Q. अपार सांस्कृतिक विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के बावजूद, भारत विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में छोटे देशों से पीछे है। भारत के पर्यटन क्षेत्र को बाधित करने वाली संरचनात्मक और अवधारणात्मक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। भारत को एक 'लुभावने विचार' से एक शीर्ष स्तरीय वैश्विक पर्यटन स्थल में बदलने के लिए एक बहुआयामी रणनीति सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • पर्यटन क्षेत्र में बाधा डालने वाली संरचनात्मक चुनौतियाँ 
  • पर्यटन क्षेत्र में बाधा डालने वाली धारणात्मक चुनौतियाँ 
  • भारत को शीर्ष गंतव्य में बदलने की रणनीति।

उत्तर

भारत अद्वितीय भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विविधताओं की भूमि है, फिर भी यह एक महत्त्वपूर्ण “पर्यटन घाटे” का सामना कर रहा है। अगस्त 2025 तक 5.6 मिलियन विदेशी पर्यटक आगमन (FTAs) दर्ज करने के बावजूद, भारत सिंगापुर (11.6 मिलियन) और थाईलैंड जैसे छोटे क्षेत्रीय समकक्षों से काफी पीछे है। यह अंतर अपनी सभ्यतागत धरोहरों को एक विश्वसनीय, कार्यात्मक और वैश्विक स्तर के आगंतुक अनुभव में परिवर्तित करने की महत्त्वपूर्ण असमर्थता को उजागर करता है।

पर्यटन क्षेत्र में बाधा डालने वाली संरचनात्मक चुनौतियाँ 

  • बुनियादी ढाँचे की कमियाँ : अनियमित अंतिम-मील कनेक्टिविटी, खराब सड़क रखरखाव, और दूरदराज के विरासत स्थलों पर स्वच्छ सार्वजनिक शौचालयों की भारी कमी लंबी दूरी के यात्रियों को हतोत्साहित करती है।
    • उदाहरण: वर्ष 2025 की क्रिसिल (CRISIL) रिपोर्ट में “अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे” और घरेलू होटलों की उच्च लागत को पर्यटकों द्वारा जॉर्जिया और अजरबैजान की ओर रुख करने का मुख्य कारण माना गया है।
  • लागत की हानि: होटल टैरिफ पर उच्च वस्तु एवं सेवा कर (GST) और गैर-प्रतिस्पर्द्धी हवाई किराये के कारण भारत में मध्यम श्रेणी की यात्रा अक्सर दक्षिण-पूर्व एशिया की तुलना में अधिक महँगी होती है।
  • मानव पूँजी की कमी: प्रशिक्षित आतिथ्य कर्मचारियों (Hospitality staff) में अनुमानित 40% की कमी है, जो बहुभाषी गाइडों और पेशेवर पर्यटन कॅरियर के अभाव से और बढ़ गई है।
  • नौकरशाही बाधाएँ: ई-वीजा विस्तार के बावजूद, जटिल प्रवेश प्रक्रियाएँ और आव्रजन काउंटरों पर संदेहजनक रवैया अक्सर देश की खराब “पहली छाप” बनाते हैं।
  • रखरखाव में असंगतता: जहाँ ताजमहल जैसे प्रमुख स्थलों पर ध्यान दिया जाता है, वहीं कम प्रसिद्ध स्मारक खराब संकेतक (Signage), अपशिष्ट प्रबंधन और प्रकाश व्यवस्था की कमी से जूझते हैं।

