100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

महिला-केंद्रित नकद हस्तांतरण योजनाएँ : कल्याण से बढ़कर सशक्तीकरण की ओर

Lokesh Pal July 09, 2026 05:00 7 0

संदर्भ:

हाल ही में प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के एक शोध पत्र में महाराष्ट्र तथा ओडिशा जैसे राज्यों में महिलाओं के लिए शुरू की गई बिना शर्त नकद हस्तांतरण योजनाओं का अध्ययन प्रकाशित किया गया है।

  • इस शोध पत्र में प्रकाशित अध्ययन का निष्कर्ष यह है, कि महिलाओं के बैंक खातों में सीधे नकद हस्तांतरण से इसका महिलाओं के ऊपर सकारात्मक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पड़ता है|
    • उक्त प्रभावों को ध्यान में रखते हुए यह निष्कर्ष निकाल गया कि ऐसी योजनाओं को समय-समय पर संशोधनों के साथ जारी करते रहना चाहिए।

नोबेल पुरस्कार विजेता एस्थर डुफ्लो का विचार

“जब पैसा महिलाओं तक पहुँचता है, तो पूरे परिवार को लाभ होता है।”

यह शोध-पत्र उक्त वक्तव्य की पुष्टि करता है।

प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के विषय में

मुख्य तथ्य संबंधित जानकारी 
स्थापना 2017
प्रकृति गैर-संवैधानिक, गैर-सांविधिक निकाय
कार्य प्रधानमंत्री को स्वतंत्र आर्थिक विश्लेषण तथा नीतिगत सलाह
भूमिका सरकारी नीतियों का मूल्यांकन तथा सुधार संबंधी सिफारिशें

केस स्टडीज

  1. महाराष्ट्र : मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना
    1. शुरुआत: 2024
    2. लाभार्थी: 21-65 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाएँ
    3. लाभ: ₹1,500 प्रति माह
    4. उद्देश्य: महिला सशक्तीकरण, बेहतर पोषण एवं पारिवारिक कल्याण
  2. ओडिशा : सुभद्रा योजना
    1. लाभार्थी: 21-60 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाएँ
    2. लाभ: ₹10,000 वार्षिक (किश्तों में)
    3. उद्देश्य: वित्तीय समावेशन तथा घरेलू निर्णयन प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि।

अध्ययन संबंधी मुख्य निष्कर्ष

1. घरेलू उपभोग में वृद्धि

महिलाओं द्वारा प्राप्त इस अतिरिक्त आय को निम्नलिखित पर व्यय किया गया :

  • भोजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • घरेलू जरूरतें

घरेलू व्यय में वृद्धि की स्थिति:

राज्य वृद्धि
महाराष्ट्र 46%
ओडिशा 28%

यह ‘कल्याणकारी उपभोग’ को दर्शाता है, जहाँ व्यय का मुख्य उद्देश्य अनावश्यक उपभोग के अतिरिक्त पारिवारिक हित में सुधार करना है।

2. बचत और वित्तीय सुरक्षा में सुधार

महिलाओं द्वारा इस हस्तांतरित राशि के एक बड़े हिस्से को बचाया गया।

माह की आखिरी अवधि में में बैंक राशि में वृद्धि:

राज्य वृद्धि
महाराष्ट्र 84%
ओडिशा 45%

व्यवहारगत प्रतिरूप:

  • अधिक आयु वर्ग की महिलाएँ: वृद्धावस्था की सुरक्षा के लिए अधिक बचत।
  • कम शिक्षित महिलाएँ: बच्चों की शिक्षा पर अधिक खर्च किया गया ।
  • उक्त संदर्भ से इस बात की पुष्टि होती है कि महिलाएँ घरेलू प्राथमिकताओं के अनुसार ही संसाधनों का आवंटन करती हैं।

अप्रत्यक्ष लाभ

  • उदाहरणस्वरूप हम देख सकते हैं कि जैसे-जैसे महिलाओं की बचत दर वृद्धि हुई है उसी अनुपात में पुरुषों द्वारा घरेलू खर्चों पर कम व्यय किया गया है।
  • इससे परिवार के अन्य सदस्य अधिक बचत कर सकने में सक्षम हुए।
  • घरेलू वित्तीय स्थिति अधिक मजबूत हुई।

