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Lokesh Pal
May 20, 2026 05:00
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अमेरिका और चीन के राष्ट्रपतियों के मध्य हाल ही में हुई बैठक ने वैश्विक समीकरणों में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव का संकेत दिया है, जो अत्यधिक तनाव के दौर से हटकर अब उस स्थिति की ओर बढ़ रहा है जिसे “डेटेन्टे (Détente)” (तनाव-शिथिलता) कहा जा रहा है।
यह परिवर्तन भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि दोनों महाशक्तियाँ एक संभावित “G2” (ग्रेट टू) व्यवस्था की ओर बढ़ती दिखाई दे रही हैं, जिसमें वे संयुक्त रूप से वैश्विक मामलों पर प्रभुत्व स्थापित कर सकती हैं। इससे अन्य शक्तियों, विशेषकर भारत, के हितों की अनदेखी होने की आशंका है।
भारत के सामने कई प्रत्यक्ष चुनौतियाँ हैं, जिनके कारण अमेरिका-चीन संबंधों में बढ़ती निकटता भारत के लिए चिंता का विषय बन जाती है।
बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के कारण भारत अपने पारंपरिक साझेदारों पर निर्भरता का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है।
मुख्य विचार: भारत को साझेदारियों को निम्नलिखित आधारों पर प्राथमिकता देनी चाहिए:
विशेषज्ञ सी. राजा मोहन के अनुसार, भारत को पुराने भावनात्मक संबंधों से आगे बढ़कर राष्ट्रीय हित आधारित नीति अपनानी चाहिए।
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