प्रश्न की मुख्य माँग
- चिकित्सा प्रशिक्षण में मानव शवों (Cadavers) के उपयोग से जुड़े नैतिक सरोकार।
- भारतीय चिकित्सा पाठ्यक्रम में साइलेंट मेंटर (Silent Mentor) दर्शन के एकीकरण की आवश्यकता एवं उपाय।
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उत्तर
परिचय
मानव शव (Cadavers) शरीर रचना विज्ञान (Anatomy) के अध्ययन तथा नैदानिक कौशल विकास के लिए चिकित्सा प्रशिक्षण का एक महत्त्वपूर्ण आधार हैं। किंतु इनके उपयोग से गरिमा, सहमति और व्यावसायिक आचरण से जुड़े गंभीर नैतिक प्रश्न उत्पन्न होते हैं, जिसके कारण चिकित्सा शिक्षा में एक मानवीय एवं मूल्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक हो जाता है।
नैतिक सरोकार
- गरिमा का उल्लंघन: शवों के प्रति असंवेदनशील हास्य या अनादरपूर्ण व्यवहार मानवीय गरिमा तथा चिकित्सा नैतिकता को कमजोर करता है।
- उदाहरण: हाल ही में एक चिकित्सा छात्रा द्वारा शवों से संबंधित किए गए मजाक ने चिकित्सा प्रशिक्षण में समानुभूति की कमी को लेकर व्यापक जन-आक्रोश उत्पन्न किया।
- सहमति की अस्पष्टता: अनेक शव लावारिस होते हैं, जिससे उनकी सूचित सहमति और उपयोग की नैतिक वैधता पर प्रश्न उठते हैं।
- उदाहरण: एनाटॉमी एक्ट, 1948 के अंतर्गत लावारिस शवों का उपयोग चिकित्सा महाविद्यालयों में किया जाता है, जिससे स्पष्ट सहमति के अभाव को लेकर नैतिक बहस उत्पन्न होती है।
- समानुभूति का क्षरण: मजाक तथा सोशल मीडिया कंटेंट का सामान्यीकरण चिकित्सा शिक्षा में समानुभूति के कमजोर होने को दर्शाता है।
- प्रतीकात्मक नैतिक शिक्षा: नैतिक शिक्षा अक्सर केवल औपचारिकता तक सीमित रह जाती है और विद्यार्थियों में मूल्यों का गहन आत्मसात् नहीं हो पाता है।
- उदाहरण: NMC कैडेवरिक शपथ (Cadaveric Oath) तथा फाउंडेशन कार्यक्रम मौजूद हैं, किंतु उनका क्रियान्वयन प्रायः प्रतीकात्मक या गैर-मूल्यांकित रूप में होता है।
- जन-विश्वास को क्षति: अनैतिक आचरण से चिकित्सकों तथा चिकित्सा संस्थानों के प्रति समाज का विश्वास कम हो सकता है।
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साइलेंट मेंटर दर्शन का एकीकरण
- शव सम्मान अनुष्ठान: संरचित समारोहों के माध्यम से शरीर दाताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को सुदृढ़ किया जा सकता है।
- उदाहरण: NMC कैडेवरिक शपथ (Cadaveric Oath) का प्रभावी क्रियान्वयन तथा भारतीय चिकित्सा महाविद्यालयों में शवों को पुष्प अर्पित कर सम्मान देने जैसी प्रथाएँ।
- दाता सम्मान प्रणाली: देह दाताओं को सम्मानित करने से चिकित्सा शिक्षा अधिक मानवीय बन सकती है तथा नैतिक जागरूकता विकसित हो सकती है।
- उदाहरण: मलेशिया के साइलेंट मेंटर कार्यक्रम (Silent Mentor Programme) में शरीर दाताओं के सम्मान में स्मृति समारोह आयोजित किए जाते हैं, जो कृतज्ञता-आधारित शिक्षण को प्रोत्साहित करते हैं।
- प्रारंभिक नैतिक शिक्षा: प्रवेश स्तर पर समानुभूति-आधारित मॉड्यूल शामिल करने से विद्यार्थियों में नैतिक आधार विकसित किया जा सकता है।
- चिंतनशील अधिगम: विद्यार्थियों को शव की पहचान और उसके जीवन के संदर्भ में चिंतन करने के लिए प्रोत्साहित करने से भावनात्मक उत्तरदायित्व विकसित होता है।
- समानुभूति का मूल्यांकन: पाठ्यक्रम के परिणामों में नैतिकता, सम्मान और समानुभूति का औपचारिक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
- उदाहरण: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के योग्यता-आधारित चिकित्सा शिक्षा (CBME) ढाँचे में मनोवृत्ति, नैतिकता तथा संचार कौशल को मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया है।
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निष्कर्ष
भारतीय चिकित्सा शिक्षा में साइलेंट मेंटर दर्शन (Silent Mentor Philosophy) का समावेशन सहानुभूति को पुनर्स्थापित करने, नैतिक आचरण को सुदृढ़ करने तथा मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है। इससे मानव शवों को केवल शिक्षण सामग्री के रूप में नहीं, बल्कि गरिमा और सम्मान के पात्र साइलेंट टीचर्स (Silent Teachers) के रूप में देखा जाएगा।