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कामागाटामारू प्रकरण (वर्ष 1914) का महत्त्व

Lokesh Pal May 02, 2026 05:00 3 0

संदर्भ:

कामागाटामारू प्रकरण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक ऐतिहासिक घटना है, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य में निहित नस्लीय भेदभाव को उजागर किया।

कामागाटामारू प्रकरण के बारे में:

  • जहाज और उसके यात्री: कामागाटामारू (जिसे गुरु नानक जहाज के नाम से भी जाना जाता है) नामक एक जापानी जहाज को हॉन्गकॉन्ग से गुरदत्त सिंह द्वारा किराए पर लिया गया था।
  • इसमें 376 भारतीय यात्री सवार थे, जिनमें 340 सिख और साथ ही मुस्लिम तथा हिंदू शामिल थे, जिनमें से अधिकांश ने वैंकूवर में प्रवेश के लिए कनाडाई समाज में बेहतर ढंग से एकीकरण के लिए पश्चिमी सूट पहने थे।
  • कनाडाई अधिकारियों ने भेदभावपूर्ण आव्रजन कानूनों (कंटीन्यूअस जर्नी रेगुलेशन) का हवाला देते हुए उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया।
  • जहाज को भारत वापस जाने के लिए बाध्य किए जाने से पहले, वह लगभग दो महीने तक फंसा रहा।
  • कोलकाता के पास (Budge Budge) पहुँचने पर, ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तारी का प्रयास किया, जिससे व्यापक स्तर पर हिंसा तथा मौतें हुईं।
  • इस घटना ने औपनिवेशिक नीतियों में नस्लीय भेदभाव को उजागर किया।
  • यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्त्वपूर्ण घटना बन गई, जिसने राष्ट्रवादी भावनाओं और ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध को प्रारंभ किया।

भारतीय कामागाटामारू जहाज पर क्यों सवार हुए? 

  • इस समय, भारत-कनाडा दोनों ब्रिटिश उपनिवेश थे, भारतीयों का मानना था कि ब्रिटिश प्रजा के रूप में, उन्हें किसी भी ब्रिटिश उपनिवेश के भीतर स्वतंत्र रूप से यात्रा करने और निवास का अधिकार होना चाहिए।
  • वे ब्रिटिश नीतियों के कारण भारत में आर्थिक कठिनाइयों से बचना, और विदेश में बेहतर अवसर तलाशना चाहते थे।

वैंकूवर गतिरोध : 2 महीने का गहन प्रयास

  • आगमन – 23 मई, 1914 (बरार्ड इनलेट): जहाज 23 मई को वैंकूवर पहुँचा, लेकिन स्वागत की बजाय, इसका सामना नौसैनिक नाकाबंदी से हुआ।
  • लगभग दो महीनों तक, यात्री भोजन या पानी की पर्याप्त पहुँच के बिना जहाज पर फंसे रहे। केवल 24 यात्रियों को उतरने की अनुमति दी गई, जबकि बाकी इनलेट में फंसे रहे।
  • प्रतिरोध : 19 जुलाई, 1914 को जब कनाडाई पुलिस ने जबरन रवानगी के लिए जहाज पर चढ़ने की कोशिश की, तो यात्रियों ने व्यापक प्रतिरोध किया। पारंपरिक हथियारों की कमी के कारण, उन्होंने अधिकारियों पर कोयले और लोहे की छड़ें फेंककर अपना बचाव किया।

भारतीयों को प्रवेश से क्यों मना किया गया? 

