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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal May 20, 2026 04:35 7 0

स्माइल मिशन
(
SMILE Mission)

चीनी और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसियाँ सूर्य से आने वाले आवेशित कणों और पृथ्वी के चुंबकीय आवरण के बीच की अंतःक्रिया का अध्ययन करने के लिए स्माइल (SMILE) मिशन भेज रही हैं।

स्माइल (SMILE) मिशन के बारे में

  • पूरा नाम: SMILE का पूरा नाम ‘सोलर विंड मैग्नेटोस्फीयर आयनोस्फीयर लिंक एक्सप्लोरर’ (Solar wind Magnetosphere Ionosphere Link Explorer) है और इसे वेगा-सी (Vega-C) रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा।
  • संयुक्त अंतरिक्ष मिशन: यह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और चीनी अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच पहला संयुक्त अंतरिक्ष मिशन है।
  • उद्देश्य: इस मिशन का उद्देश्य यह अध्ययन करना है कि पृथ्वी का चुंबकीय मंडल (मैग्नेटोस्फीयर), पृथ्वी को हानिकारक सौर हवाओं और विकिरण से कैसे बचाता है।
  • वैज्ञानिक लक्ष्य: SMILE सौर कणों और पृथ्वी की चुंबकीय ढाल के बीच होने वाली अंतःक्रियाओं की पहली वास्तविक समय की एक्स-रे छवियाँ (X-ray Images) कैप्चर करेगा।
  • कक्षीय स्थिति: चुंबकीय मंडल के व्यापक अवलोकन के लिए यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव से लगभग 1.21 लाख किलोमीटर ऊपर कार्य करेगा।
  • मिशन की अवधि: SMILE का वजन लगभग 2,600 किलोग्राम है और इसका अपेक्षित परिचालन जीवनकाल लगभग तीन वर्ष है।
  • वैज्ञानिक उपकरण: अंतरिक्ष यान अपने साथ चार उपकरण ले जा रहा है, जिनमें एक सॉफ्ट एक्स-रे इमेजर, मैग्नेटोमीटर, लाइट आयन एनालाइजर और अल्ट्रावायलेट इमेजर शामिल हैं।
  • महत्त्व
    • सौर तूफान, सौर ज्वालाओं (Solar Flares) और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) की समझ और उनके पूर्वानुमान में सुधार करना।
    • बेहतर पूर्वानुमानों से उपग्रहों, GPS प्रणालियों, पॉवर ग्रिडों, संचार नेटवर्कों और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा में सहायता मिल सकती है।
  • पूर्व मैग्नेटोस्फीयर मिशन
    • SMILE चुंबकीय मंडल का अध्ययन करने के लिए डिजाइन किया गया पहला अंतरिक्ष मिशन नहीं है।
    • ESA के ‘स्वार्म’ (Swarm) और ‘क्लस्टर’ (Cluster) मिशनों ने पृथ्वी के चुंबकीय वातावरण तथा अंतरिक्ष मौसम की अंतःक्रियाओं के बारे में वैज्ञानिक समझ को काफी आगे बढ़ाया है।
    • पूर्व मिशनों के विपरीत, SMILE मिशन सौर पवनों और पृथ्वी के चुंबकीय मंडल के मध्य होने वाली अंतःक्रियाओं का वास्तविक समय में एक पूर्ण दृश्य प्रदान करेगा।

चुंबकीय मंडल (मैग्नेटोस्फीयर) क्या है?

