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Lokesh Pal
June 08, 2026 05:30
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भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा हाल ही में उत्तर-पूर्वी राज्यों में 43 क्रिटिकल मिनरल्स अन्वेषण परियोजनाओं की घोषणा भारत के इस क्षेत्र के प्रति दृष्टिकोण में एक प्रतिमानात्मक परिवर्तन को दर्शाती है। यह परिवर्तन इसे एक सुरक्षा-केंद्रित सीमांत क्षेत्र से हटाकर एक रणनीतिक संसाधन सीमांत के रूप में स्थापित करता है, जो आर्थिक और प्रौद्योगिकीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उत्तर-पूर्व भारत एक संवेदनशील सीमांत क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण सामरिक संसाधन केंद्र के रूप में उभर रहा है। क्रिटिकल मिनरल्स का विकास भारत की आर्थिक और सामरिक सुरक्षा के लिए अपार अवसर प्रदान करता है। हालाँकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संसाधन दोहन को पारिस्थितिक स्थिरता, संवैधानिक सुरक्षा प्रावधानों और स्थानीय समुदायों की आकांक्षाओं के साथ किस प्रकार संतुलित किया जाता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: उत्तर-पूर्व भारत को एक सुरक्षा-केंद्रित सीमांत क्षेत्र के बजाय एक सामरिक संसाधन क्षेत्र के रूप में देखने का दृष्टिकोण आर्थिक अवसरों के साथ-साथ सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करता है। भारत की क्रिटिकल मिनरल्स रणनीति तथा स्थानीय भूमि अधिकारों के संदर्भ में इसका विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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