानों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। एक व्यापक रूप से उद्धृत सामरिक सिद्धांत कहता है:
जैसे-जैसे देशों की निर्भरता उपग्रहों पर बढ़ती जा रही है, बाह्य अंतरिक्ष भविष्य के संभावित संघर्षों के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।
निम्नलिखित सैन्य सहायता कार्यों के लिए अंतरिक्ष परिसंपत्तियों का उपयोग:
अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती अथवा ऐसे तंत्रों का विकास, जिन्हें अंतरिक्ष परिसंपत्तियों को नष्ट करने, निष्क्रिय करने या उनके कार्य में बाधा उत्पन्न करने के लिए निर्मित किया गया है।
चीनी निजी कंपनियाँ वैश्विक प्रतिस्पर्धियों को चुनौती देने लगी हैं।
ये कंपनियाँ चीन की राज्य-नेतृत्व वाली अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं की पूरक हैं।
| देश |
उपग्रहों की अनुमानित संख्या |
| संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) |
8,000+ |
| चीन |
1,900+ |
| भारत |
लगभग 60 |
संभवतः भविष्य के किसी संघर्ष का पहला चरण
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: बाह्य अंतरिक्ष (Outer Space) प्रमुख शक्तियों के बीच सामरिक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभर रहा है। चीन की बढ़ती प्रति-अंतरिक्ष (Counter-Space) क्षमताओं के भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अंतरिक्ष परिसंपत्तियों पर पड़ने वाले प्रभावों का परीक्षण कीजिए। भारत की अंतरिक्षीय लचीलापन (Space Resilience) को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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