  • पृथ्वी की चुंबकीय ढाल: मैग्नेटोस्फीयर पृथ्वी के चारों ओर का वह क्षेत्र है, जहाँ इसका चुंबकीय क्षेत्र प्रभावी होता है, जो पृथ्वी को हानिकारक सौर और ब्रह्मांडीय विकिरण से बचाता है।
  • निर्माण: इसका निर्माण पृथ्वी के बाहरी कोर (Outer Core) के भीतर पिघले हुए लोहे और निकल की गति से होता है, जो पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।
  • आकार: चुंबकीय मंडल एक धूमकेतु के आकार का चुंबकीय बुलबुला है, जो सूर्य की ओर वाले हिस्से पर संकुचित (Compressed) होता है और सौर पवनों के कारण विपरीत दिशा में खिंचा हुआ होता है।
    • सौर गतिविधि और अंतर-तारकीय (Interstellar) स्थितियों के आधार पर चुंबकीय मंडल अपना आकार और तीव्रता लगातार बदलता रहता है।
  • चुंबकीय मंडल का महत्त्व
    • सौर पवनों से सुरक्षा: यह सूर्य द्वारा उत्सर्जित आवेशित कणों और उच्च-ऊर्जा उत्सर्जन, जैसे कि सौर पवनों और कोरोनल मास इजेक्शन को मोड़ देता है।
    • वायुमंडलीय सुरक्षा: चुंबकीय मंडल पृथ्वी के वायुमंडल को सौर विकिरण द्वारा धीरे-धीरे नष्ट होने से बचाता है।
    • जीवन के लिए महत्त्व: पृथ्वी का चुंबकीय मंडल (मैग्नेटोस्फीयर) पृथ्वी पर जीवन को हानिकारक विद्युत आवेशित कणों, जैसे कि सौर पवन और ब्रह्मांडीय किरणों से बचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (UPSC CSE Pre 2012)
  • अंतरिक्ष मौसम अंतःक्रिया: सौर कणों और चुंबकीय मंडल के मध्य होने वाली अंतःक्रियाएँ ऐसे व्यवधान उत्पन्न करती हैं, जिन्हें ‘स्पेस वेदर’ (Space Weather) के रूप में जाना जाता है।
  • औरोरा (ध्रुवीय ज्योति) का निर्माण: जब आवेशित सौर कण पृथ्वी के ध्रुवों के पास गैसों के साथ क्रिया करते हैं, तो वे रंगीन औरोरा का निर्माण करते हैं, जिन्हें उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवीय ज्योति (Northern and Southern Lights) कहा जाता है।

अंडमान और निकोबार ने दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए 

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह ने मई 2026 में लगातार दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए हैं, जो भारत की मरीन एडवेंचर टूरिज्म (Marine Adventure Tourism) क्षमता और रणनीतिक द्वीप पहुँच को उजागर करते हैं।

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह द्वारा बनाए गए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

  • अंडरवाटर ह्यूमन स्टैक: अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह ने स्वराज द्वीप (Swaraj Dweep) के पास जल के नीचे सबसे ऊँचे ह्यूमन स्टैक के संदर्भ में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया।
    • ऊँचाई: जल के नीचे बनाए गए इस ह्यूमन स्टैक की ऊँचाई 22.3 मीटर मापी गई।
    • प्रतिभागी: इस रिकॉर्ड प्रयास में कुल 14 गोताखोरों ने भाग लिया।
    • अवधि: प्रतिभागियों ने जल के नीचे इस संरचना को तीन मिनट तक बनाए रखा।
  • सबसे बड़ा अंडरवाटर फ्लैग (जल के नीचे सबसे बड़ा झंडा): इन द्वीपों ने जल के भीतर दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर एक और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
    • झंडे का आकार: जल के भीतर फहराए गए इस राष्ट्रीय ध्वज का माप लगभग 60 × 40 मीटर था।
  • समन्वित अभियान: इन मिशनों को अंडमान और निकोबार प्रशासन, भारतीय रक्षा बलों, प्रशिक्षित गोताखोरों और तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से संचालित किया गया था।
  • उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य इन द्वीपों को एक ग्लोबल स्कूबा-डाइविंग और इको-टूरिज्म (पारिस्थितिकी पर्यटन) गंतव्य के रूप में बढ़ावा देना था।

स्पेस मीटिंग्स वेनेटो, 2026

IN-SPACe के नेतृत्व में इटली के वेनिस में आयोजित स्पेस मीटिंग्स वेनेटो, 2026 (Space Meetings Veneto 2026) में नौ भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप्स ने भाग लिया।

स्पेस मीटिंग्स वेनेटो, 2026 के बारे में

  • स्पेस मीटिंग्स वेनेटो, 2026 इटली के वेनिस में आयोजित एक ग्लोबल स्पेस एंड एयरोस्पेस बिजनेस कन्वेंशन है।
  • उद्देश्य: यह आयोजन अंतरिक्ष क्षेत्र में साझेदारी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अंतरिक्ष एजेंसियों, स्टार्ट-अप्स, उद्योगों, निवेशकों और नीति निर्माताओं को एक साथ लाता है।
  • मुख्य विषय: चर्चाओं का केंद्र बिंदु उपग्रह प्रौद्योगिकी, प्रक्षेपण सेवाएँ, अंतरिक्ष अवसंरचना, नेविगेशन सिस्टम, एयरोस्पेस विनिर्माण और उभरती अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी हैं।
  • महत्त्व: यह आयोजन वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में निजी अंतरिक्ष कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बढ़ती भूमिका को उजागर करता है।
  • भारत की भागीदारी: भारत-यूरोप अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा देने के लिए IN-SPACe के नेतृत्व में निजी अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स के एक प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से भारत ने भाग लिया।
  • प्रतिनिधिमंडल में एस्ट्रोगेट लैब्स, एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज, VyomIC, सुहोरा, केपलर एयरोस्पेस, हाइस्पेस टेक्नोलॉजीज, TakeMe2Space, जारबिट्स प्राइवेट लिमिटेड और ध्रुवा स्पेस शामिल थे।
  • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने और अधिकृत करने वाली नोडल एजेंसी है।

