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Lokesh Pal
May 30, 2026 05:15
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दार्शनिक वोल्तेयर (Voltaire) से प्रेरणा लेते हुए, लेख यह तर्क देते है कि आधुनिक अंतरराष्ट्रीय कानून दिन-प्रतिदिन अप्रभावी होता जा रहा है, क्योंकि शक्तिशाली देश अक्सर नियमों और कानूनों का पालन चयनात्मक तरीके से करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून की बढ़ती अवहेलना वैश्विक मानदंडों और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के बीच उभरती खाई को दर्शाती है। नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अधिक सशक्त संस्थाओं, बेहतर जवाबदेही, तथा बहुपक्षवाद और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: “अंतरराष्ट्रीय कानून वैश्विक न्याय सुनिश्चित करने के तंत्र के बजाय शक्तिशाली राज्यों के लिए सुविधा का साधन बनता जा रहा है।” हाल के वैश्विक संघर्षों तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की विफलताओं के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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