प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत में डीप-टेक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता।
- पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण में सार्वजनिक वस्तुओं एवं राजनीतिक पूँजी की भूमिका।
- ब्रेन सर्कुलेशन (Brain Circulation) तथा नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए आगे की राह।
|
उत्तर
परिचय
ब्रेन ड्रेन से ब्रेन सर्कुलेशन की ओर भारत का संक्रमण एक सशक्त डीप-टेक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की माँग करता है। जोखिम पूँजी में निवेश से आगे बढ़कर, यह आवश्यक है कि सार्वजनिक वस्तुओं तथा संस्थागत समर्थन की भूमिका का मूल्यांकन किया जाए, ताकि ब्रेन सर्कुलेशन को प्रोत्साहन मिले और सतत् नवाचार सुनिश्चित हो सके।
डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता
- अग्रणी तकनीकी क्षमता: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष तथा उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में डीप-टेक क्षमता रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता के लिए आवश्यक है।
- उदाहरण: राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (DST, 2023) का उद्देश्य क्वांटम प्रौद्योगिकियों में भारत को अग्रणी बनाना है।
- वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा: विभिन्न देश अग्रणी अनुसंधान एवं विकास में भारी निवेश कर रहे हैं, जिससे एक सक्षम नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
- स्टार्ट-अप विस्तार: डीप-टेक स्टार्ट-अप्स को पारंपरिक आईटी सेवाओं की तुलना में अधिक समयावधि और दीर्घकालिक समर्थन की आवश्यकता होती है।
- उदाहरण: इनोवेशन्स फॉर डिफेन्स एक्सीलेंस (iDEX) रक्षा क्षेत्र की दीर्घकालिक तकनीकों पर कार्य करने वाले नवाचार स्टार्ट-अप्स को समर्थन प्रदान करता है।
- ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था: सेवा-आधारित विकास से नवाचार-आधारित विकास की ओर संक्रमण के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) की तीव्रता बढ़ाना आवश्यक है।
- उदाहरण: नीति आयोग का ‘इंडिया इनोवेशन इंडेक्स’ उच्च-प्रौद्योगिकी नवाचार क्लस्टरों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल देता है।
- प्रतिभा संरक्षण: डीप-टेक अवसरों के अभाव में कुशल प्रतिभाएँ उन्नत अनुसंधान एवं नवाचार के लिए विदेशों की ओर पलायन कर जाती हैं।
Best Online Coaching for UPSC
सार्वजनिक वस्तुओं एवं राजनीतिक पूँजी की भूमिका
सार्वजनिक वस्तुएँ
- शहरी जीवन-योग्यता: स्वच्छ वायु, हरित क्षेत्र तथा अन्य गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सुविधाएँ शहरों में प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बनाए रखने में सहायक होती हैं।
- अनुसंधान अवसंरचना: सुदृढ़ प्रयोगशालाएँ एवं विश्वविद्यालय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के विकास का आधार प्रदान करते हैं।
- उदाहरण: भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बंगलूरू तथा आईआईटी को PM-STIAC के अंतर्गत उन्नत अनुसंधान अवसंरचना के लिए समर्थन प्रदान किया गया है।
- डिजिटल आधारभूत संरचना: विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना एआई तथा डीप-टेक के विस्तार को गति प्रदान करती है।
- उदाहरण: इंडिया स्टैक (आधार, UPI) ने डिजिटल नवाचार के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।
- शहरी गतिशीलता: कुशल परिवहन व्यवस्था प्रतिभाओं के एकीकरण एवं नवाचार केंद्रों के विकास में आने वाली बाधाओं को कम करती है।
- उदाहरण: स्मार्ट सिटीज मिशन के अंतर्गत मेट्रो नेटवर्क के विस्तार ने शहरी नवाचार केंद्रों को सुदृढ़ किया है।
राजनीतिक पूँजी
- नीतिगत स्थिरता: पूर्वानुमेय एवं स्थिर नीतियाँ दीर्घकालिक वेंचर निवेश तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) निवेश को आकर्षित करती हैं।
- उदाहरण: स्टार्ट-अप इंडिया पहल नवोन्मेषकों को कर (Tax) तथा नियामकीय स्पष्टता प्रदान करती है।
- नियामकीय सुगमता: किराया-उपार्जन (Rent-Seeking) और अनावश्यक अनुपालन बोझ में कमी से डीप-टेक व्यवसायों के संचालन में सुगमता आती है।
- उदाहरण: जन विश्वास अधिनियम, 2023 ने कई छोटे व्यावसायिक अनुपालनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया है।
- वैश्विक संपर्क: राजनीतिक कूटनीति नवाचार एवं प्रौद्योगिकी साझेदारियों को प्रोत्साहित करती है।
- उदाहरण: ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम में रेखांकित भारत-फ्राँस नवाचार सहयोग।
- विश्वास-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र: सुदृढ़ संस्थाएँ नवोन्मेषकों के लिए अनिश्चितता को कम करती हैं।
- उदाहरण: DPIIT के अंतर्गत बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) व्यवस्था में किए गए सुधारों ने डीप-टेक क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।
Click to Know UPSC Offline Courses
निष्कर्ष
भारत धैर्यपूर्ण पूंजी (Patient Capital) को गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक वस्तुओं, स्थिर नीतियों तथा दृढ़ राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ जोड़कर ब्रेन ड्रेन को ब्रेन सर्कुलेशन में परिवर्तित कर सकता है। यह समन्वित दृष्टिकोण भारत को केवल प्रतिभा निर्यातक देश से आगे बढ़ाकर वैश्विक नवाचार नेतृत्वकर्ता तथा ब्रेन सर्कुलेशन आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित कर सकता है।