स्पिलओवर प्रभाव: एक ऐसी नीति, जो किसी एक व्यक्ति को लाभ पहुँचाती है, वह अप्रत्यक्ष रूप से उसके आसपास के अन्य सदस्यों को भी लाभान्वित करती है।

डिजिटल वित्तीय समावेशन

चूँकि वित्त सीधे बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया था:

  • इसकी वजह से महिलाएँ डिजिटल बैंकिंग के विषय में सीख हासिल की।
  • यूपीआई (UPI) की स्वीकृति में वृद्धि दर्ज की गई।
  • डिजिटल भुगतान पूर्व की अपेक्षा अधिक सामान्य हो गया।
  • महिलाएँ औपचारिक वित्तीय प्रणाली में एकीकृत हो गईं।

महिला-केंद्रित नकद हस्तांतरण योजनाओं के समग्र लाभ

  • सशक्तीकरण: ध्यातव्य है कि प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण संबंधी योजनाएँ महिलाओं को आय का एक नियमित स्रोत प्रदान करती हैं, जो उनकी आर्थिक स्वतंत्रता में वृद्धि कर्क साबित होता है।
    • वित्तीय स्वायत्तता घरेलू स्तर पर उनकी मोलभाव करने की शक्ति को मजबूत करती है,
    • जिससे वे घरेलू व्यय, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और बचत से जुड़े निर्णयों में अधिक सक्रिय रूप से भागीदारी कर पाती हैं।
    • इसके परिणामस्वरूप, महिलाएँ परिवार और सामुदायिक मामलों में मूक लाभार्थी की बजाय सक्रिय निर्णयकर्ता की स्थिति में आ जाती हैं।
  • मानव विकास: साक्ष्यों के आधार पर इस बात की पुष्टि होती है कि महिलाएँ अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा अपने परिवार के सदस्यों के हित में सुधार पर व्यय करती हैं।
    • अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों को मुख्य रूप से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और अन्य आवश्यक निजी/घरेलूँ जरूरतों में निवेश किया जाता है।
    • ऐसा निवेश स्वस्थ, बेहतर शिक्षित और अधिक उत्पादक व्यक्तियों के विकास में योगदान देता है|
      • इसकी वजह से भारत की मानव पूँजी मजबूत होती है और दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
  • गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा: नकद हस्तांतरण योजनाएँ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक प्रभावी सामाजिक सुरक्षा जाल के रूप में कार्य करती हैं।
    • ये योजनाएँ पूरक आय प्रदान करती हैं, वित्तीय संकट के समय परिवारों को आवश्यक उपभोग आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करती हैं|
      • साथ ही  बीमारी, बेरोजगारी या फसल अपव्यय जैसे अप्रत्याशित नुकसान की स्थिति में एक आपातकालीन वित्तीय बफर के रूप में कार्य करती हैं।
      • इसके अलावा, वे गरीब परिवारों की क्रय शक्ति में सुधार करके उन्हें मुद्रास्फीति के प्रतिकूल प्रभावों से आंशिक रूप से बचाती हैं।
  • वित्तीय समावेशन: प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) यह सुनिश्चित करके सार्थक वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है, कि महिलाएँ औपचारिक बैंकिंग सेवाओं का सक्रिय रूप से उपयोग करें।
    • केवल बैंक खाते खोलने की बजाय, नियमित नकद हस्तांतरण इन खातों को चालू रखता है और लाभार्थियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है।
    • यह डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म को अपनाने की सुविधा प्रदान करता है, बचत को बढ़ाता है तथा, ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुँच में सुधार करता है |
    • यह औपचारिक अर्थव्यवस्था में महिलाओं के एकीकरण को मजबूत करने में भी सहायता करता है।
  • घरेलू वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाना: नियमित नकद प्रवाह आय के स्रोतों में विविधता लाकर और बचत बढ़ाकर परिवारों की वित्तीय स्थिरता में सुधार करता है।
    • यह संकटकालीन स्थितियों के दौरान अनौपचारिक श्रोतों से ऋण (साहूकारों) पर निर्भरता को कम करता है तथा आर्थिक तनाव को सहन करने की घरेलू क्षमता को भी बढ़ाता है।
  • समावेशी आर्थिक विकास: जैसे ही महिलाएँ हस्तांतरित आय को आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च करती हैं ठीक उसी दर में घरेलू उपभोग में भी वृद्धि होती है, जिससे स्थानीय बाजारों को बढ़ावा मिलता है और अतिरिक्त माँग सृजित  होती है।
    • यह एक आर्थिक गुणक प्रभाव (Multiplier Effect) को दर्शाता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है, रोजगार सृजन होता है और व्यापक आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है, इसके इतर इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि विकास के लाभ समाज के कमजोर वर्गों तक पहुँचें।