इंडियन रेड सैंड बोआ

राजस्व खुफिया निदेशालय के अधिकारियों ने वारंगल में अवैध वन्यजीव व्यापार को लक्षित करते हुए एक गुप्त अभियान के दौरान दो जीवित इंडियन रेड सैंड बोआ (Indian Red Sand Boa) साँप जब्त किए।

इंडियन रेड सैंड बोआ (Indian Red Sand Boa) के बारे में

  • यह एक विषहीन साँप है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है।
  • वैज्ञानिक नाम: एरीक्स जॉनी (Eryx Johnii)
  • वितरण: ये ईरान से लेकर पाकिस्तान होते हुए पश्चिमी, दक्षिणी और उत्तर-पश्चिमी भारत तक पाए जाते हैं।
  • आवास: शुष्क झाड़ीदार भूमि, रेतीले क्षेत्रों, कृषि क्षेत्रों और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
  • आहार संबंधी भूमिका: ये मांसाहारी होते हैं और मुख्य रूप से कृंतकों, छिपकलियों और छोटे पक्षियों को खाते हैं, जिससे कीट नियंत्रण में सहायता मिलती है।
  • शारीरिक विशेषताएँ: इनका शरीर मोटा, बेलनाकार, शल्क चिकने और पूँछ छोटी होती है।
    • इनकी आँखें छोटी होती हैं और इनकी त्वचा को रेत के कणों से बचाने के लिए इन पर कठोर, छोटे शल्क होते हैं।
  • प्रजनन: यह अंडजरायुज (Ovoviviparous) होता है।
    • अंडजरायुज प्रजनन की वह रणनीति है, जिसमें जानवर सीधे मादा के शरीर के भीतर अंडों से विकसित हुए जीवित बच्चों को जन्म देते हैं।
  • कानूनी संरक्षण
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची I
    • CITES स्थिति: परिशिष्ट II
    • IUCN स्थिति: निकट संकटग्रस्त।

मानव-हाथी संघर्ष अनुसंधान केंद्र

झारखंड सरकार ने पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) में देश का पहला एकीकृत मानव-हाथी संघर्ष अनुसंधान केंद्र (Integrated Human-Elephant Conflict Research Centre) स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।

एकीकृत मानव-हाथी संघर्ष अनुसंधान केंद्र के बारे में

  • स्थान: इस प्रस्तावित सुविधा के लिए लगभग 15 एकड़ भूमि की पहचान की गई है।
  • अनुसंधान का उद्देश्य: यह साक्ष्य-आधारित न्यूनीकरण रणनीतियों (Evidence-based Mitigation Strategies) का समर्थन करने के लिए पूरे भारत से मानव-हाथी संघर्ष के आँकड़ों का व्यवस्थित विश्लेषण करेगा।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग: हाथियों के व्यवहार के मूल्यांकन, संघर्ष के विश्लेषण और न्यूनीकरण अनुसंधान के लिए AI तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
  • व्यवहार संबंधी अध्ययन: यह अनुसंधान संघर्ष, झुंड के आपसी संपर्क, खाद्य-जल की तलाश, खतरे के संकेत, प्रजनन के मौसम के दौरान हाथियों के व्यवहार और उनकी ध्वनियों (Vocalisations) पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • मौसमी मूल्यांकन: यह केंद्र वर्षा, गर्मी और सर्दियों के मौसम के दौरान हाथियों के बदलते व्यवहार का अध्ययन करेगा।
  • पालतू/बंधक हाथियों (Captive Elephants) पर शोध: बंधक हाथियों से जुड़े अध्ययन संघर्ष के कारणों को समझने और बचाव के उपायों को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।

पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) के बारे में

  • स्थान: यह झारखंड के छोटानागपुर पठार क्षेत्र में अवस्थित है।
  • संरक्षित वन का दर्जा: इसे शुरुआत में वर्ष 1947 में एक संरक्षित वन (Protected Forest) के रूप में गठित किया गया था।
  • प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व: यह वर्ष 1973-74 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत बनाए गए देश के मूल नौ बाघ अभ्यारण्यों में से एक है।
  • प्रशासनिक विस्तार: यह रिजर्व मुख्य रूप से लातेहार जिले में और आंशिक रूप से गढ़वा जिले में अवस्थित है।
  • कोर-बफर संरचना: इस रिजर्व में 414.08 वर्ग किमी. का एक कोर एरिया (मुख्य क्षेत्र) है, जिसे क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (Critical Tiger Habitat) घोषित किया गया है, जिसमें बेतला राष्ट्रीय उद्यान (226.32 वर्ग किमी) शामिल है। यह कोर एरिया 715.85 वर्ग किमी. के बफर एरिया (मध्यवर्ती क्षेत्र) से घिरा हुआ है।
  • नदी प्रणाली: उत्तरी कोयल नदी (North Koel River) और उसकी सहायक नदियाँ इस रिजर्व से होकर बहती हैं।
  • जलवायु: वृष्टि-छाया प्रभाव के कारण पलामू टाइगर रिजर्व एक सूखा-प्रवण क्षेत्र है। यहाँ अधिकांश वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है और औसत वार्षिक वर्षा लगभग 1070 मिमी. है।
  • वन के प्रकार: यहाँ की वनस्पतियों में मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती (Tropical Dry Deciduous) और नम पर्णपाती (Moist Deciduous) वन शामिल हैं।
  • जैव विविधता: यहाँ पाए जाने वाले मुख्य जीवों में बाघ, एशियाई हाथी, तेंदुआ, स्लॉथ बीयर, गौर (भारतीय बाईसन) और जंगली कुत्ते (ढोल) शामिल हैं।

UNESCO/गिलेर्मो कानो विश्व प्रेस स्वतंत्रता पुरस्कार 2026

यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) ने सूडान संघर्ष के बीच प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए सूडानी जर्नलिस्ट सिंडिकेट (Sudanese Journalists Syndicate) को वर्ष 2026 यूनेस्को/गिलेर्मो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज (विश्व प्रेस स्वतंत्रता पुरस्कार) से सम्मानित किया है।

मुख्य बिंदु

  • सम्मान का कारण: सिंडिकेट को सूडान संघर्ष के दौरान प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा करने और पत्रकारों पर होने वाले हमलों की निंदा करने के लिए सम्मानित किया गया।
  • मीडिया पर संघर्ष का प्रभाव: वर्ष 2023 से, सूडान में पत्रकारों की हत्याओं, अधिकारों के उल्लंघन, मीडिया संस्थानों के बंद होने और मीडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर की तबाही का सामना करना पड़ा है।
  • भ्रामक सूचनाओं की चिंताएँ: यूनेस्को ने रेखांकित किया कि सूडान में संघर्ष की स्थितियों ने भ्रामक सूचनाओं (Misinformation), दुष्प्रचार (Disinformation) और वॉर प्रोपेगैंडा को बढ़ावा दिया है।
    • यूनेस्को ने दुनिया भर में पत्रकारों के विरुद्ध बढ़ते हमलों, कानूनी उत्पीड़न और ऑनलाइन हिंसा का भी जिक्र किया।

यूनेस्को/गिलेर्मो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज के बारे में

  • स्थापना: इस पुरस्कार की स्थापना यूनेस्को द्वारा वर्ष 1997 में की गई थी।
  • उद्देश्य: यह उन व्यक्तियों, संगठनों या संस्थानों को सम्मानित करता है, जिन्होंने विशेष रूप से खतरनाक परिस्थितियों में प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा और उसे बढ़ावा देने में उत्कृष्ट योगदान दिया है।
  • नामकरण: इस पुरस्कार का नाम कोलंबियाई पत्रकार गिलेर्मो कानो इसाजा (Guillermo Cano Isaza) के नाम पर रखा गया है, जिनकी वर्ष 1986 में ड्रग कार्टेल का भंडाफोड़ करने और स्वतंत्र प्रेस की रक्षा करने के कारण हत्या कर दी गई थी।
  • पुरस्कार प्रदाता संस्था: यह पुरस्कार यूनेस्को द्वारा प्रत्येक वर्ष विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (3 मई) के अवसर पर प्रदान किया जाता है।
  • महत्त्व: यह पत्रकारों और प्रेस स्वतंत्रता को समर्पित एकमात्र संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार है।
  • पुरस्कार राशि: विजेता को 25,000 अमेरिकी डॉलर की नकद राशि प्रदान की जाती है।
  • चयन प्रक्रिया: विजेताओं का चयन मीडिया पेशेवरों की एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जूरी द्वारा किया जाता है।

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