  • एशियाई बहिष्कार लीग (1907): यह लीग कनाडा में इस स्पष्ट लक्ष्य के साथ बनाई गई थी, कि देश को ‘श्वेत’ (White) बनाए रखा जाए और एशियाई आव्रजन को रोका जाए।
  • निरंतर यात्रा विनियमन (1908): यह विशेष रूप से भारतीय प्रवासियों को रोकने के लिए बनाया गया एक भेदभावपूर्ण कानून था।
    • इसमें कहा गया था, कि केवल वे ही प्रवेश कर सकते हैं जो अपने मूल देश से सीधी, गैर-रुकने वाली यात्रा के माध्यम से आए हों। चूँकि भारत से आने वाले जहाजों को ईंधन और रसद के लिए रुकना पड़ता था, इसलिए यह भारतीयों पर एक प्रभावी अप्रत्यक्ष प्रतिबंध था।

तटीय समिति : न्याय के लिए विधिक संघर्ष

  • यात्रियों के समर्थन के लिए वैंकूवर में हुसैन रहीम के नेतृत्व में एक ‘शोर कमेटी’ बनाई गई थी।
  • उन्होंने कानूनी सहायता और रसद प्रदान करने के लिए $2,000 की महत्त्वपूर्ण राशि एकत्रित की, हालाँकि अंततः वे सरकार की नस्लवादी नीतियों के खिलाफ विधिक संघर्ष हार गए।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर प्रभाव

  • भ्रम का टूटना: इस घटना ने उस विश्वास को चकनाचूर कर दिया, कि भारतीयों के साथ ब्रिटिश साम्राज्य की समान प्रजा के रूप में व्यवहार किया जाएगा। इसने सिद्ध कर दिया कि साम्राज्य की नींव न्याय की  बजाय नस्लीय भेदभाव पर आधारित थी।
  • राष्ट्रवादी माँग में परिवर्तन: इससे पहले, कई भारतीय नेता ब्रिटिश शासन के तहत अधिक अधिकारों की माँग करने से संतुष्ट थे। हालाँकि, इस त्रासदी ने कई लोगों को आश्वस्त किया कि ब्रिटिश कभी भी वास्तविक न्याय प्रदान नहीं करेंगे, जिससे ‘पूर्ण स्वराज’ की माँग के लिए आधार निर्मित हुआ।
  • गदर पार्टी के लिए उत्प्रेरक: इस घटना ने गदर आंदोलन के लिए एक प्रमुख उत्प्रेरक के रूप में कार्य किया।
    • जब जहाज को भारत वापस जाने के लिए बाध्य किया गया और बज बज (जहाँ ब्रिटिश पुलिस द्वारा 20 से अधिक लोग मारे गए) में हिंसा का सामना करना पड़ा, तो इसने कई लोगों को क्रांतिकारी कारण से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
  • क्रांतिकारी संघर्ष को गति : हालाँकि गदर पार्टी का गठन 1913 में सैन फ्रांसिस्को में हुआ था, लेकिन इस घटना ने आंदोलन के लिए एक शक्तिशाली बल के रूप में कार्य किया, जिसने विदेशों में भारतीयों के संघर्षों को सीधे भारत में स्वतंत्रता के लिए क्रांतिकारी संघर्ष से जोड़ दिया।

गदर पार्टी का अवलोकन 

  • आदर्श और लक्ष्य: 1913 में सैन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल द्वारा गठित और बाद में सोहन सिंह भकना इसमें शामिल हुए, पार्टी का उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था।
    • उन्होंने उर्दू और गुजराती भाषा में अपने संदेश विस्तार के लिए ‘गदर’ नामक एक क्रांतिकारी समाचार पत्र प्रकाशित किया।
  • कामागाटामारू प्रकरण से संबंध: गदर पार्टी ने ब्रिटिश शासन की क्रूरता को उजागर करने के लिए कामागाटामारू त्रासदी का उपयोग किया। इस घटना ने पार्टी को हजारों भारतीयों को लामबंद करने और भर्ती करने में मदद की, जो अब आश्वस्त थे कि केवल क्रांति के माध्यम से ही वे गरिमा और स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: “1914 का कामागाटामारू प्रकरण केवल एक आव्रजन विवाद नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य के नस्लवादी पाखंड को उजागर किया तथा क्रांतिकारी स्वतंत्रता संग्राम को उत्प्रेरित किया।” चर्चा कीजिए।

(10 अंक, 150 शब्द)

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