आर्थिक गुणक प्रभाव

  • आर्थिक गुणक प्रभाव उस प्रक्रिया को संदर्भित करता है, जिसके द्वारा सरकारी व्यय में प्रारंभिक वृद्धि से सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था में आय, उपभोग तथा उत्पादन की स्थिति उत्पन्न होती है।
  • जब सरकार सीधे परिवार को धन हस्तांतरित करती है, तो प्राप्तकर्ता उस आय का एक बड़ा हिस्सा वस्तुओं और सेवाओं पर व्यय करते हैं।
    • यह व्यय उत्पादकों, व्यापारियों और श्रमिकों के लिए एक आय के रूप में होती है, व्यापारियों और उत्पादकों द्वारा प्राप्त इस आय के एक हिस्से का व्यय किया जाता है, जिसकी वजह से आर्थिक गतिविधि की एक शृंखला सी बन जाती है।

उदाहरण:

सरकार एक महिला को ₹1,500 हस्तांतरित करती है

⬇️

वह उस मूल्य को सब्जियों, किराने के सामान, स्कूल की आपूर्ति या स्वास्थ्य सेवा पर खर्च करती है

⬇️

स्थानीय दुकानदारों और सेवा प्रदाताओं को आय प्राप्त होती है

⬇️

बढ़ी हुई माँग को पूरा करने के लिए, थोक व्यापारी और निर्माता उत्पादन बढ़ाते हैं

⬇️

फैक्टरियाँ अधिक कच्चा माल खरीदती हैं और अतिरिक्त श्रमिकों को रोजगार पर रखती हैं

⬇️

इससे रोजगार, घरेलू आय, उपभोग और समग्र आर्थिक उत्पादन में वृद्धि होती है

संबंधित चुनौतियाँ

  • राजकोषीय स्थिरता: बड़े पैमाने पर नकद हस्तांतरण से राज्य सरकारों पर राजकोषीय बोझ बढ़ जाता है।
  • क्राउडिंग आउट प्रभाव (अन्य खर्चों में कटौती): कल्याणकारी योजनाओं पर अधिक व्यय की वजह से सरकार द्वारा निम्नलिखित पर किए जाने वाले खर्च में कमी आ सकती है:
    • स्कूल
    • अस्पताल
    • बुनियादी ढाँचा
    • पूँजीगत व्यय
  • लक्षित करने में त्रुटियाँ : पहचान संबंधी त्रुटियों की वजह से कई पात्र और जरूरतमंद लाभार्थी इससे बाहर रह जाते हैं।
  • निर्भरता संबंधी चिंताएँ: यदि निरंतर और बिना शर्त प्राप्त होने वाले हस्तांतरण के साथ रोजगार के अवसर नहीं बढ़ाए गए, तो यह श्रम शक्ति में भागीदारी को हतोत्साहित कर सकता है।
  • मुद्रास्फीति का प्रभाव: यदि हस्तांतरण की राशि अपरिवर्तित रहती है और मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो समय के साथ सहायता का वास्तविक मूल्य कम हो जाता है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए अन्य सरकारी पहलें

  • दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM): स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को बढ़ावा देता है और आजीविका सृजन का समर्थन करता है।
  • मिशन शक्ति (2022): इसके दो स्तंभ हैं:
    • सम्बल (सुरक्षा और संरक्षण)
    • सामर्थ्य (सशक्तीकरण)
  • लखपति दीदी योजना (2023): स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को वार्षिक ₹1 लाख या उससे अधिक आय अर्जित करने में सहायता करने के लिए कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना।

