संदर्भ
भारत को LPG सिलेंडर की बढ़ती कमी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े व्यवधानों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
तरल पेट्रोलियम गैस (LPG)
- तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) एक ज्वलनशील हाइड्रोकार्बन ईंधन है, जो मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन से बनता है और इसे कच्चे तेल के शोधन और प्राकृतिक गैस की प्रक्रिया के दौरान प्राप्त किया जाता है।
- इसे मध्यम दाब में तरल रूप में संग्रहित और परिवहन किया जाता है और छोड़ने पर यह गैस में परिवर्तित हो जाता है, जिससे यह घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त हो जाता है।
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संबंधित तथ्य
- सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की धाराओं का उपयोग करते हुए LPG और CNG को प्राथमिकता सूची में रखा है, ताकि जमाखोरी को रोका जा सके और आपूर्ति को स्थिर बनाया जा सके।
- भारत में रणनीतिक LPG भंडारण का अभाव: भारतीय LPG प्रणाली को संचालन के प्रवाह के लिए डिजाइन किया गया है, न कि भंडारण के लिए।
- ऑटो ईंधनों के मामले में जहाँ कच्चे तेल और उत्पादों का रणनीतिक भंडार दो महीने की खपत के बराबर होता है, LPG के लिए ऐसा प्रावधान नहीं है।
- अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने LPG भंडारण अवसंरचना की कमी को एक बड़ी कमजोरी के रूप में चिह्नित किया है।
- आयात निर्भरता: भारत की आवश्यकताओं का लगभग 60% आयात पर निर्भर है। भारत की आयात निर्भरता वर्ष 2015 में 47% थी, जो वर्तमान में बढ़कर 60% हो गई है।
- उच्च LPG खपत: भारत की मासिक कुल LPG खपत लगभग 30 लाख टन है, जिससे यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है।
- उदाहरण के लिए, भारत की दैनिक LPG खपत लगभग 80,000 टन है, जिसमें से 85% से अधिक घरेलू उपयोग के लिए जाता है।
- PMUY के माध्यम से LPG पहुँच का विस्तार: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत वर्ष 2017 से लगभग 10 करोड़ LPG कनेक्शन जोड़े गए हैं, जिससे कुल घरेलू कनेक्शन 33 करोड़ तक पहुँच गया है।
- यह योजना गरीब महिलाओं को जमा-रहित LPG कनेक्शन प्रदान करती है, खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देती है, लेकिन साथ ही LPG खपत और आयात निर्भरता को भी बढ़ाती है।
- यूएस से आयात में लंबा समय: भारत ने फरवरी में अमेरिका के साथ वार्षिक रूप से 22 लाख टन LPG आयात समझौता किया, लेकिन अमेरिकी जहाजों को भारत पहुँचने में लगभग 45 दिन लगते हैं, जबकि फारस की खाड़ी के जहाज तेजी से पहुँचते हैं।
| स्थान |
क्षमता |
स्थिति |
| विशाखापत्तनम |
~60,000 टन |
वर्ष 2007 में कमीशन किया गया |
| मंगलुरु |
~80,000 टन |
वर्ष 2025 में संचालन शुरू। |
सॉल्ट कैवर्न (Salt Caverns)
- सॉल्ट कैवर्न, मोटे रॉक सॉल्ट (Rock salt) निक्षेप द्वारा निर्मित बड़े भूमिगत गुहानुमा स्थान होते हैं।
- ये गुहानुमा स्थान स्थिर और अप्रवाहित होते हैं, जो विभिन्न पदार्थों के भंडारण के लिए उपयुक्त हैं।
- सॉल्ट कैवर्न का व्यापक उपयोग हाइड्रोकार्बन जैसे कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, LPG और हाइड्रोजन के भूमिगत भंडारण के लिए किया जाता है।
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भारत में भंडारण के लिए भू-वैज्ञानिक विकल्प
- भारत को मोटे तौर पर गैस भंडारण के लिए प्रासंगिक तीन भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है।
- भारत को गैस भंडारण के संदर्भ में मुख्य रूप से तीन भू-वैज्ञानिक क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है।
- पहला क्षेत्र है पेनिन्सुलर शील्ड (Peninsular Shield) – यह एरकेन क्रेटोनिक बेसमेंट है, जिसमें ग्रेनाइट, ग्नीस और चार्नोकाइट शामिल हैं और यह भारतीय प्रायद्वीप के लगभग 60% हिस्से के नीचे विस्तृत है।
- दूसरा क्षेत्र है-डेक्कन ट्रैप्स (Deccan Traps) – यह विशाल बेसाल्टिक पठार है जो पश्चिम और मध्य भारत के लगभग 5,00,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ढकता है।
- तीसरा क्षेत्र है-राजस्थान के बीकानेर–बाड़मेर बेल्ट के सॉल्ट फॉर्मेशन (Salt formations)।
- इन हैलाइट का उपयोग कैवर्न भंडारण (Cavern storage) के लिए किया जा सकता है।
यूरोप में गैस भंडारण नीतियाँ और क्षमता
- यूरोप में गैस भंडारण क्षमता: यूरोप अपनी कुल वार्षिक गैस खपत का लगभग 25% भंडारण कर सकता है।
- रणनीतिक गैस भंडार का अनिवार्य प्रावधान नहीं: तेल की तरह (जिसके लिए 90 दिन का आपातकालीन भंडार आवश्यक है), यूरोपीय देशों में सरकारी नियंत्रित अनिवार्य रणनीतिक गैस भंडार नहीं है।
- EU भंडारण नीति (2022): रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद वर्ष 2022 में यूरोपीय संघ ने गैस भंडारण भरने के लक्ष्य तय किए।
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