पर्यटन क्षेत्र में बाधा डालने वाली धारणात्मक चुनौतियाँ 

  • सुरक्षा और संरक्षा संबंधी चिंताएँ : महिलाओं की सुरक्षा को लेकर वैश्विक सुर्खियाँ और उत्पीड़न की छिटपुट घटनाएँ “अतुल्य भारत” की ब्रांडिंग को धूमिल करना जारी रखती हैं।
    • उदाहरण: वर्ष 2025 में सुरक्षा चिंताओं और छोटी सुरक्षा घटनाओं के बाद हुए नकारात्मक प्रचार के कारण वर्ष 2019 के स्तर की तुलना में विदेशी पर्यटकों के आगमन (FTAs) में 12% की गिरावट आई है।
  • स्वच्छता एवं प्रदूषण: खराब शहरी स्वच्छता की व्यापक धारणा और ‘गोल्डन ट्राएंगल’ सर्किट (दिल्ली-आगरा-जयपुर) में सर्दियों के दौरान धुंध उच्च मूल्य वाले शीतकालीन पर्यटकों को हतोत्साहित करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय विश्वास में कमी: प्रमुख स्थलों पर दलालों, जालसाजों और परेशान करने वालों की उपस्थिति अंतरराष्ट्रीय विश्वास को कमजोर करती है। यह भारतीय अनुभव को आरामदायक बनाने के बजाय “असहज/भारी” (Overwhelming) बना देती है।
  • नकारात्मक मीडिया विमर्श: नागरिक समस्याओं पर लगातार नकारात्मक वैश्विक रिपोर्टिंग थाईलैंड के “आसान” आतिथ्य की तुलना में भारत को एक “कठिन” गंतव्य होने की धारणा को जन्म देती है।

भारत को शीर्ष-स्तरीय गंतव्य में बदलने की रणनीति

  • “अतुल्य भारत” (खंडित विपणन): ‘वन साइज फिट्स आल’ वाले अभियान से हटकर MICE (बैठकें, प्रोत्साहन, सम्मेलन और प्रदर्शनियाँ), वेलनेस और बौद्ध सर्किट जैसे विशिष्ट क्षेत्रों को लक्षित करना।
    • उदाहरण: पर्यटन मंत्रालय वैश्विक आयोजनों में भारत की हिस्सेदारी को दोगुना करने के लिए वर्ष 2026 से स्वायत्त ‘सिटी MICE ब्यूरो’ की स्थापना कर रहा है।
  • “फंक्शनल इंडिया” मिशन: शीर्ष 50 स्थलों पर शौचालयों, अपशिष्ट प्रबंधन और मानकीकृत डिजिटल संकेतक (Signage) पर केंद्रित एक राष्ट्रव्यापी “स्वच्छ पर्यटन” अभियान को प्राथमिकता देना।
  • रणनीतिक सुरक्षा सुधार: ‘पर्यटक पुलिस बल’ का विस्तार करना, विशेष रूप से महिला अधिकारियों की भर्ती करना और एक केंद्रीकृत, सत्यापित गाइड तथा परिवहन स्थापित करना।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: साइट की सुविधाओं के रखरखाव और रिवर क्रूज जैसे अनुभवात्मक पर्यटन को विकसित करने में निजी कंपनियों को शामिल करने के लिए “एडॉप्ट ए हेरिटेज” (Adopt a Heritage) योजना का विस्तार करना।
  • प्रोत्साहन-आधारित विकास: पूँजीगत लागत को कम करने के लिए होटलों को “बुनियादी ढाँचे का दर्जा” देना और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्द्धियों से मुकाबला करने के लिए मध्यम श्रेणी के आवासों के लिए कम GST स्लैब की पेशकश करना।

निष्कर्ष

भारत को पुनर्निर्माण की नहीं, बल्कि परिष्कार की आवश्यकता है। एक “लुभावने विचार” से “वैश्विक पसंद” बनने के लिए, भारत को छवि के बजाय कार्यक्षमता को प्राथमिकता देनी होगी। सुरक्षा, विश्वसनीयता और बुनियादी ढाँचे में तालमेल बिठाकर, भारत अपने ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण का लाभ उठा सकता है। ऐसा करके वह न केवल आगंतुकों को आकर्षित करेगा, बल्कि एक ऐसा सुगम अनुभव प्रदान करेगा, जो इसके “अतुल्य” होने के वादे को सार्थक सिद्ध करेगा।

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