आगे की राह

  • संधारणीय सशक्तीकरण के लिए “कैश प्लस” मॉडल अपनाएँ: नकद हस्तांतरण को केवल एक स्टैंड-अलोन कल्याणकारी उपाय के रूप में ही कार्य नहीं करना चाहिए, बल्कि इसे उन पूरक हस्तक्षेपों के साथ समाहित किया जाना चाहिए जो महिलाओं की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। सरकार को प्रत्यक्ष नकद सहायता के साथ निम्नलिखित को जोड़ना चाहिए:
    • महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं, यूपीआई और अन्य डिजिटल वित्तीय प्लेटफॉर्म का उपयोग करने में सक्षम बनाने हेतु डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।
    • रोजगार क्षमता और आय सृजन संबंधी अवसर में सुधार के लिए कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना चाहिए ।
    • बचत, निवेश तथा उत्तरदायी वित्तीय नियोजन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय साक्षरता पहल की शुरुआत की जानी चाहिए।
    • ऋण, उद्यमिता के अवसरों और सामुदायिक सहायता नेटवर्क तक पहुँच की सुविधा के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के साथ जुड़ाव।
  • नकद हस्तांतरित राशि की समय-समय पर समीक्षा: नकद हस्तांतरित मूल्य को मुद्रास्फीति और बढ़ती जीवन लागत के अनुरूप नियमित रूप से संशोधित किया जाना चाहिए।
    • समय-समय पर किया जाने वाला सुधार यह सुनिश्चित करेगा, कि लाभार्थी समय के साथ अपनी क्रय शक्ति न खोए और योजनाएँ सार्थक वित्तीय सहायता प्रदान करती रहें।
  • लाभार्थियों की पहचान और लक्षीकरण को मजबूत करना: सरकार को डिजिटल तकनीक, आधार-सक्षम सत्यापन तथा नियमित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों का लाभ उठाकर लाभार्थी डेटाबेस में सुधार करना चाहिए।
    • इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, कि सहायता वास्तविक रूप से पात्र महिलाओं तक पहुँचे और समावेशन एवं अपवर्जन की त्रुटियाँ न्यूनतम हों।
  • राजकोषीय स्थिरता के साथ कल्याणकारी व्यय को संतुलित करना: यद्यपि नकद हस्तांतरण योजनाएँ सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसा व्यय राजकोषीय रूप से वहन करने योग्य हो।
    • कल्याणकारी व्यय को बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य पूँजीगत व्यय में पर्याप्त निवेश के साथ संतुलित किया जाना चाहिए, जो दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति प्रदान करते हैं।
  • एक मजबूत निगरानी और प्रभाव मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना: सरकार को नकद हस्तांतरण योजनाओं की प्रभावशीलता, दक्षता तथा सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का आकलन करने के लिए नियमित निगरानी और स्वतंत्र मूल्यांकन करना चाहिए।
    • यह साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन कार्यान्वयन अंतरालों की पहचान करने तथा नीति निर्माण में सुधार और सार्वजनिक संसाधनों के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगा।
  • आय सहायता से बढ़कर महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना: नकद हस्तांतरण को धीरे-धीरे दीर्घकालिक निर्भरता की बजाय आत्मनिर्भरता के मार्ग के रूप में कार्य करना चाहिए।
    • नीतियों को महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करना चाहिए, औपचारिक रोजगार तक पहुँच को आसान बनाना चाहिए, आजीविका के अवसरों का विस्तार करना चाहिए तथा बाजार आधारित संबंधों को मजबूत करना चाहिए जिससे कि लाभार्थी स्थायी आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त कर सकें।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: “जहाँ महिला-केंद्रित बिना शर्त नकद हस्तांतरण ने वित्तीय लचीलेपन और मानव विकास को बढ़ावा देने की अपनी क्षमता सिद्ध की है, वहीं यह राज्यों के वित्तीय प्रबंधन के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है।” हालिया  हस्तक्षेपों के आलोक में इस कथन का विश्लेषण कीजिए और एक स्थायी उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.