पश्चिम एशिया संघर्ष और भारत के मुख्य उद्योगों पर इसका प्रभाव

7 Mar 2026

संदर्भ

पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष, जिसमें ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं, न केवल वैश्विक तेल और गैस बाजारों को बाधित कर रहा है बल्कि भारत को महत्त्वपूर्ण औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति को भी खतरे में डाल रहा है।

संबंधित तथ्य

  • यह क्षेत्र औद्योगिक खनिजों और लागत का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है और भारत ने वर्ष 2025 में पश्चिम एशिया से 98.7 अरब डॉलर मूल्य के वस्तुओं का आयात किया, जिससे कई प्रमुख क्षेत्र आपूर्ति व्यवधानों के प्रति संवेदनशील हो गए हैं।
  • यह संकट भारत के लिए एक महत्त्वपूर्ण आपूर्ति-शृंखला कमजोरी को उजागर करता है, यह दर्शाते हुए कि औद्योगिक सुरक्षा और विनिर्माण लचीलापन पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिरता से निकटता से जुड़े हुए हैं।

प्रमुख निष्कर्ष – क्षेत्रवार प्रभाव

यह संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के चार प्रमुख स्तंभों—निर्माण, कृषि, विनिर्माण और ऊर्जा अवसंरचना—को प्रभावित करता है।

  • निर्माण और सीमेंट क्षेत्र: भारत अपने चूना पत्थर का 68.5% और जिप्सम का 62.1% पश्चिम एशिया से आयात करता है, जो दोनों सीमेंट उत्पादन तथा अवसंरचना परियोजनाओं के लिए आवश्यक हैं।
  • उर्वरक क्षेत्र (कृषि): भारत के लगभग 65.8% सल्फर आयात इसी क्षेत्र से आते हैं। सल्फर का उपयोग सल्फ्यूरिक अम्ल बनाने के लिए किया जाता है, जो उर्वरक निर्माण में एक प्रमुख इनपुट है।
  • इस्पात उद्योग: भारत अपने ‘डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन’ (DRI) का 59.1% पश्चिम एशिया से आयात करता है, जो इस्पात निर्माण और औद्योगिक विनिर्माण के लिए एक महत्त्वपूर्ण कच्चा माल है।
  • विद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना: भारत के लगभग 50.7% ताँबे के तारों का आयात इसी क्षेत्र से आता है, जो विद्युत प्रसारण नेटवर्क, विद्युत उपकरण, विद्युत वाहन अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
  • रत्न और आभूषण क्षेत्र: भारत के 40% से अधिक कच्चे हीरे पश्चिम एशिया से आयात किए जाते हैं और सूरत जैसे कटाई और पॉलिशिंग केंद्रों में संसाधित किए जाते हैं।

भारत के प्रमुख उद्योगों के बारे में

  • भारत के आठ प्रमुख उद्योग औद्योगिक अर्थव्यवस्था के आधार का प्रतिनिधित्व करते हैं और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में लगभग 40% भार का योगदान करते हैं। इनमें शामिल हैं:
    • कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, परिशोधित पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और विद्युत।
  • ये क्षेत्र अवसंरचना विकास, ऊर्जा सुरक्षा, विनिर्माण वृद्धि और समग्र आर्थिक गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

भारत के लिए रणनीतिक चिंताएँ

  • आपूर्ति-पक्षीय मुद्रास्फीति: चूना पत्थर और जिप्सम के आयात में व्यवधान से सीमेंट की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान जैसी अवसंरचना पहलों में देरी हो सकती है।
  • ऊर्जा–इस्पात संबंध: कई भारतीय इस्पात संयंत्र अपने कार्बन उत्सर्जन में कमी की रणनीति के हिस्से के रूप में द्रवीकृत प्राकृतिक गैस और गैस-आधारित प्रौद्योगिकियों पर निर्भर हैं, जिससे यह क्षेत्र वैश्विक गैस कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य अवरोध बिंदु: विश्व के सबसे महत्त्वपूर्ण व्यापार मार्गों में से एक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर होने वाले नौवहन में व्यवधान भारत के 100 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के व्यापार प्रवाह को जोखिम में डाल सकता है।
  • उर्वरक आपूर्ति जोखिम: यद्यपि वर्तमान गैर-मौसमी अवधि के कारण उर्वरक क्षेत्र को तत्काल प्रभाव का सामना नहीं करना पड़ सकता, लेकिन लंबे समय तक व्यवधान बने रहने पर आगामी कृषि मौसम के लिए यूरिया उत्पादन और उर्वरक उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

आगे की राह

  • आयात स्रोतों का विविधीकरण: उद्योग विशेषज्ञों का सुझाव है कि चूना पत्थर की आपूर्ति थाईलैंड और वियतनाम से तथा ‘डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन’ (DRI) की आपूर्ति लीबिया या मलेशिया जैसे देशों से की जा सकती है, हालाँकि इन विकल्पों में अधिक परिवहन लागत शामिल हो सकती है।
  • ऊर्जा सुरक्षा उपाय: भारत रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाकर तथा संयुक्त राज्य अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया जैसे-देशों के साथ दीर्घकालिक द्रवीकृत प्राकृतिक गैस अनुबंधों की खोज करके अपने ऊर्जा आयात का और अधिक विविधीकरण कर सकता है।
  • घरेलू खनिज आपूर्ति को सुदृढ़ करना: यह संकट चूना पत्थर और जिप्सम के घरेलू खनन को तेज करने की आवश्यकता को उजागर करता है, ताकि एक ही क्षेत्र से आयात पर अत्यधिक निर्भरता को कम किया जा सके।
  • आपूर्ति शृंखला का लचीलापन: भू-राजनीतिक व्यवधानों से भारतीय विनिर्माण की सुरक्षा के लिए लचीली और विविधीकृत औद्योगिक आपूर्ति शृंखलाओं का विकास महत्त्वपूर्ण है।

पश्चिम एशिया क्षेत्र के बारे में

  • इस क्षेत्र में खाड़ी सहयोग परिषद के छह सदस्य— बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात— शामिल हैं। साथ ही ईरान, इराक, इजरायल, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देश भी शामिल हैं।

3 5

  • यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और औद्योगिक कच्चे माल के लिए एक रणनीतिक केंद्र है।

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.