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Lokesh Pal
July 10, 2026 05:15
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गांधीवादी विचारक ओ.पी. शाह के नेतृत्व में प्रतिष्ठित नागरिकों के एक समूह द्वारा दोनों सरकारों से राजनयिक जुड़ाव पुनः शुरू करने का आग्रह करने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता फिर से शुरू करने पर चर्चा पुनः आरंभ हो गई है। हालाँकि वार्ता क्षेत्रीय शांति और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा दे सकती है, लेकिन भारत का पुराना दृष्टिकोण यही है कि “आतंक और वार्ता एक साथ नहीं कार्य कर सकते।”
ये मुद्दे गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों का भाग हैं, जहाँ सहयोग राजनीतिक रूप से कम विवादास्पद है और धीरे-धीरे विश्वास का निर्माण कर सकता है।
दक्षिण एशिया में शांति और समृद्धि के लिए भारत तथा पाकिस्तान के बीच एक स्थिर संबंध आवश्यक है। हालाँकि, स्थायी वार्ता के लिए आतंकवाद तथा हिंसा से मुक्त परिदृश्य की आवश्यकता होती है। वर्तमान परिस्थितियों में व्यापक वार्ता कठिन है, लेकिन गैर-पारंपरिक सुरक्षा मुद्दों पर सहयोग तथा निरंतर ट्रैक-II जुड़ाव संचार बनाए रखने और धीरे-धीरे विश्वास बहाल करने में सहायता कर सकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न: भारत और पाकिस्तान के बीच विद्यमान द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में, गैर-क्षेत्रीय मुद्दों पर ‘व्यावहारिक संवाद’ की व्यवहार्यता का मूल्यांकन कीजिए। क्या ट्रैक-II कूटनीति स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, व्याख्या कीजिए? (15 अंक, 250 शब्द) |
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