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Lokesh Pal
May 30, 2026 05:30
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यह बहस इस बात पर केंद्रित है कि क्या सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से किया जाने वाला डिजिटल सक्रियतावाद वास्तविक लोकतांत्रिक भागीदारी तथा जमीनी स्तर के राजनीतिक लामबंदी (Grassroots Political Mobilisation) का विकल्प बन सकता है।
डिजिटल सक्रियता जागरूकता निर्माण और जनसंगठन का एक शक्तिशाली साधन है, किन्तु यह जमीनी स्तर की भागीदारी, सामुदायिक जुड़ाव और लोकतांत्रिक विचार-विमर्श का पूर्ण विकल्प नहीं बन सकती। एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ऑनलाइन सहभागिता और ऑफलाइन सामूहिक कार्रवाई दोनों का संतुलित संयोजन आवश्यक है, ताकि राजनीतिक भागीदारी समावेशी, प्रभावी और सार्थक बनी रहे।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: सड़क-स्तरीय जन-संगठन (Street-level Mobilization) से डिजिटल सक्रियता (Digital Activism) की ओर हुए बदलाव ने राजनीतिक भागीदारी को मात्र दृश्यता (Visibility) तक सीमित कर दिया है। भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सोशल मीडिया एल्गोरिद्म के प्रभाव का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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