//php print_r(get_the_ID()); ?>
Lokesh Pal
May 11, 2026 05:15
4
0
संपादकीय में वर्ष 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद राज्यपाल के आचरण को लेकर उत्पन्न विवाद पर चर्चा की गई, जहाँ किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं हुआ, जिससे संवैधानिक नैतिकता, राज्यपालों की निष्पक्षता और संघवाद को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुईं।
किसी भी दल को पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं हुआ।
अनुच्छेद 164: राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है। परंपरागत रूप से, सबसे बड़े दल के नेता को सरकार बनाने के लिए पहले आमंत्रित किया जाता है।
इसकी मनमाना और राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण होने के तौर पर आलोचना की गई।
स्थापित प्राथमिकता क्रम (Established Order of Preference): सरकारिया आयोग, पुंछी आयोग और वेंकटचलैया आयोग जैसे विभिन्न आयोगों ने निम्नलिखित क्रम की सिफारिश की है:
अनुच्छेद 164(2): मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। कोई सरकार तभी गिरती है जब वह अविश्वास प्रस्ताव हार जाती है — न कि राज्यपाल के दरवाजे पर।
प्रमुख संवैधानिक अवधारणाएँ
|
राज्यपाल से अपेक्षा की जाती है कि वे एक निष्पक्ष संवैधानिक प्राधिकारी के रूप में कार्य करें, न कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल के प्रतिनिधि के रूप में। विवेकाधिकार का मनमाना प्रयोग संघवाद, लोकतांत्रिक नैतिकता और संवैधानिक शासन को कमजोर करता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न: एक त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) में सरकार गठन के समय राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ अक्सर पक्षपात के आरोपों को जन्म देती हैं। इस संदर्भ में संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) |
<div class="new-fform">
</div>

Latest Comments