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Lokesh Pal
April 21, 2026 05:15
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हाल ही में नोएडा में हुआ आंदोलन गहरी आर्थिक कठिनाइयों को दर्शाती है, जहाँ मजदूरी, नौकरी की सुरक्षा और कार्य स्थितियों को लेकर श्रमिक असंतोष हिंसक झड़पों और व्यवधानों में बदल गया है। यह राज्य, उद्योग और श्रमिकों के बीच सामाजिक अनुबंध के टूटने का संकेत देता है तथा शासन और नियामक खामियों को उजागर करता है।
यह आंदोलन पड़ोसी हरियाणा से तुलना के कारण शुरू हुआ, जहाँ समान अशांति के बाद न्यूनतम मजदूरी में 35% की वृद्धि की गई।
29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं (वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ) में समेकित करना विवाद का केंद्र है:
प्रदर्शनों ने एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव को उजागर किया है—ठेका श्रम (Contractualization) में वृद्धि:
औद्योगिक शांति के टूटने का एक प्रमुख कारण संवाद की कमी है:
औद्योगिक संतुलन बहाल करने के लिए निम्नलिखित कदम आवश्यक हैं:
नोएडा के विरोध प्रदर्शन नई श्रम संहिताओं में मौजूद कमजोरियों को उजागर करते हैं, जहाँ व्यवसाय करने में सुगमता की प्राथमिकता आजीविका और गरिमा के अधिकार पर भारी पड़ने का जोखिम उत्पन्न करता है। सतत सुधार के लिए संस्थागत संवाद आवश्यक है तथा औपचारिक क्षेत्र को अनौपचारिकीकरण को बढ़ावा देने से रोका जाना चाहिए।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: हाल ही में औद्योगिक हड़तालों की लहर ने नए श्रम संहिता ढाँचे के तहत ठेका श्रमिकों की असुरक्षा को उजागर किया है। भारत में ‘व्यवसाय करने में आसानी’ (Ease of Doing Business) और ‘श्रमिक कल्याण’ (Worker Welfare) के बीच संतुलन का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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