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भारत की शहरी अवसंरचना

16 Mar 2026

संदर्भ

आवास और शहरी मामलों पर संसदीय स्थायी समिति ने वर्ष 2047 तक भारत की शहरी अवसंरचना, वित्तपोषण, शासन और क्षमता संबंधी आवश्यकताओं का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन की सिफारिश की है।

संबंधित तथ्य

  • संसदीय समिति की टिप्पणी: आवास एवं शहरी मामलों की स्थायी समिति ने पाया कि अमृत 2.0, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0, पीएम ई-बस सेवा जैसे कार्यक्रम मुख्य रूप से योजना-आधारित और क्षेत्र-विशिष्ट हैं, जिनमें एक एकीकृत दीर्घकालिक शहरी रणनीति का अभाव है।
    • सरकार का दृष्टिकोण: आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने कहा कि उपर्युक्त चल रहे मिशन शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर रहे हैं और विकसित भारत 2047 का समर्थन कर रहे हैं।
  • सबसे हालिया व्यापक शहरी अवसंरचना मूल्यांकन 2011 में एक उच्चाधिकार प्राप्त विशेषज्ञ समिति (HPEC) द्वारा किया गया था, जिसमें केवल वर्ष 2031 तक के अनुमान शामिल थे और यह भविष्यवाणी की गई थी कि वर्ष 2030 तक 75% भारतीय, शहरों के निवासी होंगे।
    • समिति ने पाया कि वर्ष 2030 के बाद की माँगों के लिए कोई अद्यतन राष्ट्रीय स्तर का मूल्यांकन मौजूद नहीं है।

भारत के शहरी बुनियादी ढाँचे के बारे में

  • शहरी अवसंरचना से तात्पर्य उन भौतिक और संस्थागत सुविधाओं से है, जो शहरों में कामकाज, आर्थिक गतिविधियों और जीवन की गुणवत्ता का समर्थन करती हैं, जिनमें जल आपूर्ति, स्वच्छता, आवास, परिवहन, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी शामिल हैं।

शहरी बुनियादी ढाँचे में सुधार के लिए सरकारी पहल

  • स्मार्ट सिटी मिशन: प्रौद्योगिकी आधारित शहरी प्रबंधन और स्मार्ट अवसंरचना को बढ़ावा देता है।
  • अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन 2.0: जल आपूर्ति और सीवरेज सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0: स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाता है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी: किफायती आवास उपलब्ध कराती है।
  • पीएम ई-बस सेवा: शहरों में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देती है।

शहरी अवसंरचना के प्रमुख घटक

  • जल आपूर्ति और स्वच्छता: विश्वसनीय पेयजल और अपशिष्ट प्रबंधन जन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं।
    • उदाहरण: अमृत 2.0 शहरों में सार्वभौमिक नल जल आपूर्ति और बेहतर सीवरेज प्रणालियों पर केंद्रित है।
  • शहरी आवास: किफायती आवास झुग्गी-झोपड़ियों और आवास की कमी को दूर करने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
    • उदाहरण: प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी का उद्देश्य शहरी गरीबों को आवास प्रदान करना है।
  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: अपशिष्ट का उचित संग्रहण और प्रसंस्करण शहरी स्वच्छता और पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखने में सहायक है।
    • उदाहरण: स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 अपशिष्ट पृथक्करण और वैज्ञानिक अपशिष्ट निपटान को बढ़ावा देता है।
  • शहरी परिवहन: कुशल परिवहन से भीड़भाड़, प्रदूषण और यात्रा का समय कम होता है।
    • उदाहरण: दिल्ली मेट्रो ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन में सुधार किया है और यातायात की भीड़ को कम किया है।

शहरी अवसंरचना में चुनौतियाँ

  • बुनियादी ढाँचे का अभाव: कई शहरों में पर्याप्त जल आपूर्ति, सीवेज उपचार और परिवहन सुविधाओं का अभाव है।
    • उदाहरण के लिए: मुंबई जैसे शहरों में अनौपचारिक बस्तियों में अभी भी स्वच्छता और आवास की अपर्याप्त व्यवस्था है।
  • खंडित योजना: शहरी परियोजनाएँ प्रायः एकीकृत योजना ढाँचे के बजाय क्षेत्र-विशिष्ट योजनाओं के तहत संचालित होती हैं।
    • उदाहरण के लिए: स्मार्ट सिटी मिशन को लागू करने वाले शहरों में स्मार्ट सड़कों या निगरानी प्रणालियों जैसी परियोजनाएँ व्यापक परिवहन या भूमि उपयोग योजना से अलग विकसित की जाती हैं।
  • वित्तपोषण संबंधी बाधाएँ: शहरी स्थानीय निकायों के पास प्रायः सीमित राजस्व स्रोत और कमजोर वित्तीय क्षमता होती है, जिससे बुनियादी ढाँचे में निवेश प्रभावित होता है।
    • उदाहरण के लिए: दिल्ली नगर निगम को प्रायः वित्तीय संकट का सामना करना पड़ता है, जिससे वेतन भुगतान में देरी होती है और शहरी सेवा वितरण प्रभावित होता है।
  • शहरी असमानता और अनौपचारिक बस्तियाँ: तेजी से शहरीकरण के कारण झुग्गी-झोपड़ियों और अनौपचारिक आवासों का विकास हुआ है।
    • उदाहरण के लिए: मुंबई में धारावी जैसी बड़ी अनौपचारिक बस्तियों को स्वच्छता, आवास और बुनियादी सेवाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

आगे की राह

  • एकीकृत शहरी नियोजन: शहरों को सतत् विकास लक्ष्यों के अनुरूप दीर्घकालिक, एकीकृत अवसंरचना नियोजन ढाँचे अपनाने चाहिए ताकि परिवहन, आवास और जल आपूर्ति जैसे क्षेत्रों का समन्वित विकास सुनिश्चित हो सके।
    • उदाहरण के लिए, ‘अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन’ (AMRUT) शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति और सीवरेज अवसंरचना के नियोजित विकास को बढ़ावा देता है।
  • शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त बनाना: नगरपालिकाओं की वित्तीय स्वायत्तता, प्रशासनिक क्षमता और शासन प्रभावशीलता को बढ़ाना शहरी अवसंरचना तथा सेवा वितरण में सुधार के लिए आवश्यक है।
  • प्रौद्योगिकी और स्मार्ट समाधानों का उपयोग: स्मार्ट गतिशीलता, डिजिटल शासन और डेटा-आधारित शहरी नियोजन को अपनाने से शहरी सेवाओं की दक्षता में सुधार हो सकता है।
    • उदाहरण के लिए, स्मार्ट सिटी मिशन पुणे जैसे शहरों में एकीकृत कमांड सेंटर और यातायात प्रणालियों सहित प्रौद्योगिकी-आधारित शहरी प्रबंधन को बढ़ावा देता है।
भारत की शहरी अवसंरचना

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